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अलास्का में बनी थी यूक्रेन शांति पर सहमति, अमेरिका के जवाब का इंतजार: लावरोव

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अलास्का में बनी थी यूक्रेन शांति पर सहमति, अमेरिका के जवाब का इंतजार: लावरोव

सारांश

रूसी विदेश मंत्री लावरोव का दावा है कि अलास्का में यूक्रेन शांति पर सहमति बन चुकी थी और पुतिन ने अमेरिकी प्रस्ताव स्वीकार किए थे — लेकिन हफ्तों बाद भी वाशिंगटन की ओर से कोई जवाब नहीं आया। इस गतिरोध के बीच अमेरिका ने नए प्रतिबंध भी लगाए।

मुख्य बातें

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 24 जून 2026 को कहा कि एंकरेज, अलास्का में हुई शिखर बैठक में यूक्रेन शांति पर सहमति बनी थी।
राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिकी प्रस्ताव स्वीकार किए थे, लेकिन अमेरिका ने अभी तक कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया।
लावरोव ने स्पष्ट किया कि रूस ने एंकरेज में कोई रियायत नहीं दी — केवल युद्ध समाप्त करने की रूपरेखा पर सहमति जताई।
बैठक के बाद अमेरिका ने रूस पर पुराने प्रतिबंध बनाए रखे और नए प्रतिबंध भी लगाए।
लावरोव ने दोहराया कि रूस के मूल लक्ष्य — रूस और रूसी नागरिकों की सुरक्षा — अपरिवर्तित हैं।

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 24 जून 2026 को स्पष्ट किया कि अलास्का के एंकरेज में हुई रूस-अमेरिका शिखर बैठक में यूक्रेन शांति को लेकर एक सहमति बन चुकी थी, लेकिन अमेरिका ने अभी तक उन प्रस्तावों का कोई जवाब नहीं दिया जिन्हें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्वीकार किया था। प्रिमाकोव रीडिंग्स इंटरनेशनल साइंटिफिक एवं एक्सपर्ट फोरम में बोलते हुए लावरोव ने कहा कि एंकरेज में अमेरिका ने रूस को 'बहुत स्पष्ट प्रस्ताव' दिए थे, जिन पर रूस की सहमति के बावजूद वाशिंगटन की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है।

एंकरेज में क्या हुआ था

एंकरेज शिखर बैठक में राष्ट्रपति पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन में जारी युद्ध पर विस्तृत चर्चा की थी। लावरोव के अनुसार, उस बैठक में केवल युद्धविराम की बात नहीं थी, बल्कि दीर्घकालिक शांति की दिशा में आगे बढ़ने की एक रूपरेखा पर सहमति बनी थी। उन्होंने कहा, 'हमें लगा था कि वहाँ एक सहमति बन गई है। लेकिन एक हफ्ता बीता, फिर दो हफ्ते — अमेरिकी राष्ट्रपति यूरोपीय नेताओं से सलाह लेने वाशिंगटन चले गए और यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से भी किसी तरह चर्चा हुई — लेकिन आखिर में अभी तक हमें उस अमेरिकी प्रस्ताव का जवाब नहीं मिला, जिसका हमने समर्थन किया था।'

रूस का पक्ष: कोई रियायत नहीं दी गई

लावरोव ने स्पष्ट किया कि एंकरेज में रूस ने कोई रियायत नहीं दी थी। उनके अनुसार, रूस ने केवल इस बात पर सहमति जताई थी कि लड़ाई को किस तरह समाप्त किया जाए और शेष मुद्दों को बातचीत की मेज पर कैसे सुलझाया जाए। उन्होंने कहा, 'हमें भरोसा था कि इससे उन लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी, जिन्हें राष्ट्रपति ने तय किया है, और यह काम धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन के मुद्दे को प्राथमिकता देने पर अमेरिका ने ही ज़ोर दिया था।

अमेरिकी प्रतिबंधों पर आपत्ति

लावरोव ने बताया कि एंकरेज बैठक के बाद अमेरिका ने रूस पर पहले से लगे प्रतिबंधों को न केवल बरकरार रखा, बल्कि नए प्रतिबंध भी लगाए। आलोचकों का कहना है कि यह कदम किसी भी शांति प्रक्रिया की भावना के विपरीत है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक चैनल सक्रिय बताए जा रहे थे।

