तेजस्वी यादव: नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का कोई इरादा नहीं, जबरन भेजा जा रहा है
सारांश
Key Takeaways
- नीतीश कुमार ने जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पुनः चुनाव जीते।
- तेजस्वी यादव का कहना है कि नीतीश कुमार की राज्यसभा जाने की इच्छा नहीं है।
- भाजपा जदयू को समाप्त करने की कोशिश कर रही है, यह आरोप तेजस्वी का है।
- सरकार की विफलता पर तेजस्वी ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
- जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया।
पटना, 24 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पुनः निर्वाचित होने की खबर दी है। इस बीच, विधानसभा में विपक्ष के नेता और राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री की राज्यसभा जाने की कोई इच्छा नहीं है; उन्हें जबरन वहां भेजा जा रहा है।
तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा जदयू को समाप्त करने की योजना बना रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं होती। उनके नाम पर जदयू में कुछ लोग निर्णय लेते हैं। इन व्यक्तियों ने भाजपा के साथ जदयू को समाप्त करने का समझौता किया है, और वे इसी दिशा में कार्यरत हैं।
तेजस्वी यादव ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर भी चर्चा की और कहा कि सरकार पहले से ही अलर्ट नहीं थी। यदि सरकार समय पर सतर्क होती, तो स्थिति ठीक रहती। उन्होंने कहा कि जब से यह सरकार आई है, तब से आम जनता और गरीबों को बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नोटबंदी, कोरोना महामारी, और वर्तमान में गैस की किल्लत के दौरान लोगों को बहुत कठिनाइयां झेलनी पड़ी हैं। इसका मतलब है कि सरकार पूरी तरह से असफल हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्राथमिक उद्देश्य जनता को सुख और सुविधा प्रदान करना है। यदि इसमें कोई कमी है, तो इसका मतलब है कि सरकार ने अपने हाथ खड़े कर लिए हैं। इसका संकेत है कि सरकार विफल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि देश में यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है। नोटबंदी के दौरान भी कोई लाभ नहीं हुआ। कोरोना के समय भी सरकार ने कोई उचित व्यवस्था नहीं की थी। लोग पैदल अपने प्रदेश लौटे, लेकिन क्या सरकार ने कभी अपनी गलती मानी? वास्तव में, सरकार कोई ठोस निर्णय लेने में असमर्थ है।