गुजरात में 1,000 'जनरक्षक' वाहन तैनात, 8 मिनट में इमरजेंसी रिस्पॉन्स का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 25 अगस्त 2026 को 112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम के तहत तैनात वाहनों की संख्या दोगुनी कर दी है। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने गांधीनगर में 500 नए 'जनरक्षक' वाहनों को हरी झंडी दिखाई, जिससे राज्य में चौबीसों घंटे उपलब्ध ऐसे वाहनों की कुल संख्या 1,000 हो गई है। सरकार का लक्ष्य पुलिस के औसत रिस्पॉन्स टाइम को 8 मिनट से कम करना है।
रिस्पॉन्स टाइम में बड़ा सुधार
गुजरात पुलिस के आँकड़ों के अनुसार, जनरक्षक बेड़े के पहले चरण की तैनाती के बाद राज्य में पुलिस का औसत रिस्पॉन्स टाइम 27 मिनट से घटकर 10 मिनट 49 सेकंड रह गया है। यह सुधार 150 सीटों वाले इमरजेंसी कॉल सेंटर, कंप्यूटर-एडेड डिस्पैच (CAD) तकनीक और कॉलर-लोकेशन सिस्टम के संयुक्त उपयोग से संभव हुआ है।
अब अतिरिक्त वाहनों की तैनाती और उन्नत तकनीक के ज़्यादा इस्तेमाल से इस समय को 8 मिनट से नीचे लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
11 महीनों में 11 लाख से अधिक आपातकालीन अनुरोध
गुजरात पुलिस के मुताबिक, जनरक्षक परियोजना ने अपने पहले 11 महीनों में 11.04 लाख से अधिक एकीकृत आपातकालीन सेवा अनुरोधों को संभाला। इनमें 6.74 लाख से अधिक पुलिस इमरजेंसी मामले शामिल हैं, जिनमें तत्काल सहायता प्रदान की गई। यह आँकड़ा दर्शाता है कि नागरिकों ने इस सेवा पर कितना भरोसा जताया है।
एक प्लेटफ़ॉर्म पर सभी आपातकालीन सेवाएँ
112 सिस्टम एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर पुलिस, एंबुलेंस, फायर सर्विस, महिला हेल्पलाइन, चाइल्ड हेल्पलाइन, आपदा प्रतिक्रिया और ट्रैफिक सहायता को एकीकृत करता है। इसके अलावा, 112 पैनिक बटन को ओला, उबर, रैपिडो और भारत टैक्सी ऐप्स में भी जोड़ा गया है, ताकि राइड-शेयरिंग सेवाओं का उपयोग करने वाले यात्री आपात स्थिति में तुरंत मदद माँग सकें।
अधिकार क्षेत्र की बाधाओं के कारण देरी न हो, इसके लिए एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी लागू की गई है। इसके तहत घटनास्थल के सबसे नज़दीक उपलब्ध पुलिस कंट्रोल रूम वाहन को — चाहे वह किसी भी अधिकार क्षेत्र का हो — तत्काल भेजा जा सकता है।
अत्याधुनिक उपकरणों से लैस वाहन
नए जनरक्षक वाहन 24 घंटे इमरजेंसी ऑपरेशन के लिए तैयार किए गए हैं। इनमें मोबाइल डेटा टर्मिनल, GPS आधारित व्हीकल ट्रैकिंग, इमरजेंसी लाइट बार और सायरन, पब्लिक-एड्रेस सिस्टम, अग्निशामक यंत्र, फर्स्ट-एड किट और सर्च लाइट जैसी सुविधाएँ हैं। वाहनों में डैशबोर्ड कैमरे लगाए गए हैं और तैनात कर्मियों को बॉडी कैमरा, हेलमेट व अन्य सुरक्षा उपकरण भी दिए गए हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य मंत्री कमलेश पटेल ने कहा कि राज्य ने शांति, समृद्धि और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर काम किया है और गुजरात पुलिस जनता की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि 112 आपात सेवा अब और तेज़ तथा अधिक असरदार होगी, ताकि पुलिस की मदद जल्द से जल्द नागरिकों तक पहुँच सके।
गौरतलब है कि यह विस्तार 2025 में गुजरात के डायल 112 जनरक्षक इमरजेंसी रिस्पॉन्स फ्रेमवर्क की शुरुआत के बाद किया गया है। तब विशेष वाहनों और केंद्रीकृत इमरजेंसी ढाँचे के ज़रिये कई सेवाओं को एक मंच पर लाया गया था। अब इस बेड़े का दोगुना होना राज्य की नागरिक सुरक्षा अवसंरचना में एक महत्त्वपूर्ण छलाँग है।