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तेजस्वी यादव का आरोप: भाजपा के दबाव में नीतीश कुमार ने एमएलसी पद से दिया इस्तीफा

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तेजस्वी यादव का आरोप: भाजपा के दबाव में नीतीश कुमार ने एमएलसी पद से दिया इस्तीफा

सारांश

तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भाजपा के दबाव में एमएलसी पद से इस्तीफा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह निर्णय स्वतंत्र नहीं था। क्या यह सच है?

मुख्य बातें

तेजस्वी यादव का आरोप राजनीतिक दबाव की ओर इशारा करता है।
नीतीश कुमार का एमएलसी पद से इस्तीफा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना है।
भाजपा की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
नीतीश कुमार का विधान परिषद से जुड़ाव समाप्त हो गया।
बिहार की राजनीति में नए मोड़ की संभावना है।

पटना, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस) राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने सोमवार को यह आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भाजपा के दबाव में एमएलसी पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह निर्णय स्वतंत्र रूप से नहीं लिया गया था।

तेजस्वी यादव ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि यह कदम आवश्यक था क्योंकि यह भाजपा का निर्णय था, नीतीश कुमार का नहीं। जदयू के भीतर भाजपा के कुछ एजेंटों ने इस पर दबाव डाला, जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई। हमने पहले ही कहा था कि भाजपा उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में नहीं रहने देगी, और अब वही हो रहा है।

उन्होंने सरकार पर प्रमुख वादों को लेकर जनता को गुमराह करने का भी आरोप लगाया।

तेजस्वी ने कहा कि उन्होंने बिजली के बिल बढ़ाकर नागरिकों को धोखा दिया है। बिहार में बिजली पहले से ही महंगी थी, और अब यह और भी महंगी हो जाएगी। उन्होंने हर महिला को 2 लाख रुपए देने का वादा किया था, लेकिन केवल 10,000 रुपए ही दिए। उन्होंने कहा था कि बाकी रकम चुनाव के बाद दी जाएगी, लेकिन अब वह वादा भी टूट रहा है।

इससे पहले, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी ने नीतीश कुमार समेत कई नेताओं को धोखा दिया है।

इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में पदभार ग्रहण करने से पहले संवैधानिक आवश्यकता को पूरा करते हुए विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और उसी दिन अपना चुनाव प्रमाण पत्र प्राप्त किया। अब वह 10 अप्रैल को औपचारिक रूप से शपथ ग्रहण करेंगे।

संविधान के प्रावधानों के अनुसार, संसद के लिए निर्वाचित व्यक्ति को 14 दिनों के भीतर अपने वर्तमान विधायी पद से इस्तीफा देना होता है, अन्यथा उनकी नई सदस्यता रद्द हो जाती है।

इसी आदेश का पालन करते हुए उन्होंने 30 मार्च को अपना इस्तीफा सौंप दिया। नीतीश कुमार की ओर से एमएलसी संजय गांधी ने इस्तीफा पत्र प्रस्तुत किया।

इस इस्तीफे के साथ ही नीतीश कुमार का बिहार विधान परिषद से लंबा जुड़ाव भी समाप्त हो गया।

वे पहली बार 2006 में सदस्य बने और लगातार चार कार्यकाल (2006-2012, 2012-2018, 2018-2024 और 2024 से आगे) तक सेवा देने के बाद पद से हट गए।

नवंबर 2005 में मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद से नीतीश कुमार ने विधानसभा चुनाव लड़ने के बजाय विधान परिषद की सदस्यता के माध्यम से लगातार अपना पद बरकरार रखा।

हालांकि, वे इससे पहले 1985 में हरनौत से विधायक चुने गए थे और लोकसभा में सदस्य के रूप में भी कार्य कर चुके हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल काफी हद तक राज्य विधानमंडल के ऊपरी सदन में ही केंद्रित रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो लोकतंत्र की नींव के लिए चिंताजनक है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर क्या आरोप लगाया?
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार को भाजपा के दबाव में एमएलसी पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया।
नीतीश कुमार ने कब इस्तीफा दिया?
नीतीश कुमार ने 30 मार्च को अपने एमएलसी पद से इस्तीफा दिया।
नीतीश कुमार का विधान परिषद से जुड़ाव कब समाप्त हुआ?
नीतीश कुमार का विधान परिषद से जुड़ाव 30 मार्च को समाप्त हुआ।
भाजपा पर तेजस्वी यादव ने क्या आरोप लगाया?
तेजस्वी यादव ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वे नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री नहीं रहने देंगे।
नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर कब शुरू हुआ?
नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर 1985 में हरनौत से विधायक चुने जाने के साथ शुरू हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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