अलास्का वार्ता पर रूस-अमेरिका में टकराव: लावरोव ने रुबियो के 'कोई समझौता नहीं' वाले बयान को चुनौती दी
सारांश
मुख्य बातें
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 26 जून 2026 को कहा कि अलास्का के एंकरेज में हुई शिखर वार्ता के परिणामों को लेकर अमेरिका की स्थिति स्पष्ट नहीं है, और यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने में वाशिंगटन की वास्तविक भूमिका पर सवाल उठाए। यह बयान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस दावे के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि एंकरेज बैठक में कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ था।
दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावे
अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने बहरीन दौरे के दौरान पत्रकारों से कहा, 'अलास्का में कोई समझौता नहीं हुआ था। वहाँ सिर्फ एक प्रस्ताव रखा गया था। अगर समझौता हो गया होता, तो अब तक युद्ध खत्म हो चुका होता।' इसके विपरीत, लावरोव ने कहा कि अलास्का में अमेरिका की ओर से जो प्रस्ताव रखे गए थे, उन्हें रूस ने स्वीकार कर लिया था।
लावरोव ने कहा, 'जब मेरे सहयोगी मार्को रुबियो कहते हैं कि अलास्का में सिर्फ प्रस्ताव थे, कोई समझौता नहीं हुआ था, तो मेरे मन में सवाल उठता है कि आखिर हम 'समझौता' किसे कह रहे हैं? अगर एक पक्ष, यानी अमेरिका, समाधान के लिए अपने प्रस्ताव सामने रखता है और दूसरा पक्ष, यानी रूस, उन प्रस्तावों को स्वीकार कर लेता है, तो फिर यह कहना कि कोई समझौता नहीं हुआ, ठीक नहीं लगता।'
रूस का पक्ष: अमेरिकी जवाब का इंतज़ार
'प्रिमाकोव रीडिंग्स' अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक और विशेषज्ञ सम्मेलन में बोलते हुए लावरोव ने कहा कि रूस-अमेरिका शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिका ने 'बहुत ही स्पष्ट प्रस्ताव' दिए थे, जिन्हें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्वीकार कर लिया था।
लावरोव ने कहा, 'हमें लगा था कि वहाँ हमारी सहमति बन गई है। लेकिन फिर एक हफ्ता बीत गया, फिर दो हफ्ते। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वॉशिंगटन लौटे और यूरोपीय देशों से सलाह-मशविरा किया। किसी तरह यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की से भी बात की गई। लेकिन आज तक हमें उस अमेरिकी प्रस्ताव पर कोई जवाब नहीं मिला, जिसका हमने समर्थन किया था।'
समझौते की परिभाषा पर विवाद
रूसी विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अलास्का में जो सहमति बनी थी, वह पहले से ही एक समझौतावादी 'बीच का रास्ता' था। यह ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन में युद्धविराम की संभावनाएँ अधर में लटकी हुई हैं और दोनों महाशक्तियों के बीच कूटनीतिक संवाद की दिशा अस्पष्ट बनी हुई है।
गौरतलब है कि एंकरेज वार्ता को शुरू में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा गया था, लेकिन अब दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी बयान इस उम्मीद पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।
आगे की राह
लावरोव के बयान से यह स्पष्ट है कि मॉस्को वाशिंगटन से लिखित या औपचारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, जब तक दोनों पक्ष 'समझौते' की एक साझा परिभाषा पर सहमत नहीं होते, यूक्रेन में शांति प्रक्रिया की कोई भी ठोस प्रगति संभव नहीं दिखती।