तेजस्वी यादव की माँग: BJP में शामिल दो निर्दलीय एमएलसी की सदस्यता दलबदल कानून के तहत रद्द हो
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने 2 नवंबर 2026 को माँग की है कि हाल ही में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीते दो एमएलसी — बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज — की सदस्यता दलबदल विरोधी कानून के तहत तत्काल समाप्त की जाए, क्योंकि दोनों कथित तौर पर चुनाव जीतने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए हैं। इसी मुद्दे पर जन सुराज पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को बिहार विधान परिषद पहुँचा और सभापति अवधेश नारायण सिंह को दस्तावेजी साक्ष्य सहित एक औपचारिक याचिका सौंपी।
विवाद का मूल
बंशीधर ब्रजवासी तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से और राहुल राज सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में हाल ही में हुए बिहार विधान परिषद चुनाव में विजयी हुए। चुनाव जीतने के बाद दोनों ने कथित तौर पर BJP की सदस्यता ग्रहण कर ली। जन सुराज पार्टी के पूर्व एमएलसी प्रोफेसर रामबली सिंह चंद्रवंशी के अनुसार, दोनों एमएलसी चुनाव परिणाम आने के 72 घंटे के भीतर BJP कार्यालय पहुँचे, पार्टी की सदस्यता रसीदें प्राप्त कीं और BJP का अंगवस्त्र भी पहना।
चंद्रवंशी ने आरोप लगाया कि जब कानूनी कार्रवाई की संभावना उभरी, तो BJP प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने दोनों एमएलसी से संबंधित पोस्ट सोशल मीडिया से हटा दिए और बाद में दावा किया कि दोनों केवल पार्टी को समर्थन देने गए थे — न कि सदस्यता लेने।
तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया
तेजस्वी यादव ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, 'यह पूरी तरह स्पष्ट है कि कोई भी निर्दलीय एमएलसी चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं हो सकता। यदि वह ऐसा करता है तो उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है। दोनों सदस्यों की सदस्यता तुरंत रद्द की जानी चाहिए, अन्यथा संविधान को फाड़कर फेंक देने जैसा होगा।'
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के बीच तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। तेजस्वी यादव की यह माँग राज्य की राजनीतिक बहस को एक संवैधानिक प्रश्न की दिशा में ले जाती है।
जन सुराज पार्टी का हस्तक्षेप
जन सुराज पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने सभापति को सदस्यता रसीदों के नंबर सहित सभी दस्तावेजी साक्ष्य सौंपे और मामले में उचित कार्रवाई की माँग की। चंद्रवंशी ने कहा कि अब इस मामले को नज़रअंदाज़ करना संभव नहीं है। गौरतलब है कि चंद्रवंशी स्वयं लगभग तीन वर्ष पहले इसी विधान परिषद में दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किए जा चुके हैं।
उन्होंने 52वें संविधान संशोधन का हवाला देते हुए कहा, 'पार्टी के टिकट पर चुने गए सदस्यों के मामलों में कुछ व्याख्या की गुंजाइश हो सकती है, लेकिन निर्दलीय सदस्यों के मामले में कानून बिल्कुल स्पष्ट है। यदि कोई निर्दलीय सदस्य चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है तो उसकी सदस्यता तत्काल समाप्त की जा सकती है।'
संवैधानिक पहलू
इस विवाद ने विधायी निकायों में निर्दलीय निर्वाचित सदस्यों पर दलबदल विरोधी कानून के लागू होने को लेकर बहस तेज कर दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, 52वाँ संविधान संशोधन इस संदर्भ में अत्यंत स्पष्ट है — निर्दलीय जीतने के बाद यदि किसी दल में शामिल होते हैं तो वे अयोग्यता के लिए उत्तरदायी हो सकते हैं। बिहार को लोकतंत्र की जन्मभूमि माना जाता है, और ऐसे में इस मामले का नैतिक और कानूनी महत्व और भी बढ़ जाता है।
आगे क्या होगा
मामले में अंतिम फैसला बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह द्वारा संविधान के तहत लिया जाएगा। सभापति को सौंपे गए दस्तावेजों की जाँच के बाद निर्णय की प्रतीक्षा है। यह मामला न केवल बिहार बल्कि देशभर में निर्दलीय विधायकों और दलबदल कानून की सीमाओं को लेकर एक महत्त्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।