क्या बेटियों और बहनों को नुकसान पहुंचाने वालों को बख्शा जाएगा? : संजय निषाद
सारांश
Key Takeaways
- बेटियों और बहनों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
- अपराधी की जाति का कोई महत्व नहीं है।
- चुनाव आयोग स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था है।
- ओवैसी को महिलाओं के अधिकारों पर पहले ध्यान देना चाहिए।
- सरकार कानून के तहत कार्रवाई कर रही है।
लखनऊ, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मेरठ हत्याकांड को लेकर विपक्ष द्वारा योगी सरकार पर उठाए गए सवालों के जवाब में मंत्री संजय निषाद ने स्पष्ट किया कि बेटियों और बहनों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। लखनऊ में राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए मंत्री ने कहा कि अपराधी की जाति नहीं होती, और ऐसी सभी घटनाएं अत्यंत निंदनीय हैं।
संजय निषाद ने आगे कहा कि एक सभ्य समाज में इस तरह के कृत्यों के लिए कोई स्थान नहीं है। कानून अपना काम कर रहा है। हमारे मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बार-बार कहा है कि उत्तर प्रदेश में किसी भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई जाति के आधार पर नहीं की जाती। जो भी हमारी बेटियों और बहनों को नुकसान पहुंचाएगा, पुलिस उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी। ऐसे मामलों में कानून तेजी से काम कर रहा है और सख्त कार्रवाई की जाएगी। निश्चित रूप से सख्त कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता केवल बयानबाजी कर रहे हैं, वे अब केवल पोस्टर वाले नेता बन गए हैं। उन्हें अपने कार्यकाल की याद दिलानी चाहिए, कि कैसे दिनदहाड़े अपराध होते थे।
एसआईआर से संबंधित सपा नेताओं के विरोध पर मंत्री ने कहा कि जनता विपक्षी नेताओं को केवल बयानों और पोस्टरों वाले नेताओं के रूप में देख रही है। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और इसका कार्य स्वतंत्र है। आयोग अपने तरीके से काम करता है, जिस पर सरकार का कोई प्रभाव नहीं होता। अगर विपक्ष सवाल उठा रहा है, तो उन्हें यह याद रखना चाहिए कि आयोग ने ही चुनाव कराए थे, जब वे सत्ता में आए थे। आयोग पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
संजय निषाद ने कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया के अनुसार, जिनकी मैपिंग नहीं है, उन्हें दस्तावेज देने चाहिए। यदि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ना है, तो वे ऐसा कर सकते हैं। ऑफलाइन और ऑनलाइन मोड में आयोग की सेवाएं उपलब्ध हैं।
ओवैसी द्वारा हिजाब पहने वाली महिला के प्रधानमंत्री बनने के सपने पर मंत्री ने कहा कि ओवैसी को पहले अपने धार्मिक स्थलों पर महिलाओं को पुरुषों के बराबर सम्मान दिलाना चाहिए, फिर राजनीति की बात करनी चाहिए।