26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गुजरात की '181 अभयम' महिला हेल्पलाइन ने 12 वर्ष में 18 लाख महिलाओं को दी सुरक्षा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गुजरात की '181 अभयम' महिला हेल्पलाइन ने 12 वर्ष में 18 लाख महिलाओं को दी सुरक्षा

सारांश

गुजरात की '181 अभयम' महिला हेल्पलाइन ने 12 वर्षों में लाखों महिलाओं को सुरक्षा और सहयोग प्रदान किया है। इस अभिनव पहल ने घरेलू हिंसा और अन्य समस्याओं का सामना कर रही महिलाओं के लिए एक मजबूत सहारा बनकर उभरी है।

मुख्य बातें

181 अभयम हेल्पलाइन ने 12 वर्षों में 18 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता दी।
यह हेल्पलाइन 24/7 सक्रिय रहती है।
महिलाओं की पहचान गोपनीय रखी जाती है।
हेल्पलाइन ने 1,09,886 महिलाओं को संकट से सुरक्षित निकाला।
यह सेवा 58 रेस्क्यू वैन के साथ और भी प्रभावी बनी है।

गांधीनगर, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात की '181 अभयम' महिला हेल्पलाइन ने अपने 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवधि में, यह सेवा राज्य की महिलाओं के लिए सहायता और सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुकी है।

घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, साइबर अपराध और वैवाहिक विवाद जैसी कई समस्याओं का सामना कर रही हजारों महिलाओं को इस हेल्पलाइन ने समय पर सहायता और सुरक्षा प्रदान की है।

8 मार्च 2015 को आरंभ की गई इस हेल्पलाइन ने पिछले 12 वर्षों में लाखों महिलाओं तक पहुंच बनाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में 18,10,913 से अधिक महिलाओं को मार्गदर्शन, सलाह और सहयोग प्रदान किया गया है।

गंभीर और संकट भरे हालात में हेल्पलाइन की टीमों ने 1,09,886 महिलाओं की जान बचाई और उन्हें सुरक्षित शेल्टर होम तक पहुंचाया। इसके अतिरिक्त, 2,29,660 मामलों का समाधान मौके पर ही काउंसलिंग द्वारा किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि '181 अभयम' हेल्पलाइन गुजरात की महिलाओं के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बन गई है। हमारी टीमों ने 3,60,964 मामलों में मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप किया और संकट में फंसी महिलाओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई।

यह हेल्पलाइन 24 घंटे और सातों दिन सक्रिय रहती है। इसमें महिला पुलिस कांस्टेबल और प्रशिक्षित काउंसलर मिलकर काम करते हैं, ताकि पीड़ित महिलाओं को तुरंत सहायता मिल सके।

राज्य सरकार ने इस सेवा को और प्रभावी बनाने के लिए 59 आधुनिक रेस्क्यू वैन तैनात की हैं। इन वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगा है और इन्हें मोबाइल सेफ्टी सेंटर के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसे देश में एक अभिनव पहल माना जाता है।

तकनीक के उपयोग से भी इस हेल्पलाइन की कार्यक्षमता में वृद्धि हुई है। 181 मोबाइल ऐप में 'पैनिक बटन' और 'फोन शेकिंग' जैसे फीचर्स की सुविधा है। इनकी सहायता से महिलाएं बिना कॉल किए अपनी सटीक लोकेशन हेल्पलाइन तक भेज सकती हैं।

अधिकारियों ने बताया कि तकनीक और प्रशिक्षित कर्मियों का यह संयोजन सुनिश्चित करता है कि महिलाएं आपात या जानलेवा परिस्थितियों में भी तुरंत मदद प्राप्त कर सकें।

हेल्पलाइन के माध्यम से महिलाओं को कानूनी अधिकारों, सरकारी योजनाओं और अन्य सहायता सेवाओं की जानकारी भी प्रदान की जाती है। इसके साथ ही, मदद मांगने वाली महिलाओं की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है। गुजरात में रहने वाली अन्य राज्यों की महिलाएं भी इस सेवा का मुफ्त लाभ उठा सकती हैं।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस हेल्पलाइन को महिलाओं की सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनाए रखा है, ताकि राज्य की हर महिला खुद को सुरक्षित और समर्थ महसूस कर सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह समाज में महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या '181 अभयम' हेल्पलाइन मुफ्त है?
हां, यह हेल्पलाइन सभी महिलाओं के लिए मुफ्त है, जिसमें अन्य राज्यों की महिलाएं भी शामिल हैं।
क्या इस हेल्पलाइन से सहायता प्राप्त करने के लिए पहचान बतानी होती है?
नहीं, मदद मांगने वाली महिलाओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
क्या यह हेल्पलाइन 24/7 उपलब्ध है?
जी हां, '181 अभयम' हेल्पलाइन 24 घंटे और सातों दिन सक्रिय रहती है।
इस हेल्पलाइन का उपयोग कैसे किया जा सकता है?
महिलाएं इस हेल्पलाइन पर कॉल करके या 181 मोबाइल ऐप का उपयोग करके सहायता प्राप्त कर सकती हैं।
क्या हेल्पलाइन केवल गुजरात की महिलाओं के लिए है?
नहीं, यह सेवा अन्य राज्यों की महिलाओं के लिए भी उपलब्ध है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले