23 जुलाई 2026
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यूक्रेन-रूस शांति वार्ता: ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने लंदन में सीधे संवाद का समर्थन किया

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यूक्रेन-रूस शांति वार्ता: ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने लंदन में सीधे संवाद का समर्थन किया

सारांश

लंदन में यूरोप की तीन बड़ी शक्तियों ने एकजुट होकर यूक्रेन-रूस सीधी वार्ता का समर्थन किया — और यह संकेत दिया कि अमेरिका की अनुपस्थिति में भी शांति प्रक्रिया रुकेगी नहीं। ज़ेलेंस्की के खुले पत्र और क्रेमलिन की 'मॉस्को आएँ' वाली प्रतिक्रिया के बीच, असली सवाल यह है कि बातचीत की मेज़ बनेगी कहाँ।

मुख्य बातें

ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने 8 जून 2026 को लंदन में राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के साथ बैठक के बाद यूक्रेन-रूस सीधी वार्ता का समर्थन किया।
चारों नेताओं ने संयुक्त बयान में तत्काल और पूर्ण युद्धविराम की माँग की; बातचीत का आधार मौजूदा फ्रंट लाइन को बनाने का सुझाव दिया।
क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि ज़ेलेंस्की चाहें तो मॉस्को आकर पुतिन से मिल सकते हैं।
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने खुले पत्र में पुतिन को आमने-सामने बैठक का प्रस्ताव दिया और वार्ता के दौरान पूर्ण युद्धविराम की तैयारी जताई।
स्विट्जरलैंड, तुर्की और कुछ अरब देशों ने वार्ता की मेजबानी की इच्छा जताई है।
बयान में स्पष्ट किया गया कि EU और NATO से जुड़े किसी भी फैसले के लिए सदस्य देशों की सहमति अनिवार्य होगी।

ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के शीर्ष नेताओं ने 8 जून 2026 को लंदन में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की के साथ बैठक के बाद यूक्रेन और रूस के बीच सीधी वार्ता का समर्थन किया और तत्काल युद्धविराम की माँग की। तीनों यूरोपीय शक्तियों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि शांति प्रक्रिया में अमेरिका और यूरोप दोनों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।

लंदन बैठक और संयुक्त बयान

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने बैठक के उपरांत एक साझा बयान जारी किया। इसमें स्पष्ट किया गया कि वे यूक्रेन और रूस के बीच प्रत्यक्ष संवाद के पक्षधर हैं और चाहते हैं कि बातचीत की शुरुआत मौजूदा युद्ध रेखा (फ्रंट लाइन) को आधार मानकर हो।

बयान में यह भी रेखांकित किया गया कि शांति प्रक्रिया में यूरोप की केंद्रीय भूमिका होनी चाहिए और सभी प्रयास यूक्रेन, यूरोपीय साझेदार देशों तथा अमेरिका के साथ समन्वय में किए जाने चाहिए।

युद्धविराम और सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा

चारों नेताओं ने तत्काल और पूर्ण युद्धविराम लागू करने की माँग की। बयान में यह भी कहा गया कि युद्धविराम के बाद यूक्रेन की दीर्घकालिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। किसी भी समझौते में यूरोप के सुरक्षा हितों का संरक्षण अनिवार्य होगा, और यूरोपीय संघ (EU) तथा नाटो (NATO) से जुड़े फैसलों के लिए सदस्य देशों की सहमति ज़रूरी बताई गई।

क्रेमलिन की प्रतिक्रिया

इससे पहले गुरुवार को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा था कि यदि राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत करना चाहते हैं, तो वे कभी भी मॉस्को आ सकते हैं। यह बयान ज़ेलेंस्की के उस खुले पत्र के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने पुतिन को आमने-सामने मुलाकात का प्रस्ताव दिया था।

गौरतलब है कि यह कूटनीतिक हलचल ऐसे समय में आई है जब अमेरिका का ध्यान ईरान के साथ जारी संघर्ष पर केंद्रित बताया जा रहा है।

