23 जुलाई 2026
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मनीला में लावरोव-रूबियो मुलाकात: यूक्रेन पर 'एंकोरेज फॉर्मूले' को लेकर रूस ने जताई प्रतिबद्धता

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मनीला में लावरोव-रूबियो मुलाकात: यूक्रेन पर 'एंकोरेज फॉर्मूले' को लेकर रूस ने जताई प्रतिबद्धता

सारांश

मनीला में आसियान के मंच पर लावरोव और रूबियो आमने-सामने आए — रूस ने एंकोरेज प्रस्तावों को 'स्वीकृत समझौता' बताया, अमेरिका ने 'केवल चर्चा' कहा। यह शब्दों की नहीं, शांति प्रक्रिया की दिशा की लड़ाई है।

मुख्य बातें

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मनीला में आसियान मंत्रिस्तरीय बैठकों के दौरान मुलाकात की।
रूस ने 'एंकोरेज फॉर्मूले' के प्रति प्रतिबद्धता जताई और यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति रोकने पर बल दिया।
अगस्त 2025 में ट्रंप और पुतिन की एंकोरेज बैठक की व्याख्या को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद बरकरार — रूस इसे 'समझौता', अमेरिका इसे 'केवल चर्चा' मानता है।
लावरोव ने कहा कि स्टीव विटकॉफ ने एंकोरेज में हर अमेरिकी प्रस्ताव की पुष्टि की थी।
दोनों विदेश मंत्रालयों के बीच संपर्क — अंतरराष्ट्रीय मंचों सहित — जारी रखने पर सहमति बनी।
बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति और राजनयिक मिशनों को सामान्य बनाने पर भी चर्चा हुई।

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 24 जुलाई 2025 को मनीला में आयोजित आसियान मंत्रिस्तरीय बैठकों के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से द्विपक्षीय वार्ता की। इस बैठक में मॉस्को ने यूक्रेन संघर्ष के समाधान के प्रति अपनी तत्परता दोहराई और 'एंकोरेज फॉर्मूले' के प्रति प्रतिबद्धता जताई। रूसी विदेश मंत्रालय के हवाले से बताया गया कि दोनों पक्षों के बीच कई क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

मुख्य घटनाक्रम

रूसी मीडिया के अनुसार, लावरोव ने रूबियो को युद्ध क्षेत्र की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया और यूक्रेन को आगे हथियारों की आपूर्ति न करने के महत्व पर विशेष बल दिया। दोनों विदेश मंत्रियों ने यह भी तय किया कि दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच संपर्क — अंतरराष्ट्रीय संगठनों के मंचों सहित — जारी रखा जाएगा। बैठक में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त दोनों पक्षों ने रूस और अमेरिका के राजनयिक मिशनों के कामकाज को सामान्य बनाने तथा पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा की।

एंकोरेज फॉर्मूले पर विवाद

यह बैठक ऐसे समय में हुई जब एंकोरेज शिखर वार्ता की व्याख्या को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद स्पष्ट हो चुके हैं। अगस्त 2025 में एंकोरेज में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई बैठक में यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा हुई थी, लेकिन रूबियो ने कहा था कि उस बैठक में कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ था।

लावरोव ने इस व्याख्या को खारिज करते हुए कहा, "एंकोरेज में हुई बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, मार्को रूबियो और मैं खुद मौजूद था। पुतिन ने अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से एक-एक कर अमेरिकी प्रस्तावों की पुष्टि की थी। पुतिन ने हर बिंदु के बाद विटकॉफ से पूछा था कि क्या उन्होंने मॉस्को यात्रा के दौरान दिए गए अमेरिकी विचारों को सही तरीके से प्रस्तुत किया है।" लावरोव के अनुसार, विटकॉफ ने हर बार सहमति जताई थी।

लावरोव ने आगे कहा, "जब रूबियो यह कहते हैं कि अलास्का में केवल प्रस्तावों पर चर्चा हुई और कोई समझौता नहीं हुआ, तो यह सवाल उठता है कि समझौते का अर्थ क्या है। अगर एक पक्ष समाधान के लिए प्रस्ताव रखता है और दूसरा पक्ष उन पर सहमति जताता है, तो इसे केवल प्रस्ताव कहना उचित नहीं लगता।"

अमेरिका की भूमिका पर सवाल

गौरतलब है कि 26 जून को लावरोव ने यूक्रेन संकट के समाधान में अमेरिका की भूमिका को लेकर स्पष्टता की माँग की थी। यह बयान रूबियो की उन टिप्पणियों के बाद आया था जिनमें उन्होंने एंकोरेज शिखर बैठक के परिणामों पर अपना पक्ष रखा था।

