गुजरात पुलिस का 'ऑपरेशन सुरक्षित साइबरस्पेस': 28 दिनों में 25 लाख नागरिकों को साइबर सुरक्षा की ट्रेनिंग
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस ने 1 जुलाई 2025 से 28 जुलाई 2025 तक चलने वाले राज्यव्यापी 28 दिवसीय अभियान 'ऑपरेशन सुरक्षित साइबरस्पेस' की शुरुआत की है, जिसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल दुनिया में महिलाओं और बच्चों को ऑनलाइन शोषण, साइबरस्टॉकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी से बचाना है। यह अभियान प्रौद्योगिकी आधारित पुलिसिंग, साइबर जागरूकता, पीड़ित सहायता और समन्वित प्रवर्तन को एक साथ जोड़ता है।
अभियान की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
गुजरात पुलिस के अनुसार, यह पहल इस बात को सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई है कि महिलाएं और बच्चे ऑनलाइन माहौल में भी उतना ही सुरक्षित महसूस करें जितना वे सार्वजनिक स्थानों पर करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर अपराधों — विशेषकर महिलाओं और नाबालिगों को निशाना बनाने वाले मामलों — में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतों में हाल के वर्षों में तेज़ उछाल देखा गया है।
वरिष्ठ अधिकारी की प्रतिक्रिया
पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक, सीआईडी क्राइम (महिला प्रकोष्ठ) अजय चौधरी ने कहा, 'इस अभियान का उद्देश्य डिजिटल जगत में जन सुरक्षा को मजबूत करना है, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को, जो ऑनलाइन शोषण, साइबरस्टॉकिंग, वित्तीय धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और अन्य साइबर अपराधों का शिकार बन रहे हैं।' उन्होंने बताया कि यह अभियान पुलिस महानिदेशक जीएस मलिक के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है और इसका लक्ष्य संभावित पीड़ितों की समय रहते पहचान करना, वित्तीय नुकसान रोकना और हर स्तर पर समन्वित पुलिस हस्तक्षेप सुनिश्चित करना है।
अभियान के प्रमुख लक्ष्य और कार्ययोजना
गुजरात पुलिस ने इस अभियान के तहत महत्वाकांक्षी राज्यव्यापी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इनमें शामिल हैं:
25 लाख नागरिकों को साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार पर शिक्षित करना; 20 लाख छात्रों को साइबर सुरक्षा की शपथ दिलाना; 10,000 स्कूलों और 1,500 कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना; तथा 1 लाख किशोरियों तक साइबरस्टॉकिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, डिजिटल गोपनीयता और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग पर सत्र पहुँचाना। इसके अलावा 5,000 अभिभावक जागरूकता सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।
क्रियान्वयन और साझेदारी
स्थानीय स्तर पर अभियान का नेतृत्व एसएचई टीमों और समर्पित साइबर अपराध पुलिस स्टेशनों द्वारा किया जाएगा। गुजरात पुलिस इस अभियान में बैंकों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, शैक्षणिक संस्थानों, निवासी कल्याण संघों (RWA), गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और सामुदायिक नेताओं के साथ मिलकर काम करेगी। राज्यभर के पुलिस कर्मियों को साइबर अपराध अलर्ट की पुष्टि करने, जोखिम में पड़े लोगों को परामर्श देने और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन के माध्यम से तत्काल रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अभियान ने महिलाओं और बच्चों से जुड़ी हर साइबर शिकायत पर 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई है — जो इसे पूर्व के अभियानों से अलग करती है।
आगे की राह
अभियान का नारा है — 'जागरूकता के माध्यम से सुरक्षा, प्रौद्योगिकी के माध्यम से जांच, कानून के माध्यम से कार्रवाई और जनभागीदारी के माध्यम से एक सुरक्षित गुजरात।' फील्ड अधिकारियों के लिए स्पष्ट जिम्मेदारियाँ, निगरानी तंत्र और प्रदर्शन संकेतक निर्धारित किए गए हैं। यदि यह मॉडल सफल रहा, तो इसे अन्य राज्यों के लिए एक मानक साइबर सुरक्षा ढाँचे के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।