ज़ेलेंस्की का प्रस्ताव और मध्यस्थता की पेशकश

अपने खुले पत्र में ज़ेलेंस्की ने लिखा, 'यूक्रेन इस युद्ध को हमारे और आपके बीच सीधे संवाद के ज़रिए खत्म करने का प्रस्ताव रखता है। मैं आपसे मुलाकात का प्रस्ताव देता हूँ।' उन्होंने बैठक की एक स्पष्ट तारीख तय करने की अपील की और कहा कि वार्ता के दौरान यूक्रेन पूर्ण युद्धविराम के लिए तैयार है।

ज़ेलेंस्की ने यह भी बताया कि स्विट्जरलैंड, तुर्की और कुछ अरब देशों ने इस वार्ता की मेजबानी करने की इच्छा जताई है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब यूरोपीय देश स्वयं शांति प्रक्रिया की बागडोर संभालने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

आगे की राह

यूरोपीय तिकड़ी के इस साझा रुख से संकेत मिलता है कि पश्चिमी गठबंधन यूक्रेन संघर्ष के कूटनीतिक समाधान के लिए एकजुट दबाव बना रहा है। अब निगाहें इस पर हैं कि रूस इस प्रत्यक्ष वार्ता प्रस्ताव पर किस हद तक सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है और क्या कोई तटस्थ मंच पर बैठक संभव हो पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें वह ठोस तंत्र अनुपस्थित है जो वार्ता को वास्तव में संभव बनाए — न कोई तटस्थ मध्यस्थ तय हुआ, न समयसीमा। क्रेमलिन का 'मॉस्को आएँ' वाला निमंत्रण एक कूटनीतिक पैंतरा अधिक लगता है, क्योंकि यह यूक्रेन की संप्रभुता की स्थिति को अनदेखा करता है। अमेरिका के ईरान संकट में उलझे होने के बीच यूरोप का यह आगे आना सामरिक स्वायत्तता की दिशा में संकेत देता है, पर बिना अमेरिकी समर्थन के किसी भी समझौते की गारंटी देना यूरोप के लिए कठिन होगा।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लंदन में यूक्रेन को लेकर किस बात पर सहमति बनी?
ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के नेताओं ने 8 जून 2026 को लंदन में ज़ेलेंस्की के साथ बैठक के बाद यूक्रेन-रूस सीधी वार्ता का समर्थन किया और तत्काल युद्धविराम की माँग की। संयुक्त बयान में कहा गया कि बातचीत मौजूदा फ्रंट लाइन को आधार मानकर शुरू हो और इसमें अमेरिका व यूरोप दोनों शामिल रहें।
ज़ेलेंस्की ने पुतिन को क्या प्रस्ताव दिया है?
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने एक खुले पत्र में पुतिन को आमने-सामने मुलाकात का प्रस्ताव दिया और कहा कि वार्ता के दौरान यूक्रेन पूर्ण युद्धविराम के लिए तैयार है। उन्होंने बैठक की स्पष्ट तारीख तय करने की अपील की और स्विट्जरलैंड, तुर्की तथा कुछ अरब देशों की मेजबानी की इच्छा का भी उल्लेख किया।
रूस ने इस वार्ता प्रस्ताव पर क्या कहा?
क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि यदि ज़ेलेंस्की पुतिन से बात करना चाहते हैं तो वे कभी भी मॉस्को आ सकते हैं। यह बयान ज़ेलेंस्की के खुले पत्र के जवाब में आया, लेकिन इसमें किसी तटस्थ स्थान पर बैठक की संभावना पर कोई स्पष्ट स्थिति नहीं ली गई।
इस शांति प्रक्रिया में यूरोप की क्या भूमिका होगी?
संयुक्त बयान के अनुसार, शांति प्रक्रिया में यूरोप की केंद्रीय भूमिका होनी चाहिए और EU तथा NATO से जुड़े किसी भी फैसले के लिए सदस्य देशों की सहमति अनिवार्य होगी। यूरोपीय देश अमेरिका के साथ मिलकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
क्या अमेरिका इस वार्ता प्रक्रिया में शामिल होगा?
संयुक्त बयान में अमेरिका को भी शांति प्रक्रिया में सक्रिय रखने की बात कही गई है। हालाँकि ज़ेलेंस्की ने स्वयं कहा कि केवल अमेरिका के ध्यान देने का इंतज़ार करना सही नहीं होगा, क्योंकि फिलहाल उसका ध्यान ईरान के साथ जारी संघर्ष पर केंद्रित बताया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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