गुजरात पुलिस का 28 दिवसीय 'सुरक्षित शक्ति' अभियान: महिला सुरक्षा और डिजिटल खतरों पर दोहरा फोकस
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस ने 17 अगस्त 2026 से 28 दिवसीय राज्यव्यापी 'सुरक्षित शक्ति' अभियान की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को व्यापक और ठोस रूप देना है। इस पहल में निवारक पुलिसिंग, डिजिटल सुरक्षा जागरूकता, पीड़ित सहायता, सामुदायिक भागीदारी और प्रदर्शन-आधारित निगरानी — पाँच मुख्य स्तंभों पर काम होगा।
अभियान की पृष्ठभूमि और नेतृत्व
यह अभियान उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के स्पष्ट निर्देश के बाद शुरू किया गया है। संघवी ने कहा था कि 'महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए और उनके खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाने चाहिए।' पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जीएस मलिक इस पूरे अभियान की देखरेख कर रहे हैं, जबकि पुलिस महानिदेशक (सीआईडी क्राइम और रेलवे) केएलएन राव के नेतृत्व में इसे ज़मीनी स्तर पर संचालित किया जा रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल अपराधों और महिलाओं के विरुद्ध उत्पीड़न के मामलों में देशभर में चिंताजनक वृद्धि दर्ज की जा रही है। गुजरात पुलिस का यह कदम राज्य में महिला सुरक्षा को एक संस्थागत प्राथमिकता के रूप में स्थापित करने की दिशा में उठाया गया है।
मुख्य घटनाक्रम और रणनीति
पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (सीआईडी अपराध, महिला प्रकोष्ठ) अजय चौधरी ने बताया कि अभियान की प्रभावशीलता को मापने के लिए साक्ष्य-आधारित पुलिसिंग और मापने योग्य प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (KPI) प्रस्तावित किए गए हैं। पुलिस इकाइयों को संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर गश्त बढ़ाने और निवारक हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया गया है।
जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बॉडी-वियर कैमरे और अन्य तकनीकी उपकरणों के व्यापक उपयोग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। गौरतलब है कि यह पहली बार है जब गुजरात पुलिस ने महिला सुरक्षा अभियान में KPI-आधारित निगरानी प्रणाली को इतने स्पष्ट रूप से शामिल किया है।
डिजिटल सुरक्षा पर विशेष ज़ोर
अभियान का एक अहम हिस्सा डिजिटल खतरों से सुरक्षा है। पुलिस महिलाओं और लड़कियों को साइबरबुलिंग, ऑनलाइन ग्रूमिंग, सेक्स्टॉर्शन, डीपफेक, ओटीपी धोखाधड़ी और क्यूआर-कोड घोटालों जैसे उभरते ऑनलाइन खतरों के प्रति जागरूक करेगी। चौधरी के अनुसार, जागरूकता और डिजिटल सुरक्षा इस अभियान का केंद्रीय फोकस है।
आम जनता पर असर
इस अभियान के तहत महिलाओं को हेल्पलाइन नंबर 181, 112 और 1930 तथा वन स्टॉप सेंटर जैसी आपातकालीन सहायता सेवाओं से परिचित कराया जाएगा। इसके अलावा, उन्हें आत्मरक्षा कौशल और अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी देने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। यह पहल न केवल शहरी बल्कि राज्य के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिलाओं तक भी पहुँचने का लक्ष्य रखती है।
क्या होगा आगे
28 दिनों के इस अभियान के दौरान पुलिस इकाइयों के प्रदर्शन का आकलन मापने योग्य संकेतकों के आधार पर किया जाएगा। अभियान की समाप्ति के बाद परिणामों की समीक्षा कर भविष्य की नीति-निर्माण में इसे आधार बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि KPI-आधारित यह मॉडल सफल रहा, तो इसे अन्य राज्यों के लिए भी एक मानक के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।