8 नवंबर 2026
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रूस की कड़ी चेतावनी: यूक्रेन में तैनात विदेशी सैनिक होंगे 'वैध सैन्य लक्ष्य', 'कोआलिजा 26.2' अभ्यास पर भड़का मॉस्को

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रूस की कड़ी चेतावनी: यूक्रेन में तैनात विदेशी सैनिक होंगे 'वैध सैन्य लक्ष्य', 'कोआलिजा 26.2' अभ्यास पर भड़का मॉस्को

सारांश

रूस ने खुलकर कहा — यूक्रेन में कदम रखने वाला हर विदेशी सैनिक निशाने पर होगा। 'कोआलिजा 26.2' अभ्यास और अबू धाबी शांति वार्ता एक ही हफ्ते में टकरा रहे हैं, जिससे यूरोपीय तैनाती और कूटनीति के बीच का तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है।

मुख्य बातें

रूसी विदेश मंत्रालय प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने 8 नवंबर 2026 को कहा कि यूक्रेन में तैनात विदेशी सैनिक वैध सैन्य लक्ष्य माने जाएंगे।
बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास 'कोआलिजा 26.2' 9 से 22 नवंबर 2026 तक यूक्रेन में प्रस्तावित है।
जखारोवा ने ब्रिटेन और फ्रांस पर यूक्रेन के माध्यम से रूस को सैन्य रूप से पराजित करने की कोशिश का आरोप लगाया।
बहुराष्ट्रीय बलों की घोषणा 24 अगस्त 2026 को कीव में हुई 'इच्छुक देशों के गठबंधन' बैठक के बाद की गई थी।
अमेरिकी, रूसी और यूक्रेनी वार्ताकार 10-11 नवंबर को अबू धाबी में मिलेंगे; वार्ता सितंबर 2026 में फिर शुरू हुई थी।

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने 8 नवंबर 2026 को स्पष्ट किया कि रूस यूक्रेन की धरती पर तैनात किसी भी विदेशी सैन्य टुकड़ी को वैध सैन्य लक्ष्य मानेगा। उन्होंने आगाह किया कि इस तरह की उपस्थिति संघर्ष को और गंभीर रूप से भड़का सकती है।

मुख्य घटनाक्रम

जखारोवा की यह तीखी प्रतिक्रिया यूक्रेन में प्रस्तावित बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास 'कोआलिजा 26.2' के संदर्भ में आई, जो 9 से 22 नवंबर 2026 तक आयोजित होने की योजना है। उन्होंने पश्चिमी देशों पर रूस की सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज करने और क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का प्रत्यक्ष आरोप लगाया।

जखारोवा ने कहा, 'हम एक बार फिर दोहराते हैं कि यूक्रेन में विदेशी सैन्य टुकड़ियों की तैनाती सरासर अस्वीकार्य है — चाहे वह तथाकथित 'इच्छुक देशों के गठबंधन' के तत्वावधान में हो या किसी अन्य समूह के।' उनके अनुसार, इस तरह की तैनाती रूस के लिए अतिरिक्त सुरक्षा खतरे उत्पन्न करेगी।

ब्रिटेन और फ्रांस पर सीधा निशाना

रूसी प्रवक्ता ने विशेष रूप से ब्रिटेन और फ्रांस का उल्लेख करते हुए कहा कि ये दोनों देश बहुराष्ट्रीय बलों की आड़ में यूक्रेन में अपनी पकड़ बनाए रखने और रूस को सैन्य रूप से परास्त करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह नियोजित अभ्यास यूरोपीय नाटो सदस्यों की संघर्ष में भागीदारी को और गहरा करेगा।

गौरतलब है कि बहुराष्ट्रीय बलों के गठन की घोषणा 24 अगस्त को कीव में आयोजित 'इच्छुक देशों के गठबंधन' की बैठक के बाद की गई थी। यह ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन युद्ध में राजनयिक गतिविधियाँ भी तेज हो रही हैं।

अबू धाबी में शांति वार्ता की तैयारी

इसी बीच, अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने पुष्टि की है कि अमेरिकी, रूसी और यूक्रेनी वार्ताकार 10 और 11 नवंबर 2026 को अबू धाबी में बैठक करेंगे। जखारोवा ने इस तथ्य को रेखांकित करते हुए तर्क दिया कि अभ्यास का समय परामर्श की पूर्व संध्या पर रखा जाना यह दर्शाता है कि यूरोपीय देशों को बातचीत की मेज पर कोई जगह नहीं मिलनी चाहिए।

