दिल्ली के दबाव में सीएम पद छोड़ने को मजबूर नीतीश कुमार: तेजस्वी यादव
सारांश
Key Takeaways
- तेजस्वी यादव ने दिल्ली के दबाव में नीतीश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- बिहार की सरकार अब जनादेश से नहीं, बल्कि दिल्ली से चल रही है।
- कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य की स्थिति चिंताजनक है।
- भाजपा केवल कुर्सी बचाने में लगी है, बिहार की स्थिति को नजरअंदाज कर रही है।
पटना, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एनडीए पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इस प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री जनता के जनादेश से नहीं, बल्कि दिल्ली की मेहरबानी से बनेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार की सरकार अब जनता के जनादेश से नहीं, बल्कि दिल्ली से चलाई जाएगी।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान हमने कहा था कि उन्हें सत्ता में रहने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने प्रश्न उठाया कि भारी जनादेश के बावजूद सरकार क्यों बदल रही है? अगर यह नीतीश कुमार की अपनी इच्छा होती तो वे चुनाव से पहले ही बता देते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, बल्कि उन पर दबाव है।
तेजस्वी ने कहा कि बिहार में कानून-व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों, गरीबी, महंगाई और बेदखली की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। हजारों लोग अपने घरों से बेदखल होकर बिहार लौट रहे हैं। गैस संकट के कारण नौकरियां खतरे में हैं। बिहार सरकार ने इन लोगों की मदद के लिए कुछ नहीं किया और न ही इस मुद्दे पर कोई चर्चा की।
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि भाजपा सिर्फ कुर्सी बचाने में लगी है। ये लोग बिहार को बदनाम कर रहे हैं और इसे बर्बाद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पद के संबंध में तेजस्वी यादव ने कहा कि यदि सरकार बनती है तो सीएम कौन बनेगा? क्या लोगों का कोई जनादेश है? बिना जनादेश के यह कैसा लोकतंत्र है? हमारी सभी बातें सही साबित हो रही हैं और बिहार की सरकार दिल्ली से चल रही है।
नीतीश कुमार का जिक्र करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि कल पहली बार नीतीश कुमार बोलने आए थे, लेकिन संजय झा ने उन्हें हटा दिया और बोलने से रोक दिया। कभी कोई उनका हाथ खींचता है, कभी कुर्ता खींचता है। मुख्यमंत्री जब भाषण दे रहे होते हैं तो उनकी लाइन काट दी जाती है। कभी कोई पीछे से कंधा पकड़ लेता है। मुख्यमंत्री का कितना अपमान हो रहा है।