गुजरात में 'सुरक्षित शक्ति अभियान': 28 दिन चली SHE टीम की पेट्रोलिंग, साइबर सुरक्षा पर भी जोर
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 17 अगस्त से 13 सितंबर 2026 तक 28 दिनों का 'सुरक्षित शक्ति अभियान' चलाया, जिसमें अपराध की रोकथाम, डिजिटल सुरक्षा, पीड़ित सहायता और सामुदायिक भागीदारी को केंद्र में रखा गया। अभियान के दौरान गुजरात पुलिस की विशेष 'एसएचई टीम' ने अहमदाबाद सहित राज्यभर के संवेदनशील स्थानों पर सक्रिय गश्त की और महिलाओं को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया।
संवेदनशील स्थानों पर बढ़ाई गई पुलिस मौजूदगी
अभियान के अंतर्गत स्कूल, कॉलेज, शॉपिंग मॉल और अन्य ऐसे स्थानों पर जहाँ महिलाओं की अधिक आवाजाही रहती है, वहाँ एसएचई टीम ने नियमित गश्त और निगरानी की। संवेदनशील इलाकों में आधुनिक तकनीक के उपयोग के जरिए सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया।
अहमदाबाद पुलिस के सब इंस्पेक्टर बीयू गंडेचा ने बताया कि महिलाओं से जुड़े स्थानों पर एसएचई टीम लगातार गश्त करती है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना और उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाना है।
साइबर अपराधों के प्रति किया जागरूक
अभियान का एक अहम पहलू महिलाओं को डिजिटल सुरक्षा के प्रति सतर्क करना रहा। पुलिस ने साइबर बुलिंग, ऑनलाइन ग्रूमिंग, सेक्सटॉर्शन, डीपफेक, ओटीपी फ्रॉड और क्यूआर कोड से जुड़े ऑनलाइन अपराधों के बारे में जानकारी दी। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण रहा जब देशभर में साइबर अपराधों की शिकार महिलाओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की जा रही है।
महिलाओं की सहायता के लिए वुमेन हेल्पलाइन 181, इमरजेंसी पुलिस सहायता 112, साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन 1930 और वन स्टॉप सेंटर जैसी सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
स्थानीय महिलाओं की प्रतिक्रिया
अभियान को लेकर स्थानीय निवासियों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी गई। स्थानीय निवासी आशुमी मेहता ने कहा कि पहले नवरात्रि या रिवरफ्रंट जैसी जगहों पर जाते समय उन्हें यह चिंता रहती थी कि कोई अनजान व्यक्ति पीछा न कर रहा हो। उन्होंने बताया कि एसएचई टीम के सक्रिय रहने से यह डर काफी हद तक कम हुआ है।
एक अन्य स्थानीय निवासी निशा पटेल ने बताया कि वह नौकरी के सिलसिले में देर रात तक आती-जाती हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर एसएचई टीम को फोन करने पर तत्काल सहायता मिलती है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ा है।
स्मार्ट पुलिसिंग और प्रिवेंटिव दृष्टिकोण
अभियान में 'प्रिवेंटिव पुलिसिंग' यानी अपराध घटित होने से पहले ही उसकी रोकथाम पर विशेष जोर दिया गया। हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई, महिला हेल्प डेस्क और साइबर अपराध से जुड़े मामलों में सहायता को अभियान के अभिन्न अंग के रूप में शामिल किया गया।
गुजरात पुलिस के एडीजीपी, महिला सेल अजय चौधरी ने बताया कि विभिन्न हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों पर एसएचई टीम को भेजकर सहायता और जागरूकता का काम किया गया। उन्होंने बताया कि पुलिस स्टेशनों पर महिला हेल्प डेस्क और साइबर सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी अभियान को सुनियोजित तरीके से संचालित किया गया।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह अभियान राज्य में महिला सुरक्षा के प्रति एक संरचनात्मक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण का हिस्सा प्रतीत होता है। आने वाले त्योहारी सीजन — विशेषकर नवरात्रि — को देखते हुए एसएचई टीम की सक्रियता और सघन पेट्रोलिंग जारी रखने की संभावना है।