4 नवंबर 2026
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बिहार: राजद ने विधान परिषद सभापति को सौंपा ज्ञापन, वंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज की सदस्यता रद्द करने की मांग

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बिहार: राजद ने विधान परिषद सभापति को सौंपा ज्ञापन, वंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज की सदस्यता रद्द करने की मांग

सारांश

राजद ने निर्दलीय जीते दो बिहार MLC — वंशीधर ब्रजवासी और डॉ. राहुल राज — के BJP में शामिल होने को दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन बताते हुए उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की है। मामला अब सभापति के पाले में है।

मुख्य बातें

राजद ने 4 नवंबर 2026 को बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति रामवचन राय को ज्ञापन सौंपा।
वंशीधर ब्रजवासी (तिरहुत स्नातक क्षेत्र) और डॉ.
राहुल राज (सारण शिक्षक क्षेत्र) निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित हुए थे।
राजद का आरोप — दोनों ने चुनाव जीतने के बाद BJP की सदस्यता ग्रहण की, जो संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा 2(2) का उल्लंघन है।
ज्ञापन में अनुच्छेद 191(2) , 10वीं अनुसूची के पैरा 6(1) और बिहार विधान परिषद दल-बदल अयोग्यता नियम, 1994 का हवाला दिया गया।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राजद के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने किया।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति रामवचन राय को ज्ञापन सौंपकर नव-निर्वाचित सदस्यों वंशीधर ब्रजवासी और डॉ. राहुल राज की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि दोनों सदस्यों ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण कर ली, जो संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत दल-बदल विरोधी प्रावधानों का उल्लंघन है।

मुख्य घटनाक्रम

राजद के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी के नेतृत्व में पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने सभापति को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से वंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. राहुल राज स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित हुए थे, और उनके निर्वाचन संबंधी आधिकारिक अभिलेखों में उनकी स्थिति निर्दलीय दर्ज है। बाद में दोनों सदस्यों द्वारा BJP की सदस्यता ग्रहण किए जाने की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आई।

संवैधानिक आधार

राजद ने संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा 2(2) का हवाला दिया, जिसके अनुसार स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित कोई सदस्य यदि चुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण करता है, तो वह सदन का सदस्य बने रहने के लिए अयोग्य हो जाता है। ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 191(2) और 10वीं अनुसूची के पैरा 6(1) का भी उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही बिहार विधान परिषद सदस्य (दल-बदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 1994 और सर्वोच्च न्यायालय के एक संबंधित फैसले का भी संदर्भ दिया गया है।

साक्ष्य और मांगें

राजद ने अपने ज्ञापन के साथ दोनों सदस्यों के निर्वाचन संबंधी अभिलेख, BJP की सदस्यता ग्रहण करने के प्रमाण और संबंधित समाचार रिपोर्टें साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की हैं। पार्टी ने माँग की है कि अयोग्यता की कार्रवाई बिना किसी अनावश्यक विलंब के पूरी की जाए और याचिकाकर्ताओं को अंतिम निर्णय की लिखित जानकारी दी जाए।

लोकतांत्रिक सवाल

ज्ञापन में कहा गया है कि यह मामला केवल दो व्यक्तियों के राजनीतिक निर्णय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक जनादेश, संवैधानिक मर्यादा और दल-बदल विरोधी कानून की प्रभावशीलता से जुड़ा है। गौरतलब है कि अयोग्यता से संबंधित प्रश्न पर निर्णय लेने का अधिकार संबंधित सदन के सभापति को होता है। राजद ने सभापति से संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप निष्पक्ष निर्णय लेने का आग्रह किया है।

आगे क्या होगा

अब यह मामला बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति रामवचन राय के विवेकाधिकार में है। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सभापति दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर दे सकते हैं। यह देखना अहम होगा कि क्या सभापति दल-बदल विरोधी कानून के तहत दोनों के विरुद्ध औपचारिक कार्यवाही शुरू करते हैं या मामले को अन्यथा निपटाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस प्रावधान के तहत सभापतियों द्वारा समयबद्ध निर्णय न लेने की प्रवृत्ति राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज है। असली सवाल यह है कि क्या सभापति इस मामले में संवैधानिक समयसीमा का पालन करेंगे, या यह याचिका लंबित फाइलों में दब जाएगी — जो दल-बदल विरोधी कानून की सबसे बड़ी कमज़ोरी रही है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजद ने वंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज की सदस्यता रद्द करने की मांग क्यों की है?
राजद का आरोप है कि दोनों सदस्य निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में बिहार विधान परिषद के लिए निर्वाचित हुए, लेकिन बाद में उन्होंने BJP की सदस्यता ग्रहण कर ली। संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा 2(2) के अनुसार, यह दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन है और दोनों अयोग्यता के पात्र हो जाते हैं।
10वीं अनुसूची का पैरा 2(2) क्या कहता है?
संविधान की 10वीं अनुसूची का पैरा 2(2) स्पष्ट करता है कि यदि कोई सदस्य स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित होने के बाद किसी राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण करता है, तो वह सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य हो जाता है। यही प्रावधान राजद की याचिका का मुख्य आधार है।
इस मामले में निर्णय लेने का अधिकार किसके पास है?
संविधान के अनुच्छेद 191(2) और 10वीं अनुसूची के पैरा 6(1) के अनुसार, अयोग्यता से संबंधित प्रश्न पर निर्णय लेने का अधिकार संबंधित सदन के सभापति को है। इस मामले में बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति रामवचन राय को यह अधिकार प्राप्त है।
वंशीधर ब्रजवासी और डॉ. राहुल राज किन क्षेत्रों से निर्वाचित हुए हैं?
वंशीधर ब्रजवासी तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से और डॉ. राहुल राज सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में बिहार विधान परिषद के लिए निर्वाचित हुए थे।
राजद ने ज्ञापन में कौन-से साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं?
राजद ने दोनों सदस्यों के निर्वाचन संबंधी आधिकारिक अभिलेख, BJP की सदस्यता ग्रहण करने के प्रमाण और संबंधित समाचार रिपोर्टें साक्ष्य के रूप में सभापति को सौंपी हैं। पार्टी ने बिहार विधान परिषद सदस्य (दल-बदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 1994 और सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का भी हवाला दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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