गुजरात पुलिस ने 28 दिनों में 42 लापता बच्चों को खोजा, सीसीटीवी और साइबर टूल्स बने हथियार
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस ने 1 जुलाई से 28 जुलाई 2026 के बीच राज्यव्यापी 'ऑपरेशन सुरक्षित साइबर स्पेस' के तहत सीसीटीवी एनालिटिक्स, साइबर टूल्स और डिजिटल सर्विलांस तकनीक का उपयोग करते हुए 42 लापता बच्चों का सफलतापूर्वक पता लगाया और उन्हें उनके परिजनों से मिलाया। यह अभियान डिप्टी मुख्यमंत्री हर्ष संघवी की अगुवाई में शुरू किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल दुनिया में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
मुख्य घटनाक्रम
आनंद जिले के खंभात का एक मामला इस अभियान की सफलता का प्रतीक बन गया। खोडियार नगर सोसाइटी निवासी 7वीं कक्षा की एक छात्रा खंभात नागरिक सहकारी बैंक प्राइमरी स्कूल जाने के लिए घर से निकली, लेकिन स्कूल नहीं पहुँची। जब उसकी कक्षा शिक्षिका ने परिजनों को इसकी सूचना दी, तो परिवार तुरंत खंभात सिटी पुलिस के पास पहुँचा।
पुलिस ने 'विश्वास फेज-2' सीसीटीवी नेटवर्क के फुटेज और अन्य डिजिटल सर्विलांस टूल्स की सहायता से कुछ ही घंटों में छात्रा का पता लगा लिया। वह अपनी साइकिल के साथ सुरक्षित मिली और उसे परिवार को सौंप दिया गया।
अभियान की संरचना और नेतृत्व
यह अभियान डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) ज्ञानेंद्र सिंह मलिक की देखरेख में संचालित किया गया। एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, सीआईडी क्राइम (महिला सेल), अजय चौधरी ने बताया, "DGP के मार्गदर्शन में गुजरात पुलिस ने साइबर जागरूकता बढ़ाने, बचाव के उपायों को मजबूत करने, साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और साइबर स्पेस में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर खास ध्यान देते हुए साइबर अपराध की जांच की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए पूरे राज्य में यह अभियान शुरू किया। इस दौरान साइबर टूल्स और विभिन्न तकनीकी संसाधनों का उपयोग करके 42 लापता बच्चों का सफलतापूर्वक पता लगाया गया।"
चौधरी ने स्पष्ट किया कि यह अभियान सीआईडी क्राइम और रेलवे पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से चलाया गया, जिसमें गुजरात भर के पुलिस स्टेशनों ने सक्रिय भागीदारी की।
अभियान के अन्य लक्ष्य
लापता बच्चों की तलाश के अलावा, इस अभियान में ऑनलाइन धोखाधड़ी, डिजिटल सुरक्षा, साइबर हाइजीन और इंटरनेट के जिम्मेदार उपयोग को लेकर व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम, आउटरीच सेशन और सोशल मीडिया अभियान भी चलाए गए। इसका उद्देश्य आम नागरिकों को डिजिटल खतरों के प्रति सचेत करना था।
तकनीक का बढ़ता उपयोग और आगे की राह
चौधरी ने कहा, "यह पहल दर्शाती है कि गुजरात पुलिस बच्चों को खोजने और राज्यभर में आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए किस प्रकार तकनीक का उपयोग बढ़ा रही है।" गौरतलब है कि 'विश्वास फेज-2' सीसीटीवी नेटवर्क जैसे बुनियादी ढाँचे की उपयोगिता इस अभियान में एक बार फिर साबित हुई। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बच्चों की सुरक्षा और लापता बच्चों की त्वरित तलाश को लेकर पुलिस बलों पर दबाव बढ़ रहा है। आने वाले महीनों में इस अभियान के विस्तार और नई तकनीकों के समावेश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।