गुजरात पुलिस का 'ऑपरेशन सेफ साइबर स्पेस': 5,000 से अधिक कार्यक्रमों में महिलाओं-बच्चों को ऑनलाइन फ्रॉड से बचाने की मुहिम
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस ने 1 जुलाई से 28 जुलाई 2025 के बीच पूरे राज्य में 'ऑपरेशन सेफ साइबर स्पेस' अभियान चलाया, जिसका मकसद महिलाओं और बच्चों को सेक्स्टॉर्शन, डीपफेक, डिजिटल ब्लैकमेलिंग और वित्तीय साइबर धोखाधड़ी जैसे ऑनलाइन खतरों के प्रति सजग करना था। पुलिस की शी-टीम और साइबर सेल के कर्मियों ने स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक केंद्रों में पहुँचकर यह जागरूकता मुहिम संचालित की।
अभियान का विस्तार और आँकड़े
अभियान के पहले चार हफ्तों में गुजरात पुलिस ने राज्यभर में 5,000 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। पहले सप्ताह में साइबर साक्षरता और सुरक्षा से जुड़े 1,874 सत्र हुए, जबकि दूसरे सप्ताह में सेक्स्टॉर्शन, डीपफेक और साइबर स्टॉकिंग जैसे गंभीर विषयों पर केंद्रित 3,415 विशेष सत्र आयोजित किए गए। इन शिविरों के ज़रिए लाखों नागरिकों — अभिभावकों, शिक्षकों और युवाओं — से सीधा संवाद स्थापित किया गया।
अभियान के मुख्य उद्देश्य
गुजरात पुलिस के अनुसार, इस अभियान के पाँच प्रमुख स्तंभ हैं — सामुदायिक सहभागिता, तकनीक-आधारित निगरानी, पीड़ितों तक पहुँच, साइबर जागरूकता और त्वरित कानूनी कार्रवाई। बच्चों को विशेष रूप से बताया गया कि किसी भी परेशानी की स्थिति में वे साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके साथ ही विभिन्न जिलों में साइबर रैलियाँ और गोष्ठियाँ भी आयोजित की गईं।
छात्राओं की प्रतिक्रिया
गांधीनगर की छात्रा हिना मकवाना ने बताया कि इस कार्यक्रम में उन्हें साइबर सुरक्षा, अभयम सेवा और महिला हेल्पलाइन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली, जो भविष्य में उनके काम आ सकती है। एक अन्य छात्रा किंजल परमार ने कहा कि उन्हें समझाया गया कि साइबर अपराध दो प्रकार के होते हैं — वित्तीय साइबर अपराध और सोशल मीडिया के ज़रिए होने वाले अपराध। उन्होंने बताया कि वित्तीय साइबर धोखाधड़ी में ओटीपी और वेब लिंक का इस्तेमाल होता है, और उन्हें निर्देश दिया गया कि अनजान लिंक पर क्लिक न करें और ओटीपी किसी से साझा न करें।
पुलिस की रणनीति: डर नहीं, दोस्ती
शी-टीम की कॉन्स्टेबल बिनल जगदीशचंद्र ने बताया कि वे स्कूलों में जाकर सेमिनार आयोजित करती हैं और बच्चों को गुड टच-बैड टच के बारे में जागरूक करती हैं। उनका ज़ोर इस बात पर है कि बच्चों के मन से पुलिस का भय दूर हो और वे पुलिस को अपना मित्र समझें। यह रणनीति डिजिटल सुरक्षा को सामाजिक विश्वास के साथ जोड़ती है।
वरिष्ठ अधिकारी का नज़रिया
अजय कुमार चौधरी, एडीजीपी, महिला सेल एवं सीआईडी क्राइम, गुजरात पुलिस ने कहा कि फेक प्रोफाइल, डिजिटल ब्लैकमेलिंग और साइबर रिवेंज जैसी घटनाएँ अब आम हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि आज बहुत से लोग 8 घंटे से अधिक समय मोबाइल पर बिताते हैं, इसलिए डिजिटल सुरक्षा की जानकारी हर नागरिक के लिए अनिवार्य हो गई है। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर साइबर अपराधों में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। आगे भी इस तरह के जागरूकता अभियान जारी रहने की उम्मीद है।