लावरोव ने यह भी उल्लेख किया कि मध्य पूर्व में एक कार्यक्रम के दौरान रूबियो ने संघर्ष समाप्त करने और दोनों पक्षों को वार्ता की मेज पर लाने में अमेरिका की रचनात्मक भूमिका की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा, "अब जब वॉशिंगटन दोनों पक्षों को साथ लाने और रचनात्मक भूमिका निभाने की इच्छा जाहिर कर रहा है, तो यह मध्यस्थता की दिशा में कदम जैसा प्रतीत होता है। इस पूरे मामले पर अभी और स्पष्टता की आवश्यकता है।"

हालाँकि लावरोव ने रूबियो के उस पुराने बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका यूक्रेन का समर्थन करने के कारण निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभा सकता — जो वॉशिंगटन की स्थिति में आंतरिक विरोधाभास को उजागर करता है।

क्या होगा आगे

मनीला वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक संपर्क जारी रहने की उम्मीद है। विश्लेषकों का मानना है कि एंकोरेज की व्याख्या को लेकर जारी मतभेद किसी भी ठोस शांति प्रक्रिया की राह में बड़ी बाधा बने हुए हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले हफ्तों में दोनों पक्ष इस मतभेद को पाटने के लिए कोई साझा आधार तलाश पाते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह महज़ कूटनीतिक बारीकी नहीं — यह शांति प्रक्रिया की वैधता की लड़ाई है। रूस 'स्वीकृत समझौते' का दावा कर अमेरिका पर पीछे हटने का आरोप लगाता है, जबकि वॉशिंगटन 'केवल चर्चा' कहकर किसी भी बाध्यकारी प्रतिबद्धता से बचता है। यह विरोधाभास तब और गहरा हो जाता है जब रूबियो एक ओर अमेरिका की 'रचनात्मक मध्यस्थ' भूमिका की बात करते हैं और दूसरी ओर यूक्रेन समर्थन के कारण निष्पक्षता पर खुद सवाल उठा चुके हैं। मनीला वार्ता ने रास्ता नहीं खोला — उसने यह स्पष्ट किया कि बिना साझा परिभाषा के शांति की कोई भी पहल रेत पर खिंची लकीर से अधिक नहीं होगी।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनीला में लावरोव और रूबियो की बैठक क्यों हुई?
यह बैठक मनीला में आयोजित आसियान मंत्रिस्तरीय बैठकों के दौरान हुई, जहाँ दोनों विदेश मंत्री यूक्रेन संघर्ष, एंकोरेज फॉर्मूले और द्विपक्षीय राजनयिक संबंधों पर चर्चा के लिए मिले। यह कूटनीतिक संपर्क ऐसे समय में हुआ जब एंकोरेज शिखर वार्ता की व्याख्या को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद सार्वजनिक हो चुके थे।
एंकोरेज फॉर्मूला क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
अगस्त 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति पुतिन एंकोरेज में मिले थे और यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा हुई थी। रूस का कहना है कि उस बैठक में अमेरिकी प्रस्तावों पर सहमति बनी थी, जबकि अमेरिका का कहना है कि वहाँ केवल चर्चा हुई, कोई अंतिम समझौता नहीं।
लावरोव ने यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति पर क्या कहा?
लावरोव ने रूबियो के साथ बैठक में यूक्रेन को आगे हथियारों की आपूर्ति न करने के महत्व पर विशेष बल दिया। रूसी मीडिया के अनुसार, उन्होंने इसे संघर्ष समाधान की दिशा में एक अनिवार्य कदम बताया।
इस बैठक से रूस-अमेरिका राजनयिक संबंधों पर क्या असर पड़ेगा?
दोनों विदेश मंत्रालयों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों सहित संपर्क जारी रखने पर सहमति जताई है। हालाँकि, एंकोरेज की व्याख्या को लेकर जारी मतभेद किसी ठोस प्रगति में बाधक बने हुए हैं और विश्लेषकों के अनुसार निकट भविष्य में बड़ी सफलता की संभावना सीमित है।
स्टीव विटकॉफ की इस पूरे मामले में क्या भूमिका है?
स्टीव विटकॉफ अमेरिका के विशेष दूत हैं जिन्होंने मॉस्को की यात्रा की थी। लावरोव के अनुसार, एंकोरेज बैठक में पुतिन ने विटकॉफ से एक-एक कर अमेरिकी प्रस्तावों की पुष्टि कराई थी और विटकॉफ ने हर बार सहमति जताई थी, जिसे रूस 'समझौते की स्वीकृति' मानता है।
राष्ट्र प्रेस
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