27 जून 2026
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अलास्का वार्ता पर रूस-अमेरिका में टकराव: लावरोव ने रुबियो के 'कोई समझौता नहीं' वाले बयान को चुनौती दी

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अलास्का वार्ता पर रूस-अमेरिका में टकराव: लावरोव ने रुबियो के 'कोई समझौता नहीं' वाले बयान को चुनौती दी

सारांश

अलास्का की एंकरेज वार्ता को लेकर रूस और अमेरिका के बयान एक-दूसरे से सीधे टकरा रहे हैं। लावरोव का कहना है कि रूस ने अमेरिकी प्रस्ताव स्वीकार किए, पर जवाब नहीं आया। रुबियो कहते हैं — 'कोई समझौता हुआ ही नहीं।' यह खाई यूक्रेन शांति प्रक्रिया के भविष्य पर गहरा सवाल खड़ा करती है।

मुख्य बातें

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 26 जून 2026 को कहा कि अलास्का एंकरेज वार्ता में अमेरिकी प्रस्तावों को रूस ने स्वीकार किया था, पर अमेरिका की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं आया।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बहरीन में कहा — 'अलास्का में कोई समझौता नहीं हुआ, सिर्फ प्रस्ताव रखे गए थे।' लावरोव के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के वाशिंगटन लौटने के बाद यूरोपीय देशों और ज़ेलेंस्की से परामर्श हुआ, लेकिन रूस को कोई उत्तर नहीं मिला।
लावरोव ने 'प्रिमाकोव रीडिंग्स' सम्मेलन में कहा कि एंकरेज में बनी सहमति पहले से ही एक समझौतावादी बीच का रास्ता थी।
दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी बयानों ने यूक्रेन युद्धविराम की संभावनाओं को अनिश्चित बना दिया है।

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 26 जून 2026 को कहा कि अलास्का के एंकरेज में हुई शिखर वार्ता के परिणामों को लेकर अमेरिका की स्थिति स्पष्ट नहीं है, और यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने में वाशिंगटन की वास्तविक भूमिका पर सवाल उठाए। यह बयान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस दावे के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि एंकरेज बैठक में कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ था।

दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावे

अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने बहरीन दौरे के दौरान पत्रकारों से कहा, 'अलास्का में कोई समझौता नहीं हुआ था। वहाँ सिर्फ एक प्रस्ताव रखा गया था। अगर समझौता हो गया होता, तो अब तक युद्ध खत्म हो चुका होता।' इसके विपरीत, लावरोव ने कहा कि अलास्का में अमेरिका की ओर से जो प्रस्ताव रखे गए थे, उन्हें रूस ने स्वीकार कर लिया था।

लावरोव ने कहा, 'जब मेरे सहयोगी मार्को रुबियो कहते हैं कि अलास्का में सिर्फ प्रस्ताव थे, कोई समझौता नहीं हुआ था, तो मेरे मन में सवाल उठता है कि आखिर हम 'समझौता' किसे कह रहे हैं? अगर एक पक्ष, यानी अमेरिका, समाधान के लिए अपने प्रस्ताव सामने रखता है और दूसरा पक्ष, यानी रूस, उन प्रस्तावों को स्वीकार कर लेता है, तो फिर यह कहना कि कोई समझौता नहीं हुआ, ठीक नहीं लगता।'

रूस का पक्ष: अमेरिकी जवाब का इंतज़ार

'प्रिमाकोव रीडिंग्स' अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक और विशेषज्ञ सम्मेलन में बोलते हुए लावरोव ने कहा कि रूस-अमेरिका शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिका ने 'बहुत ही स्पष्ट प्रस्ताव' दिए थे, जिन्हें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्वीकार कर लिया था।

लावरोव ने कहा, 'हमें लगा था कि वहाँ हमारी सहमति बन गई है। लेकिन फिर एक हफ्ता बीत गया, फिर दो हफ्ते। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वॉशिंगटन लौटे और यूरोपीय देशों से सलाह-मशविरा किया। किसी तरह यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की से भी बात की गई। लेकिन आज तक हमें उस अमेरिकी प्रस्ताव पर कोई जवाब नहीं मिला, जिसका हमने समर्थन किया था।'

