गुजरात डायल 112 जन रक्षक सेवा: 7-8 मिनट में मदद, 45% शिकायतों का मौके पर निपटारा
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस की डायल 112 जन रक्षक इमरजेंसी रिस्पॉन्स सर्विस राज्य के नागरिकों के लिए आपातकाल में संजीवनी साबित हो रही है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में शुरू की गई इस एकीकृत आपातकालीन सेवा के तहत अब कोई भी नागरिक सिर्फ 112 डायल करके पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और महिला व बाल हेल्पलाइन की मदद मिनटों में पा सकता है। 1 सितंबर 2025 से 16 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, इस सेवा पर कुल 9,90,130 कॉल प्राप्त हुई हैं।
क्या है डायल 112 जन रक्षक सेवा
पहले नागरिकों को पुलिस के लिए 100, स्वास्थ्य सेवा के लिए 108, अग्निशमन के लिए अलग और महिला हेल्पलाइन के लिए अलग नंबर याद रखने पड़ते थे। डायल 112 सेवा ने इन सभी को एक ही नंबर पर एकीकृत कर दिया है। जीपीएस-युक्त वाहनों और एडवांस्ड सॉफ्टवेयर से संचालित यह 'न्यू-एज स्मार्ट पुलिसिंग' का व्यावहारिक उदाहरण है।
अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत के अनुसार, 112 डायल करते ही कॉल सेंटर के माध्यम से निकटतम जन रक्षक टीम को तुरंत सूचित किया जाता है। यह टीम पुलिस थाना सीमाओं की परवाह किए बिना पीड़ित तक पहुँचती है, जिससे रिस्पॉन्स टाइम घटकर 7 से 8 मिनट रह गया है।
मुख्य घटनाक्रम और आंकड़े
आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर 2025 से 16 जुलाई 2026 के बीच प्राप्त 9,90,130 कॉल में से वर्गीकरण इस प्रकार रहा:
8,76,810 शिकायतें पुलिस मामलों से जुड़ी थीं, 56,551 कॉल चिकित्सा आपात स्थितियों की थीं, 17,977 कॉल अग्निशमन से संबंधित थीं, 37,929 शिकायतें महिला सुरक्षा से जुड़ी थीं, 659 कॉल बाल सुरक्षा और 204 शिकायतें आपदा संबंधी घटनाओं की थीं। उल्लेखनीय तथ्य यह है कि लगभग 45 प्रतिशत शिकायतों का निपटारा जन रक्षक टीम ने घटनास्थल पर ही कर दिया।
लाभार्थियों की ज़ुबानी
अहमदाबाद निवासी नवनीत पटेल ने बताया कि कुछ समय पहले उनके घर के पास एक दीवार ढह गई, जिसमें उनके दो-तीन रिश्तेदार फँस गए। 112 डायल करने के थोड़ी देर बाद ही जन रक्षक टीम, फायर ब्रिगेड और 108 एंबुलेंस सेवा मौके पर पहुँच गई और तुरंत इलाज दिलाने में मदद की।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब आपात परिस्थितियों में घबराहट के चलते सही नंबर याद रखना और डायल करना अत्यंत कठिन हो जाता है। एकल नंबर प्रणाली इस मानवीय कमज़ोरी को दूर करती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
ईएमआरआई - जीएचएस (इमरजेंसी मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट - ग्रीन हेल्थ सर्विसेज) के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर जसवंत प्रजापति ने नागरिकों से अपील की है कि आपात स्थिति दिखने पर बिना देर किए 112 डायल करें। साथ ही उन्होंने यह भी आग्रह किया कि इस नंबर का उपयोग केवल वास्तविक आपात स्थिति में ही करें, ताकि ज़रूरतमंद लोगों को सेवा में देरी न हो।
अहमदाबाद की डीसीपी रीमा मुंशी ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों या दुर्घटना के शिकार किसी भी व्यक्ति को जब भी मदद की ज़रूरत हो, केवल 112 डायल करें — एक जन रक्षक वाहन तुरंत उनकी सेवा में पहुँचेगा।
आगे की राह
गुजरात पुलिस की यह पहल स्मार्ट पुलिसिंग के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय मॉडल के रूप में उभर रही है। 24 घंटे सक्रिय रहने वाली यह सेवा अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय हो सकती है। गौरतलब है कि जन रक्षक टीमों का थाना सीमाओं से स्वतंत्र संचालन पारंपरिक पुलिसिंग की एक बड़ी बाधा को दूर करता है और भविष्य में इस मॉडल के विस्तार की संभावना बनती है।