गुजरात बना भारत का पहला राज्य: डायल 112 पर एकीकृत हुईं चारों आपातकालीन सेवाएं, अग्निशमन भी जुड़ा
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 23 सितंबर 2026 को अपनी अग्निशमन एवं बचाव सेवाओं को डायल 112 आपातकालीन प्लेटफॉर्म से पूरी तरह एकीकृत कर लिया, जिससे गुजरात भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहाँ चिकित्सा, पुलिस, अग्निशमन एवं बचाव और महिला एवं बाल संरक्षण — ये चारों प्रमुख आपातकालीन सेवाएं एक ही एकीकृत मंच पर उपलब्ध हैं। राज्य सरकार के अनुसार, यह कदम आपातकालीन प्रतिक्रिया को तेज़, पारदर्शी और डेटा-संचालित बनाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ है।
एकीकरण की पृष्ठभूमि
डायल 112 सेवा गुजरात में 31 अगस्त 2025 को एकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र बनाने के उद्देश्य से पूरे राज्य में शुरू की गई थी। इसके बाद पुलिस आपातकालीन प्रतिक्रिया को एक संपूर्ण डिजिटल प्रक्रिया के ज़रिये प्रणाली में जोड़ा गया। अब अग्निशमन सेवाओं के एकीकरण के साथ यह मंच पूरी तरह परिपक्व हो गया है।
गौरतलब है कि इससे पहले नागरिक आग लगने की घटनाओं की सूचना देने के लिए 101 डायल करते थे। नगर-स्तरीय नियंत्रण कक्ष कॉल संभालते थे और फिर संबंधित अग्निशमन केंद्र को मैन्युअल रूप से सूचित करते थे — एक बहुस्तरीय प्रक्रिया जो देरी और सीमित डिजिटल दृश्यता का कारण बन सकती थी।
नई प्रणाली कैसे काम करती है
नई व्यवस्था के तहत, आग लगने की स्थिति में 112 पर आई कॉल सीधे डायल 112 राज्य मुख्य नियंत्रण कक्ष में पहुँचती है। प्रणाली स्वतः घटना का विवरण और डिजिटल स्थान दर्ज करती है, निकटतम उपलब्ध अग्निशमन वाहन की पहचान करती है और मोबाइल डेटा टर्मिनल (एमडीटी) के माध्यम से संबंधित वाहन को सीधे कार्य सौंपती है।
एमडीटी अग्निशमन कर्मियों को वास्तविक समय में आपातकालीन अलर्ट प्राप्त करने, डिजिटल रूप से कार्य-आवंटन की पुष्टि करने, मानचित्र के ज़रिये घटनास्थल तक पहुँचने और कमांड एवं नियंत्रण केंद्र से डिजिटल संवाद स्थापित करने में सक्षम बनाता है। ज़रूरत पड़ने पर क्षेत्र की टीमें अतिरिक्त संसाधनों की माँग भी डिजिटल रूप से कर सकती हैं।
पहले चरण में शामिल शहर और बेड़ा
पहला चरण छह नगर निगमों — अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, जामनगर, गांधीनगर और भावनगर — में लागू किया जा रहा है। इस चरण में 237 अग्निशमन और बचाव वाहनों को जीपीएस और एमडीटी उपकरणों से लैस किया गया है। घटना समाप्त होने पर संबंधित अग्निशमन केंद्र आवश्यक विवरण दर्ज करके कॉल को डिजिटल रूप से बंद करता है, जिससे पूरी प्रतिक्रिया का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार होता है।
डेटा-संचालित संसाधन प्रबंधन
प्रणाली से उत्पन्न डेटा का उपयोग प्रतिक्रिया एवं यात्रा समय, वाहन उपयोग, घटनास्थल, आग की आवृत्ति और प्रकार, संसाधन आवश्यकताओं तथा क्षेत्रवार प्रदर्शन के विश्लेषण के लिए किया जाएगा। आवधिक विश्लेषण से उन क्षेत्रों में अतिरिक्त अग्निशमन केंद्रों, वाहनों और कर्मचारियों की तैनाती संबंधी निर्णयों में सहायता मिलने की उम्मीद है जहाँ संसाधनों की कमी के संकेत मिलते हैं।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों को एकीकृत करने की माँग बढ़ रही है। गुजरात का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है। पहले चरण की सफलता के बाद प्रणाली को शेष नगर पालिकाओं और ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तारित किए जाने की संभावना है, हालाँकि इसकी समयसीमा सरकार ने अभी घोषित नहीं की है।