रूस के मूल लक्ष्य अपरिवर्तित

लावरोव ने दोहराया कि रूस के लक्ष्य राष्ट्रपति पुतिन द्वारा स्पष्ट रूप से परिभाषित हैं और वे नहीं बदले हैं। उन्होंने कहा, 'हमारे लिए सबसे जरूरी चीज असली मुद्दा है — और असली मुद्दा रूस की सुरक्षा और उन रूसी लोगों की सुरक्षा से जुड़ा है, जिनके बारे में कीव सरकार ने कहा है कि वे आतंकवादी हैं और उनके अधिकार छीन लिए गए हैं।' गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में भी लावरोव ने कहा था कि युद्ध खत्म होने की भविष्यवाणियों के बावजूद रूस अपने उद्देश्यों से पीछे नहीं हटेगा।

आगे क्या होगा

कूटनीतिक गतिरोध के बीच शांति वार्ता की अगली दिशा अनिश्चित बनी हुई है। लावरोव के बयान से स्पष्ट है कि रूस अमेरिका की औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। यदि वाशिंगटन जल्द कोई ठोस संकेत नहीं देता, तो एंकरेज में बनी सहमति की नींव कमज़ोर पड़ने का जोखिम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन साथ ही अमेरिका पर गेंद डाल दी है। सवाल यह है कि क्या यह वास्तविक कूटनीतिक गतिरोध है या रूस की ओर से दबाव बनाने की रणनीति। यह ऐसे समय में आया है जब यूरोपीय देश और यूक्रेन दोनों ही किसी भी समझौते की शर्तों को लेकर सतर्क हैं। अमेरिका का मौन — और साथ में नए प्रतिबंध — यह संकेत देते हैं कि वाशिंगटन के भीतर भी इस मसले पर एकमत नहीं है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अलास्का में यूक्रेन शांति पर क्या सहमति बनी थी?
एंकरेज शिखर बैठक में राष्ट्रपति पुतिन और ट्रंप के बीच यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की रूपरेखा पर चर्चा हुई थी। लावरोव के अनुसार, रूस ने अमेरिकी प्रस्ताव स्वीकार किए थे और दीर्घकालिक शांति की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति बनी थी — यह केवल अस्थायी युद्धविराम नहीं था।
अमेरिका ने अभी तक जवाब क्यों नहीं दिया?
लावरोव के बयान के अनुसार, बैठक के बाद राष्ट्रपति ट्रंप यूरोपीय नेताओं से सलाह लेने वाशिंगटन लौट गए और यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से भी चर्चा हुई। इसके बावजूद रूस को अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। अमेरिका की ओर से इस पर कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।
क्या रूस ने एंकरेज में कोई रियायत दी थी?
लावरोव ने स्पष्ट रूप से कहा कि रूस ने कोई रियायत नहीं दी थी। रूस ने केवल इस बात पर सहमति जताई थी कि युद्ध कैसे समाप्त किया जाए और बाकी मुद्दों को बातचीत की मेज पर कैसे सुलझाया जाए।
एंकरेज बैठक के बाद अमेरिका ने क्या कदम उठाए?
लावरोव के अनुसार, बैठक के बाद अमेरिका ने रूस पर पहले से लगे प्रतिबंधों को बनाए रखा और नए प्रतिबंध भी लगाए। रूस इसे एंकरेज में बनी सहमति की भावना के विपरीत मानता है।
रूस के यूक्रेन में मूल लक्ष्य क्या हैं?
लावरोव ने कहा कि रूस के लक्ष्य राष्ट्रपति पुतिन द्वारा स्पष्ट रूप से परिभाषित हैं — रूस की सुरक्षा और उन रूसी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा जिन्हें कीव सरकार ने आतंकवादी करार दिया है। दिसंबर 2025 में भी लावरोव ने कहा था कि रूस इन लक्ष्यों से पीछे नहीं हटेगा।
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