दिवाली पर गुजरात में 108 और 112 इमरजेंसी कॉल 73% तक बढ़ने का अनुमान, विशेष एक्शन प्लान तैयार
सारांश
मुख्य बातें
दिवाली और गुजराती नव वर्ष के मद्देनज़र गुजरात की 108 और 112 आपातकालीन सेवाओं ने एक व्यापक विशेष एक्शन प्लान तैयार किया है, जिसके तहत अतिरिक्त एंबुलेंस, कॉल सेंटर टीमें, मैनपावर और ऑपरेशन सुपरवाइजर पहले से ही अलर्ट मोड पर रखे गए हैं। पिछले वर्षों के आँकड़ों के विश्लेषण के आधार पर अनुमान है कि दिवाली के दिन 112 सेवा पर कॉल की संख्या सामान्य से 73 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। यह तैयारी अहमदाबाद स्थित ईएमआरआई गुजरात की ओर से की गई है, जो राज्य में आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवाओं का संचालन करती है।
कितनी बढ़ेंगी इमरजेंसी कॉल
ईएमआरआई गुजरात के मुख्य परिचालन अधिकारी जशवंत प्रजापति के अनुसार, सामान्य दिनों में 108 सेवा को प्रतिदिन औसतन 5,248 इमरजेंसी कॉल प्राप्त होती हैं। दिवाली के दिन यह संख्या 16 प्रतिशत बढ़कर 6,111 तक पहुँचने का अनुमान है।
गुजराती नव वर्ष के दिन 29 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह आँकड़ा 6,776 तक जा सकता है, जबकि भाई दूज पर 20 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ लगभग 6,453 मामले आने की संभावना है। वहीं 112 सेवा पर सामान्य दिनों में प्रतिदिन औसतन 3,610 प्रभावी इमरजेंसी कॉल आती हैं — दिवाली पर यह संख्या 73 प्रतिशत उछाल के साथ 6,277, नव वर्ष पर 61 प्रतिशत वृद्धि के साथ 5,822, और भाई दूज पर 19 प्रतिशत बढ़कर 4,003 तक पहुँच सकती है।
किस तरह के मामलों में होती है बढ़ोतरी
प्रजापति ने बताया कि दिवाली पर पटाखों के कारण आग लगने, जलने और छोटी-मोटी चोटों के मामले बढ़ते हैं। इसके अलावा प्रदूषण के चलते श्वसन संबंधी समस्याओं में भी इज़ाफ़ा देखा जाता है। त्योहार के दौरान मारपीट और हमले से जुड़ी घटनाएँ भी बढ़ सकती हैं, और बाकी दिनों में सड़क दुर्घटनाओं व ट्रॉमा के मामले — जिनमें मुख्यतः दोपहिया और चारपहिया वाहन शामिल होते हैं — में वृद्धि होती है।
गौरतलब है कि गुजरात में दिवाली के अगले दिन नव वर्ष भी मनाया जाता है, जिसके कारण लगातार चार से पाँच दिन त्योहारी माहौल बना रहता है और आपातकालीन सेवाओं पर दबाव एकसाथ कई दिनों तक बना रहता है।
स्मार्ट रेफरल सिस्टम और तकनीकी तैयारी
इस वर्ष स्मार्ट रेफरल सिस्टम लागू किया गया है, जिसके माध्यम से सरकारी अस्पतालों को आने वाली एंबुलेंस की जानकारी पहले से मिल सकेगी। यदि किसी मरीज़ को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित किया जाता है, तो उसका रिकॉर्ड भी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा, जिससे निर्बाध चिकित्सा सहायता सुनिश्चित होगी।
पीसीआर वैन में जीपीएस और सीएडी तकनीक के एकीकरण से डायनामिक हॉटस्पॉट निर्धारित किए गए हैं। गूगल हॉटस्पॉट थ्योरी के आधार पर यह तय किया गया है कि व्यस्त समय में किन स्थानों पर वाहन तैनात रहने से घटनास्थल तक पहुँचने में न्यूनतम समय लगेगा। वर्तमान में 108 सेवा का राज्य में औसत रिस्पॉन्स टाइम 12 मिनट 50 सेकंड है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह लगभग 9 मिनट है।
112: अब एक नंबर, सभी सेवाएँ
प्रजापति ने बताया कि गृह विभाग ने 112 को इंटीग्रेटेड इमरजेंसी नंबर घोषित कर दिया है। इसके तहत अब पुलिस (100), फायर सर्विस (101), मेडिकल इमरजेंसी (108), महिला हेल्पलाइन (181) और चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) जैसी सभी सेवाओं के लिए अलग-अलग नंबर याद रखने की आवश्यकता नहीं रहेगी।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में इमरजेंसी प्रतिक्रिया प्रणाली को एकीकृत करने की माँग बढ़ रही है। गुजरात में 108 सेवा पिछले 20 वर्षों से संचालित है और इसके आँकड़ों का उपयोग ही इस त्योहारी तैयारी की आधारशिला है। जिन ज़िलों में मामलों की संख्या सबसे अधिक बढ़ने की संभावना है, वहाँ अतिरिक्त एंबुलेंस पहले से तैनात की जाएंगी।