बिहार एमएलसी चुनाव: तेजस्वी यादव का आरोप — प्रशासन सत्ता पक्ष के इशारे पर, एनडीए की हार तय
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने 23 अक्टूबर 2026 को, बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर जारी मतदान के दौरान, सत्ता पक्ष और राज्य प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन खुलेआम सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवारों के पक्ष में काम कर रहा है और चुनाव में 'धनतंत्र, मशीन तंत्र तथा प्रशासनिक तंत्र' का दुरुपयोग हो रहा है। तेजस्वी ने दावा किया कि इन सभी 'साजिशों' के बावजूद इस बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को करारी हार का सामना करना पड़ेगा।
प्रत्याशी को परेशान करने का आरोप
तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि गुरुवार रात उनके प्रत्याशी संजीव कुमार को पुलिस भेजकर परेशान किया गया। उनके अनुसार, रात के समय STF (विशेष कार्यबल) की एक टीम तक संजीव कुमार के घर पहुँची। तेजस्वी ने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम के गवाह मौजूद हैं। हालाँकि, इन आरोपों की प्रशासन की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है।
फर्जी मतदान का दावा
राजद नेता ने फुलवारी शरीफ का विशेष उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वहाँ जबरन फर्जी मतदान कराने की सूचना मिली है। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने हंगामा किया और कुछ युवकों को हिरासत में लिया गया। यह आरोप भी प्रशासन द्वारा असत्यापित है।
सरकार पर तीखा हमला
तेजस्वी ने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने सत्ता पक्ष को 'वोट चोर' करार दिया और कहा, 'ये लोग वोट चोरी कराते हैं, फर्जी वोटर बनाते हैं और फर्जी वोटिंग कराते हैं। लेकिन इस बार इनकी दाल गलने वाली नहीं है। हम लोग सभी की सभी सीटें जीत रहे हैं।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई जगहों पर मतदान की गति जान-बूझकर धीमी कराई जा रही है।
राजद की निगरानी का दावा
तेजस्वी यादव ने कहा कि उनकी पार्टी हर स्तर पर चुनाव प्रक्रिया की निगरानी कर रही है और विभिन्न क्षेत्रों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। गौरतलब है कि बिहार विधान परिषद के ये चुनाव स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों द्वारा किए जाते हैं, जिससे सत्ता के प्रभाव की शिकायतें आम चुनावों से अलग किस्म की होती हैं। तेजस्वी के ये आरोप ऐसे समय में आए हैं जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ भी पृष्ठभूमि में चल रही हैं, जिससे इस उपचुनाव को दोनों पक्षों के लिए राजनीतिक प्रतिष्ठा का मसला माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा कि तेजस्वी के दावे किस हद तक सही साबित होते हैं। यदि राजद गठबंधन बेहतर प्रदर्शन करता है, तो इसे एनडीए के लिए एक राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जाएगा। फिलहाल, दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर बिहार की चुनावी राजनीति की परिचित तस्वीर पेश करता है।