समझौते की परिभाषा पर विवाद

रूसी विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अलास्का में जो सहमति बनी थी, वह पहले से ही एक समझौतावादी 'बीच का रास्ता' था। यह ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन में युद्धविराम की संभावनाएँ अधर में लटकी हुई हैं और दोनों महाशक्तियों के बीच कूटनीतिक संवाद की दिशा अस्पष्ट बनी हुई है।

गौरतलब है कि एंकरेज वार्ता को शुरू में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा गया था, लेकिन अब दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी बयान इस उम्मीद पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।

आगे की राह

लावरोव के बयान से यह स्पष्ट है कि मॉस्को वाशिंगटन से लिखित या औपचारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, जब तक दोनों पक्ष 'समझौते' की एक साझा परिभाषा पर सहमत नहीं होते, यूक्रेन में शांति प्रक्रिया की कोई भी ठोस प्रगति संभव नहीं दिखती।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वाशिंगटन ने कभी औपचारिक रूप से पुष्टि नहीं की — यह कूटनीतिक प्रक्रिया की गंभीर खामी उजागर करता है। ट्रंप प्रशासन का यूरोपीय सहयोगियों और ज़ेलेंस्की से परामर्श करना संकेत देता है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबाव ने वाशिंगटन की स्थिति बदल दी। मुख्यधारा की कवरेज जो अनदेखा कर रही है, वह यह है कि यह विवाद शांति वार्ता की विफलता नहीं, बल्कि उस प्रक्रिया की अनुपस्थिति को उजागर करता है जो किसी भी समझौते को बाध्यकारी बना सके।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अलास्का एंकरेज वार्ता में क्या हुआ था?
अलास्का के एंकरेज में रूस और अमेरिका के बीच यूक्रेन संघर्ष के समाधान पर एक शिखर-स्तरीय बैठक हुई थी। रूसी विदेश मंत्री लावरोव के अनुसार, अमेरिका ने 'बहुत स्पष्ट प्रस्ताव' रखे जिन्हें राष्ट्रपति पुतिन ने स्वीकार किया, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो का कहना है कि वहाँ केवल प्रस्ताव थे, कोई अंतिम समझौता नहीं।
लावरोव और रुबियो के बयानों में क्या अंतर है?
लावरोव का दावा है कि रूस ने अमेरिकी प्रस्ताव स्वीकार कर लिए थे, इसलिए यह व्यावहारिक रूप से एक समझौता था। रुबियो ने स्पष्ट रूप से कहा कि 'अलास्का में कोई समझौता नहीं हुआ' और यदि होता तो युद्ध अब तक समाप्त हो चुका होता। दोनों बयान एक-दूसरे के सीधे विरोधाभासी हैं।
रूस को अमेरिका से अभी तक जवाब क्यों नहीं मिला?
लावरोव के अनुसार, ट्रंप के वाशिंगटन लौटने के बाद अमेरिका ने यूरोपीय देशों और यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से परामर्श किया, जिसके बाद रूस को कोई औपचारिक उत्तर नहीं दिया गया। रूस इसे अमेरिकी प्रतिबद्धता की अनिश्चितता के रूप में देख रहा है।
इस विवाद का यूक्रेन शांति प्रक्रिया पर क्या असर होगा?
दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी बयान यूक्रेन में युद्धविराम की संभावनाओं को और अनिश्चित बना देते हैं। जब तक रूस और अमेरिका 'समझौते' की एक साझा परिभाषा और औपचारिक प्रक्रिया पर सहमत नहीं होते, शांति वार्ता में ठोस प्रगति मुश्किल दिखती है।
'प्रिमाकोव रीडिंग्स' सम्मेलन क्या है जहाँ लावरोव ने यह बयान दिया?
'प्रिमाकोव रीडिंग्स' एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक और विशेषज्ञ सम्मेलन है जो मॉस्को में आयोजित होता है। इस मंच पर रूसी विदेश नीति के शीर्ष अधिकारी अपने आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हैं, जिससे लावरोव के बयान को रूस का आधिकारिक कूटनीतिक संदेश माना जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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