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प्रशांत किशोर का बड़ा दावा: BJP में शामिल दोनों MLC की सदस्यता जाना तय, सरकार भी नहीं बचा सकती

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प्रशांत किशोर का बड़ा दावा: BJP में शामिल दोनों MLC की सदस्यता जाना तय, सरकार भी नहीं बचा सकती

सारांश

प्रशांत किशोर ने बेगूसराय में ऐलान किया कि BJP में शामिल हुए दो निर्दलीय MLC की सदस्यता जाना तय है — और सरकार भी उन्हें नहीं बचा सकती। साथ ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के 'क्राइम-अपराध' बयान पर तीखा व्यंग्य और मधुबनी घटना में न्याय की माँग — जन सुराज ने एक साथ कई मोर्चे खोले।

मुख्य बातें

प्रशांत किशोर ने 4 नवंबर 2026 को बेगूसराय में कहा कि BJP में शामिल दोनों निर्दलीय MLC की सदस्यता जाना तय है।
जन सुराज ने विधान परिषद के सभापति को पहले ही याचिका दे दी है; प्रत्याशी अफाक अहमद और बी.
मोहन भी एक-दो दिनों में याचिका दाखिल करेंगे।
कार्रवाई न होने पर जन सुराज अदालत का दरवाज़ा खटखटाएगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के 'क्राइम और अपराध' बयान पर किशोर ने तीखा व्यंग्य किया।
मधुबनी घटना पर पार्टी का राज्यस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिला; ASI के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हो या नहीं, यह अगले एक-दो दिनों में तय होगा।

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 4 नवंबर 2026 को बेगूसराय में स्पष्ट शब्दों में कहा कि नवनिर्वाचित दो निर्दलीय विधान परिषद सदस्यों का भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय असंवैधानिक है और दोनों एमएलसी की सदस्यता जाना तय है। उन्होंने यह भी कहा कि BJP की सरकार भी इन्हें नहीं बचा सकती।

मुख्य आरोप और कानूनी कार्रवाई

बेगूसराय में जन सुराज के नवनियुक्त जिला और प्रखंड पदाधिकारियों की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में किशोर ने कहा कि दोनों एमएलसी ने गैर-संवैधानिक काम किया है। उन्होंने बताया कि पार्टी की ओर से विधान परिषद के सभापति को पहले ही याचिका दी जा चुकी है। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के प्रत्याशी अफाक अहमद और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी बी. मोहन भी एक-दो दिनों में अपनी याचिकाएँ दाखिल करेंगे।

किशोर ने कहा कि उन्हें विधान परिषद के सभापति पर भरोसा है और उम्मीद है कि वे संवैधानिक अवहेलना के मामले में न्याय करेंगे। यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो जन सुराज अदालत का दरवाज़ा भी खटखटाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विधान परिषद का मामला है और सभापति के निर्णय के बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तंज

किशोर ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के 'क्राइम और अपराध' संबंधी बयान पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हर पाँच-दस दिन में जनता को हँसने का अवसर दे देते हैं। उन्होंने कहा कि जब एक ऐसे व्यक्ति को नेता बनाया जाएगा जो 'अपराध' और 'क्राइम' में फर्क नहीं जानते, तो ऐसी ही अपेक्षा की जा सकती है।

किशोर ने जनता से अपील करते हुए कहा कि सम्राट चौधरी खुद मुख्यमंत्री नहीं बने, बल्कि बिहार के लोगों के वोटों ने उन्हें इस पद तक पहुँचाया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति को बुनियादी भाषाई भेद नहीं मालूम, उससे बच्चों की शिक्षा और रोज़गार के लिए बेहतर बिहार बनाने की उम्मीद कैसे रखी जा सकती है।

मधुबनी घटना पर जन सुराज का रुख

मधुबनी में हुई घटना पर किशोर ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला गलत दिखाई दे रहा है और जन सुराज पीड़ित परिवार के साथ मज़बूती से खड़ा है। घटना के बाद पार्टी की जिला इकाई ने धरना-प्रदर्शन कर प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बनाया था। पार्टी का राज्यस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुँचा है।

किशोर ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल की रिपोर्ट मिलने के बाद पार्टी आगे की कार्रवाई तय करेगी। अगले एक-दो दिनों में यह देखा जाएगा कि घटना में प्रशासन की क्या भूमिका रही और गोली चलाने वाले एएसआई के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज होता है या नहीं।

संगठन विस्तार और आगे की रणनीति

बैठक में प्रशांत किशोर ने संगठन को मज़बूत करने और पार्टी के विचारों को घर-घर तक पहुँचाने पर ज़ोर दिया। नवनियुक्त जिला और प्रखंड पदाधिकारियों के साथ संगठन के विस्तार तथा आगामी गतिविधियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों की तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संवैधानिक जवाबदेही की लड़ाई भी लड़ सकती है। लेकिन सभापति पर 'भरोसे' की बात और साथ में अदालत जाने की धमकी — यह दोनों एक साथ रखना यह भी बताता है कि पार्टी को खुद अपने दावे की मज़बूती पर पूरा यकीन नहीं है। सम्राट चौधरी पर व्यक्तिगत टिप्पणी जहाँ भीड़ को लुभाती है, वहीं यह मुख्यमंत्री के शासन पर गंभीर बहस से ध्यान भटकाने का जोखिम भी उठाती है। असली परीक्षा यह है कि क्या याचिका कानूनी रूप से टिकती है — या यह सिर्फ चुनावी वर्ष में पार्टी की दृश्यता बनाए रखने की कोशिश है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP में शामिल हुए दोनों MLC की सदस्यता क्यों जा सकती है?
प्रशांत किशोर के अनुसार, दोनों एमएलसी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित हुए थे और उनका किसी दल में शामिल होना गैर-संवैधानिक है। जन सुराज ने इस आधार पर विधान परिषद के सभापति को याचिका दी है।
जन सुराज ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
जन सुराज ने विधान परिषद के सभापति को याचिका दाखिल की है। पार्टी के प्रत्याशी अफाक अहमद (सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र) और बी. मोहन (तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र) भी एक-दो दिनों में अपनी याचिकाएँ दाखिल करेंगे। कार्रवाई न होने पर पार्टी ने अदालत जाने का विकल्प भी खुला रखा है।
प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की आलोचना क्यों की?
किशोर ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर व्यंग्य किया जिसमें उन्होंने 'क्राइम' और 'अपराध' को अलग-अलग बताया। किशोर ने कहा कि जो व्यक्ति इन दोनों शब्दों का अंतर नहीं जानते, उनसे शिक्षा और रोज़गार के क्षेत्र में बेहतर बिहार बनाने की उम्मीद करना कठिन है।
मधुबनी घटना पर जन सुराज का क्या रुख है?
प्रशांत किशोर ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला गलत दिखाई दे रहा है और जन सुराज पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है। पार्टी का राज्यस्तरीय प्रतिनिधिमंडल परिवार से मिला है और रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। ASI के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज होता है या नहीं, यह अगले एक-दो दिनों में स्पष्ट होगा।
जन सुराज बिहार में अपना संगठन कैसे मज़बूत कर रहा है?
बेगूसराय में हुई बैठक में नवनियुक्त जिला और प्रखंड पदाधिकारियों के साथ संगठन विस्तार और आगामी गतिविधियों पर चर्चा की गई। पार्टी का लक्ष्य अपने विचारों को घर-घर तक पहुँचाना और ज़मीनी स्तर पर संगठनात्मक ढाँचा खड़ा करना है।
राष्ट्र प्रेस
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