गुजरात DGP ज्ञानेंद्र सिंह मलिक का निर्देश: '112' इमरजेंसी रिस्पॉन्स टाइम घटाएं, नागरिकों तक पहुंचे तुरंत मदद
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के पुलिस महानिदेशक (DGP) ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने 18 अगस्त 2026 को राज्य के सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आपातकालीन हेल्पलाइन '112' के लिए प्रतिक्रिया समय (रिस्पॉन्स टाइम) को अधिकतम संभव हद तक कम किया जाए, ताकि संकट में फंसे नागरिकों को बिना देर किए सहायता मिल सके। यह निर्देश गांधीनगर स्थित पुलिस भवन से आयोजित एक उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग समीक्षा बैठक में दिए गए।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
इस समीक्षा बैठक में राज्य के सभी पुलिस कमिश्नर, रेंज प्रमुख और ज़िला पुलिस अधीक्षक शामिल हुए। बैठक का केंद्र बिंदु इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम 112 के संचालन की विस्तृत समीक्षा रहा, जिसमें विशेष रूप से रिस्पॉन्स टाइम की गुणवत्ता और वाहनों की उपलब्धता पर ध्यान केंद्रित किया गया।
मुख्य निर्देश और प्राथमिकताएँ
DGP मलिक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 112 सेवा के तहत तैनात पुलिस वाहनों और ड्राइवरों की पर्याप्त संख्या हर समय सुनिश्चित की जाए। जो वाहन खराब हैं, उनकी तत्काल मरम्मत कराई जाए ताकि आपातकाल के दौरान प्रतिक्रिया में कोई बाधा न आए।
इसके अलावा, 112 कर्मचारियों की उपस्थिति की नियमित समीक्षा का भी निर्देश दिया गया। यह भी कहा गया कि कर्मचारियों की छुट्टी स्वीकृत करते समय कंट्रोल रूम के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखा जाए, जिससे सेवा की क्षमता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
112 सिस्टम कैसे काम करता है
गुजरात केंद्र सरकार के देशव्यापी एकीकृत इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम का हिस्सा है, जो एक ही नंबर के ज़रिए पुलिस, अग्निशमन, चिकित्सा और अन्य आपातकालीन सेवाओं को जोड़ता है। यह सिस्टम वॉयस कॉल, SMS, ईमेल, वेब रिक्वेस्ट और SOS/पैनिक अलर्ट के माध्यम से सूचनाएँ प्राप्त करने में सक्षम है।
आधिकारिक 112 पोर्टल के अनुसार, सिस्टम में कॉल करने वाले की लोकेशन का स्वचालित पता लगाने की सुविधा है और कंट्रोल सेंटर रियल-टाइम में वाहनों को ट्रैक कर सबसे नज़दीकी यूनिट को घटनास्थल पर भेज सकते हैं।
यह निर्देश क्यों अहम है
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में आपातकालीन सेवाओं के रिस्पॉन्स टाइम को लेकर नागरिक शिकायतें बढ़ी हैं। गौरतलब है कि 112 जैसी एकीकृत हेल्पलाइन की उपयोगिता तभी सिद्ध होती है जब ज़मीनी स्तर पर प्रतिक्रिया त्वरित हो। DGP मलिक का यह कदम राज्य पुलिस की जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित सेवा की दिशा में एक व्यावहारिक प्रयास माना जा रहा है।
आगे की राह
DGP मलिक ने सभी अधिकारियों से 112 सेवा के कामकाज की लगातार निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर समय पर सुधारात्मक कार्रवाई करने का आह्वान किया है। यह स्पष्ट है कि राज्य पुलिस नेतृत्व इस प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए संरचनात्मक बदलावों पर ध्यान दे रहा है।