यह शांति वार्ता एक लंबे अवरोध के बाद फिर से शुरू हुई है। फरवरी में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद यह वार्ता थम गई थी, लेकिन सितंबर 2026 में इसे दोबारा शुरू किया गया। विटकॉफ और उनके सहयोगी दूत जेरेड कुशनर ने कीव जाने से पहले मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी।

रूस का सैन्य रुख

जखारोवा ने दृढ़ता से कहा कि मॉस्को अपने 'विशेष सैन्य अभियान' के तय उद्देश्यों को प्राप्त करने के रास्ते से नहीं हटेगा। यह बयान ऐसे संदर्भ में आया है जब यूरोपीय देश यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी देने के लिए संभावित सैन्य उपस्थिति पर विचार कर रहे हैं — एक ऐसा कदम जिसे रूस लंबे समय से 'लाल रेखा' बताता आया है।

क्या होगा आगे

अबू धाबी वार्ता और 'कोआलिजा 26.2' अभ्यास एक साथ शुरू होने से दोनों पक्षों पर कूटनीतिक और सैन्य दबाव एकसाथ बढ़ेगा। विश्लेषकों के अनुसार, यूरोपीय देशों की तैनाती और रूस की इस प्रतिक्रिया से यूक्रेन युद्ध में नाटो देशों की प्रत्यक्ष संलिप्तता का सवाल फिर से केंद्र में आ गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समय महत्वपूर्ण है। अबू धाबी वार्ता के ठीक दो दिन पहले यह चेतावनी देना यूरोपीय देशों को कूटनीतिक दबाव में रखने की रणनीति का हिस्सा लगती है। विरोधाभास यह है कि जो देश शांति वार्ता का समर्थन करते हैं, उन्हें ही रूस बातचीत से बाहर रखना चाहता है। असली सवाल यह है कि क्या अबू धाबी की मेज पर कोई ठोस ढाँचा निकल पाएगा, या यह भी उन परामर्शों की लंबी सूची में जुड़ जाएगा जो युद्धक्षेत्र की वास्तविकता नहीं बदल पाए।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रूस ने यूक्रेन में विदेशी सैनिकों को 'वैध लक्ष्य' क्यों बताया?
रूसी प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने 8 नवंबर 2026 को 'कोआलिजा 26.2' बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास की घोषणा के जवाब में यह चेतावनी दी। रूस का मानना है कि किसी भी विदेशी सैन्य तैनाती — चाहे किसी भी ढाँचे के तहत हो — उसकी सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।
'कोआलिजा 26.2' सैन्य अभ्यास क्या है?
'कोआलिजा 26.2' यूक्रेन में 9 से 22 नवंबर 2026 के बीच प्रस्तावित एक बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास है। इसकी घोषणा 24 अगस्त 2026 को कीव में 'इच्छुक देशों के गठबंधन' की बैठक के बाद की गई थी।
अबू धाबी में यूक्रेन शांति वार्ता कब और क्यों हो रही है?
अमेरिकी, रूसी और यूक्रेनी वार्ताकार 10 और 11 नवंबर 2026 को अबू धाबी में मिलने वाले हैं। यह वार्ता फरवरी में अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले के बाद रुकी थी और सितंबर 2026 में फिर शुरू हुई।
ब्रिटेन और फ्रांस पर रूस का क्या आरोप है?
जखारोवा ने ब्रिटेन और फ्रांस पर आरोप लगाया कि वे बहुराष्ट्रीय बलों की आड़ में यूक्रेन में उपस्थिति बनाए रखना चाहते हैं ताकि रूस को सैन्य रूप से पराजित किया जा सके। रूस इसे अपनी सुरक्षा के लिए अस्वीकार्य बताता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में यूरोपीय देशों की भूमिका पर रूस का क्या रुख है?
रूस का कहना है कि यूरोपीय नाटो देशों की बढ़ती भागीदारी संघर्ष को और बढ़ाएगी। जखारोवा ने यह भी तर्क दिया कि अभ्यास का समय अबू धाबी वार्ता से ठीक पहले रखा जाना दिखाता है कि यूरोपीय देशों को बातचीत की प्रक्रिया से बाहर रखा जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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