गुजरात पुलिस का 'ऑपरेशन सुरक्षित साइबरस्पेस': दो हफ्तों में 5,289 जागरूकता कार्यक्रम, महिलाएं-बच्चे निशाने पर
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस ने राज्य भर में महिलाओं और बच्चों को डिजिटल खतरों से सुरक्षित करने के लिए 'ऑपरेशन सुरक्षित साइबरस्पेस' नामक 28 दिवसीय अभियान शुरू किया है। अभियान के पहले दो हफ्तों में शी-टीम और साइबर सेल ने मिलकर पूरे गुजरात में 5,289 साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें सेक्सटॉर्शन, डीपफेक, साइबरस्टॉकिंग और ऑनलाइन ग्रूमिंग जैसे उभरते खतरों पर विशेष ध्यान दिया गया।
अभियान की संरचना और उद्देश्य
यह पहल डीजीपी जी. एस. मलिक की प्रत्यक्ष देखरेख में संचालित हो रही है। अभियान चार स्तंभों पर टिका है — सामुदायिक आउटरीच, तकनीक-आधारित निगरानी, पीड़ित सहायता और त्वरित कानूनी कार्रवाई। सीआईडी क्राइम (महिला सेल) के एडीजीपी अजय चौधरी ने कहा, "डिजिटल युग में महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करना एक प्राथमिकता बन गई है।" उन्होंने जोड़ा कि इस ऑपरेशन के ज़रिए डीपफेक और सेक्सटॉर्शन जैसे खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाकर एक सुरक्षित डिजिटल माहौल तैयार किया जा रहा है।
पहले हफ्ते का कार्यक्रम विवरण
अभियान के पहले सप्ताह में 1,874 जागरूकता और आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें 185 राज्य-स्तरीय लॉन्च इवेंट, स्कूलों में 438 'साइबर सुरक्षा दिवस' कार्यक्रम और किशोरियों के लिए 336 'किशोरी दिवस' जागरूकता सत्र शामिल रहे। कॉलेज स्तर पर 207 साइबर जागरूकता कार्यक्रम और विभिन्न जिलों में 109 साइबर रैलियाँ भी आयोजित की गईं।
दूसरे हफ्ते में विषय-केंद्रित अभियान
दूसरे सप्ताह में अभियान ने साइबर अपराध के विशिष्ट रूपों पर ध्यान केंद्रित करते हुए 4,172 विषय-आधारित कार्यक्रम आयोजित किए। सबसे अधिक 743 कार्यक्रम सोशल मीडिया सुरक्षा और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार पर केंद्रित रहे। इसके अलावा, डीपफेक अपराधों की पहचान पर 578 कार्यक्रम, साइबरस्टॉकिंग रोकथाम पर 514 सत्र, 'एंटी-सेक्सटॉर्शन डे' के तहत 520 जागरूकता कार्यक्रम, गेमिंग सुरक्षा पर 512 कार्यक्रम और ऑनलाइन ग्रूमिंग रोकने के लिए 466 सत्र आयोजित किए गए। राज्य के दूरदराज इलाकों तक पहुँचने के लिए 461 जन-जागरूकता शिविर भी लगाए गए।
पुलिस बल की जवाबदेही तय
इस अभियान की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि पुलिस कॉन्स्टेबल से लेकर पुलिस इंस्पेक्टर तक हर स्तर पर कर्मचारियों को सुनिश्चित जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। अफसरों का मूल्यांकन पाँच मानकों — जागरूकता सृजन, रोकथाम, कानून प्रवर्तन, जाँच की गुणवत्ता और जनता का भरोसा — पर किया जा रहा है। यह प्रदर्शन-आधारित ढाँचा अभियान को महज़ औपचारिकता से अलग करता है।
आगे की राह
यह 28 दिवसीय अभियान अभी जारी है और शेष चरणों में और अधिक विशेषज्ञता-केंद्रित कार्यक्रम आयोजित किए जाने की उम्मीद है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर अपराध के मामलों में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की जा रही है, और गुजरात का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है।