23 सितंबर 2026
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गुजरात बना भारत का पहला राज्य: डायल 112 पर एकीकृत हुईं चारों आपातकालीन सेवाएं, अग्निशमन भी जुड़ा

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गुजरात बना भारत का पहला राज्य: डायल 112 पर एकीकृत हुईं चारों आपातकालीन सेवाएं, अग्निशमन भी जुड़ा

सारांश

गुजरात ने अग्निशमन सेवाओं को डायल 112 से जोड़कर इतिहास रचा — अब चिकित्सा, पुलिस, अग्निशमन और महिला-बाल संरक्षण, ये चारों सेवाएं एक मंच पर। 237 वाहन GPS-MDT से लैस, छह नगर निगमों में पहला चरण लागू। यह देश के लिए एक नया मानक हो सकता है।

मुख्य बातें

गुजरात भारत का पहला राज्य बना जिसने चिकित्सा, पुलिस, अग्निशमन एवं बचाव और महिला-बाल संरक्षण — चारों आपातकालीन सेवाओं को डायल 112 पर एकीकृत किया।
डायल 112 सेवा गुजरात में 31 अगस्त 2025 को शुरू हुई थी; अग्निशमन एकीकरण इसका नवीनतम और अंतिम चरण है।
पहला चरण अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, जामनगर, गांधीनगर और भावनगर — छह नगर निगमों में लागू।
237 अग्निशमन और बचाव वाहनों को GPS और मोबाइल डेटा टर्मिनल (MDT) से लैस किया गया।
पुरानी 101 प्रणाली की मैन्युअल, बहुस्तरीय प्रक्रिया का स्थान डिजिटल स्वचालित प्रेषण ने लिया।
प्रणाली से उत्पन्न डेटा का उपयोग संसाधन तैनाती और प्रतिक्रिया प्रदर्शन सुधारने में किया जाएगा।

गुजरात सरकार ने 23 सितंबर 2026 को अपनी अग्निशमन एवं बचाव सेवाओं को डायल 112 आपातकालीन प्लेटफॉर्म से पूरी तरह एकीकृत कर लिया, जिससे गुजरात भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहाँ चिकित्सा, पुलिस, अग्निशमन एवं बचाव और महिला एवं बाल संरक्षण — ये चारों प्रमुख आपातकालीन सेवाएं एक ही एकीकृत मंच पर उपलब्ध हैं। राज्य सरकार के अनुसार, यह कदम आपातकालीन प्रतिक्रिया को तेज़, पारदर्शी और डेटा-संचालित बनाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ है।

एकीकरण की पृष्ठभूमि

डायल 112 सेवा गुजरात में 31 अगस्त 2025 को एकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र बनाने के उद्देश्य से पूरे राज्य में शुरू की गई थी। इसके बाद पुलिस आपातकालीन प्रतिक्रिया को एक संपूर्ण डिजिटल प्रक्रिया के ज़रिये प्रणाली में जोड़ा गया। अब अग्निशमन सेवाओं के एकीकरण के साथ यह मंच पूरी तरह परिपक्व हो गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले नागरिक आग लगने की घटनाओं की सूचना देने के लिए 101 डायल करते थे। नगर-स्तरीय नियंत्रण कक्ष कॉल संभालते थे और फिर संबंधित अग्निशमन केंद्र को मैन्युअल रूप से सूचित करते थे — एक बहुस्तरीय प्रक्रिया जो देरी और सीमित डिजिटल दृश्यता का कारण बन सकती थी।

नई प्रणाली कैसे काम करती है

नई व्यवस्था के तहत, आग लगने की स्थिति में 112 पर आई कॉल सीधे डायल 112 राज्य मुख्य नियंत्रण कक्ष में पहुँचती है। प्रणाली स्वतः घटना का विवरण और डिजिटल स्थान दर्ज करती है, निकटतम उपलब्ध अग्निशमन वाहन की पहचान करती है और मोबाइल डेटा टर्मिनल (एमडीटी) के माध्यम से संबंधित वाहन को सीधे कार्य सौंपती है।

एमडीटी अग्निशमन कर्मियों को वास्तविक समय में आपातकालीन अलर्ट प्राप्त करने, डिजिटल रूप से कार्य-आवंटन की पुष्टि करने, मानचित्र के ज़रिये घटनास्थल तक पहुँचने और कमांड एवं नियंत्रण केंद्र से डिजिटल संवाद स्थापित करने में सक्षम बनाता है। ज़रूरत पड़ने पर क्षेत्र की टीमें अतिरिक्त संसाधनों की माँग भी डिजिटल रूप से कर सकती हैं।

