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बिहार MLC चुनाव: निर्दलीय विजेताओं को BJP का समर्थन, JDU के आनंद पुष्कर ने गठबंधन धर्म पर उठाए सवाल

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बिहार MLC चुनाव: निर्दलीय विजेताओं को BJP का समर्थन, JDU के आनंद पुष्कर ने गठबंधन धर्म पर उठाए सवाल

सारांश

बिहार विधान परिषद चुनाव में एनडीए को हराने वाले दो निर्दलीय विजेताओं का BJP में शामिल होना गठबंधन के भीतर विवाद की आग भड़का गया है। JDU के पराजित प्रत्याशी ने BJP सांसदों पर गठबंधन धर्म तोड़ने का आरोप लगाया है और RJD ने इसे जनादेश से धोखा करार दिया है।

मुख्य बातें

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर हुए चुनाव में निर्दलीय राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी ने एनडीए समर्थित JDU उम्मीदवारों को हराया।
शनिवार को दोनों BJP कार्यालय की विधानमंडल दल बैठक में शामिल हुए; BJP प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने BJP पट्टा पहनाकर स्वागत किया।
JDU के पराजित प्रत्याशी आनंद पुष्कर ने सांसद राजीव प्रताप रूडी और राधा मोहन सिंह पर गठबंधन धर्म न निभाने का आरोप लगाया।
पुष्कर ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया था कि वर्तमान विधान पार्षद को मैदान से रोका जाएगा, परंतु वे निर्दलीय उतर गए।
RJD नेत्री रोहिणी आचार्य ने एक्स पर इसे 'जनादेश की पीठ में खंजर' बताया और इसे लोकतंत्र के साथ सौदा करार दिया।

बिहार विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय जीत दर्ज करने वाले राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का समर्थन मिलने के बाद पटना की सियासत गरमा गई है। एनडीए समर्थित जनता दल (यूनाइटेड) के पराजित प्रत्याशी आनंद पुष्कर ने BJP के कुछ नेताओं पर गठबंधन धर्म का पालन न करने का आरोप लगाया है, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेत्री रोहिणी आचार्य ने इस घटनाक्रम को जनादेश के साथ धोखा बताया है।

मुख्य घटनाक्रम

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर हुए हालिया चुनाव में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज ने एनडीए समर्थित JDU प्रत्याशी आनंद पुष्कर को पराजित किया। इसी तरह, तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी ने एनडीए समर्थित JDU उम्मीदवार अभिषेक झा को हराकर जीत दर्ज की।

शनिवार को दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षद BJP कार्यालय में आयोजित विधानमंडल दल की बैठक में शामिल हुए। बैठक से पूर्व BJP प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने दोनों का औपचारिक स्वागत किया और BJP का पट्टा पहनाकर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी उपस्थित रहे।

आनंद पुष्कर का गठबंधन धर्म पर आरोप

बैठक के बाद आनंद पुष्कर ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए BJP के कुछ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सांसद राजीव प्रताप रूडी और राधा मोहन सिंह की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अपने चुनाव में समर्थन लेने की बात आती है, तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया जाता है, लेकिन सहयोगी दल के प्रत्याशी के साथ खड़े होने की बारी आने पर गठबंधन धर्म की मर्यादा गायब हो जाती है।

पुष्कर ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान उन्हें लगातार यह आश्वासन दिया जाता रहा कि वर्तमान विधान पार्षद को चुनाव लड़ने से रोक लिया जाएगा, लेकिन अंततः वे निर्दलीय मैदान में उतर गए। उन्होंने कहा कि एनडीए की बैठक में शिक्षकों के बीच जाकर समर्थन जुटाने का निर्णय लिया गया था, परंतु BJP के कई सांसदों और विधायकों ने अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई।

पुष्कर ने अपने पिता केदारनाथ पांडेय के शिक्षक समाज के लिए किए गए योगदान का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि वे वर्षों से JDU के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं और आगे भी रहेंगे। उनके अनुसार, यह केवल उनके व्यक्तिगत चुनाव की नहीं, बल्कि गठबंधन में समर्पित कार्यकर्ताओं के सम्मान की बात है।

रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया

RJD अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की पुत्री और नेत्री रोहिणी आचार्य ने रविवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'जनादेश की पीठ में खंजर, स्वार्थ के लिए लोकतंत्र का सौदा।' उन्होंने तर्क दिया कि मतदाताओं ने इन उम्मीदवारों को निर्दलीय के रूप में चुनकर भेजा था, लेकिन जीत के बाद उनका किसी दल के साथ जाना जनादेश के साथ सीधा विश्वासघात है। आचार्य के अनुसार, इन नेताओं के लिए निजी और राजनीतिक स्वार्थ सर्वोपरि है।

एनडीए के भीतर समन्वय पर सवाल

गौरतलब है कि बिहार में BJP और JDU के बीच गठबंधन की जड़ें गहरी हैं, और दोनों दल नीतीश कुमार के नेतृत्व में केंद्र व राज्य दोनों स्तरों पर साझेदार हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अभी से शुरू हो रही हैं और गठबंधन की आंतरिक एकजुटता राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानी जाती है।

आलोचकों का कहना है कि इस प्रकरण ने एनडीए के भीतर आपसी समन्वय और गठबंधन धर्म को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में दोनों सहयोगी दलों के बीच इस मुद्दे पर आधिकारिक स्तर पर किस प्रकार की बातचीत होती है, यह बिहार की राजनीति की दिशा तय करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गहराई से देखें तो यह बिहार के एनडीए गठबंधन की आंतरिक दरारों का संकेत है। BJP का निर्दलीय विजेताओं को तत्काल समर्थन देना JDU के लिए केवल एक चुनावी झटका नहीं, बल्कि संगठनात्मक अपमान है — खासकर तब जब 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ शुरू हो रही हैं। जो बात मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चूक जाती है वह यह है कि ऐसे 'छोटे' प्रकरण ही गठबंधन में सीट-बंटवारे और टिकट वितरण के समय असली दरारें पैदा करते हैं। नीतीश कुमार की चुप्पी और BJP नेतृत्व की प्रतिक्रिया — या उसका अभाव — ही बताएगी कि यह नाराज़गी प्रबंधनीय शिकायत है या भविष्य के संकट की नींव।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार विधान परिषद चुनाव में क्या हुआ?
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर हुए चुनाव में सारण शिक्षक और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी ने एनडीए समर्थित JDU प्रत्याशियों को पराजित किया। इसके बाद दोनों विजेता BJP के विधानमंडल दल की बैठक में शामिल हुए और BJP ने उनका औपचारिक स्वागत किया।
आनंद पुष्कर ने BJP पर क्या आरोप लगाए हैं?
JDU के पराजित प्रत्याशी आनंद पुष्कर ने सांसद राजीव प्रताप रूडी और राधा मोहन सिंह पर गठबंधन धर्म का पालन न करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया था कि प्रतिद्वंद्वी को मैदान से रोका जाएगा और BJP सांसद-विधायक सक्रिय प्रचार करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
रोहिणी आचार्य ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
RJD नेत्री रोहिणी आचार्य ने रविवार को एक्स पर लिखा कि यह 'जनादेश की पीठ में खंजर' है और 'स्वार्थ के लिए लोकतंत्र का सौदा' है। उनका तर्क है कि मतदाताओं ने इन उम्मीदवारों को निर्दलीय के रूप में चुना था, इसलिए जीत के बाद किसी दल में शामिल होना मतदाताओं के जनादेश के साथ विश्वासघात है।
इस विवाद का बिहार के एनडीए गठबंधन पर क्या असर पड़ सकता है?
यह घटनाक्रम BJP और JDU के बीच आपसी समन्वय और विश्वास पर सवाल खड़े करता है, खासकर ऐसे समय में जब बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ शुरू हो रही हैं। यदि दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर आधिकारिक स्तर पर संवाद नहीं होता, तो भविष्य में सीट-बंटवारे और टिकट वितरण के समय यह तनाव और गहरा हो सकता है।
कौन हैं आनंद पुष्कर?
आनंद पुष्कर JDU के दीर्घकालिक समर्पित कार्यकर्ता हैं, जिन्हें सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए समर्थित प्रत्याशी के रूप में उतारा गया था। उनके पिता केदारनाथ पांडेय का शिक्षक समाज में महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है; पुष्कर ने इसी पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए अपनी उम्मीदवारी को उचित ठहराया था।
राष्ट्र प्रेस
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