पहले चरण में शामिल शहर और बेड़ा

पहला चरण छह नगर निगमोंअहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, जामनगर, गांधीनगर और भावनगर — में लागू किया जा रहा है। इस चरण में 237 अग्निशमन और बचाव वाहनों को जीपीएस और एमडीटी उपकरणों से लैस किया गया है। घटना समाप्त होने पर संबंधित अग्निशमन केंद्र आवश्यक विवरण दर्ज करके कॉल को डिजिटल रूप से बंद करता है, जिससे पूरी प्रतिक्रिया का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार होता है।

डेटा-संचालित संसाधन प्रबंधन

प्रणाली से उत्पन्न डेटा का उपयोग प्रतिक्रिया एवं यात्रा समय, वाहन उपयोग, घटनास्थल, आग की आवृत्ति और प्रकार, संसाधन आवश्यकताओं तथा क्षेत्रवार प्रदर्शन के विश्लेषण के लिए किया जाएगा। आवधिक विश्लेषण से उन क्षेत्रों में अतिरिक्त अग्निशमन केंद्रों, वाहनों और कर्मचारियों की तैनाती संबंधी निर्णयों में सहायता मिलने की उम्मीद है जहाँ संसाधनों की कमी के संकेत मिलते हैं।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों को एकीकृत करने की माँग बढ़ रही है। गुजरात का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है। पहले चरण की सफलता के बाद प्रणाली को शेष नगर पालिकाओं और ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तारित किए जाने की संभावना है, हालाँकि इसकी समयसीमा सरकार ने अभी घोषित नहीं की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है — विशेषकर तब जब पहला चरण केवल छह नगर निगमों तक सीमित है और राज्य के विशाल ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्र अभी इस प्रणाली से बाहर हैं। डेटा-संचालित संसाधन आवंटन का वादा तभी सार्थक होगा जब प्रतिक्रिया समय के स्वतंत्र सत्यापन की व्यवस्था हो। यह भी ध्यान देने योग्य है कि 'पहला राज्य' का दावा राज्य सरकार का अपना है — किसी स्वतंत्र संस्था ने इसकी पुष्टि नहीं की है। बावजूद इसके, यदि यह मॉडल वास्तव में प्रतिक्रिया विलंब को कम करता है, तो यह देश के अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय नीतिगत उदाहरण बन सकता है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात का डायल 112 एकीकरण क्या है?
गुजरात ने अपनी चिकित्सा, पुलिस, अग्निशमन एवं बचाव और महिला-बाल आपातकालीन सेवाओं को एक ही नंबर — डायल 112 — पर एकीकृत किया है। राज्य सरकार के अनुसार, ऐसा करने वाला गुजरात भारत का पहला राज्य है।
पहले अग्निशमन के लिए कौन सा नंबर था और अब क्या बदला?
पहले नागरिक आग लगने की घटनाओं की सूचना देने के लिए 101 डायल करते थे, जहाँ से नगर-स्तरीय नियंत्रण कक्ष मैन्युअल रूप से अग्निशमन केंद्र को सूचित करते थे। अब 112 पर कॉल सीधे राज्य मुख्य नियंत्रण कक्ष में जाती है और GPS-MDT के ज़रिये निकटतम वाहन को स्वतः कार्य सौंपा जाता है।
पहले चरण में कौन से शहर शामिल हैं?
पहला चरण अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, जामनगर, गांधीनगर और भावनगर — छह नगर निगमों में लागू किया जा रहा है। इसमें 237 अग्निशमन और बचाव वाहनों को GPS और मोबाइल डेटा टर्मिनल से लैस किया गया है।
मोबाइल डेटा टर्मिनल (MDT) क्या करता है?
MDT अग्निशमन कर्मियों को वास्तविक समय में आपातकालीन अलर्ट मिलने, डिजिटल रूप से कार्य-आवंटन की पुष्टि करने, मानचित्र के ज़रिये घटनास्थल तक पहुँचने और कमांड केंद्र से संपर्क रखने में सक्षम बनाता है। यह ध्वनि-आधारित बहुस्तरीय संचार की जगह लेता है।
इस प्रणाली से भविष्य में क्या लाभ अपेक्षित है?
प्रणाली से उत्पन्न डेटा का उपयोग प्रतिक्रिया समय, वाहन उपयोग, घटनाओं की आवृत्ति और क्षेत्रवार प्रदर्शन के विश्लेषण में किया जाएगा। इससे उन क्षेत्रों में अतिरिक्त अग्निशमन केंद्रों और वाहनों की तैनाती के निर्णय लेने में मदद मिलेगी जहाँ संसाधनों की अधिक आवश्यकता है।
राष्ट्र प्रेस
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