2 नवंबर 2026
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पश्चिम बंगाल के 25 सरकारी विभागों में ई-टेंडरिंग अनिवार्य, 3 नवंबर से लागू होगी नई डिजिटल व्यवस्था

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पश्चिम बंगाल के 25 सरकारी विभागों में ई-टेंडरिंग अनिवार्य, 3 नवंबर से लागू होगी नई डिजिटल व्यवस्था

सारांश

पश्चिम बंगाल ने एक साथ 25 सरकारी विभागों में ई-टेंडरिंग अनिवार्य कर दी है — दिसंबर 2025 के ट्रायल और अगस्त 2026 के चरणबद्ध विस्तार के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल खरीद सुधार है। 3 नवंबर से सभी संबंधित विभागों के टेंडर नए पोर्टल के ज़रिए ही जारी होंगे।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार ने 2 नवंबर 2026 को 25 राज्य सरकारी विभागों में ई-टेंडरिंग अनिवार्य करने की घोषणा की।
नई व्यवस्था 3 नवंबर 2026 से प्रभावी होगी; सभी नए टेंडर केवल नए पोर्टल के माध्यम से जारी होंगे।
अधिसूचना पर राज्य वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पी.के.
मिश्रा के हस्ताक्षर हैं।
पोर्टल पहले दिसंबर 2025 में ट्रायल के तौर पर शुरू हुआ था; 12 अगस्त 2026 को PWD सहित कुछ विभागों में विस्तारित किया गया।
शामिल विभागों में स्कूली शिक्षा , उद्योग एवं वाणिज्य , महिला एवं बाल कल्याण , आपदा प्रबंधन और आवास आदि प्रमुख हैं।

पश्चिम बंगाल सरकार ने 2 नवंबर 2026 को 25 राज्य सरकारी विभागों में ई-टेंडरिंग को अनिवार्य करने की आधिकारिक घोषणा की, जो 3 नवंबर 2026 से प्रभावी होगी। राज्य वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य सरकारी परियोजनाओं को समय पर और पारदर्शी तरीके से पूरा करना है। नए ई-टेंडर पोर्टल के माध्यम से संबंधित विभागों और उनके अधीनस्थ कार्यालयों को अब से सभी टेंडर केवल इसी मंच पर जारी करने होंगे।

नई व्यवस्था का पृष्ठभूमि और विकास

यह पोर्टल पहली बार दिसंबर 2025 में राज्य वित्त विभाग के एक विशेष ज्ञापन के ज़रिए ट्रायल आधार पर शुरू किया गया था। इसके बाद 12 अगस्त 2026 को लोक निर्माण विभाग (PWD) सहित कुछ विशेष विभागों के अनुरोध पर इसका दायरा चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया। अब एक साथ 25 विभागों में इसे पूर्णतः लागू किए जाने का निर्णय लिया गया है — जो अब तक का सबसे बड़ा विस्तार है।

किन विभागों में लागू होगी व्यवस्था

जिन 25 विभागों में ई-टेंडरिंग अनिवार्य की गई है, उनमें कृषि एवं कृषि विपणन, पशुपालन विकास, सहकारिता, पिछड़ा वर्ग कल्याण, उपभोक्ता संरक्षण, आपदा प्रबंधन, स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, खाद्य एवं आपूर्ति, सूचना एवं सांस्कृतिक कार्य, सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन, अग्निशमन सेवा, गृह एवं पर्वतीय कार्य, उद्योग एवं वाणिज्य, श्रम, मत्स्य पालन, खाद्य प्रसंस्करण, बागवानी, आवास, कारागार प्रशासन, न्याय और महिला एवं बाल कल्याण विभाग शामिल हैं। इन सभी के अधीनस्थ कार्यालयों पर भी यह नियम समान रूप से लागू होगा।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया और निर्देश

राज्य वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पी.के. मिश्रा द्वारा हस्ताक्षरित अधिसूचना में कहा गया है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य 'विभिन्न योजनाओं को समय पर और प्रभावी ढंग से लागू करना' और टेंडरिंग प्रक्रिया में 'पारदर्शिता सुनिश्चित करना' है। वित्त विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पुराने पोर्टल की सभी ज़रूरी जानकारी तेज़ी से नए सिस्टम में स्थानांतरित की जा रही है। संबंधित विभागों को 3 नवंबर से नए नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश जारी किया गया है।

आम जनता और ठेकेदारों पर असर

डिजिटल टेंडरिंग से प्रक्रिया में देरी कम होने की उम्मीद है, जिससे सार्वजनिक परियोजनाओं की गति तेज़ हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सरकारी ठेकों में पारदर्शिता की माँग लंबे समय से उठाई जाती रही है। गौरतलब है कि ऑनलाइन टेंडरिंग से छोटे और मध्यम ठेकेदारों को भी समान अवसर मिलने की संभावना बढ़ जाती है, जो पहले प्रशासनिक बाधाओं के कारण प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते थे।

आगे की राह

वित्त विभाग के अनुसार, यह चरणबद्ध विस्तार भविष्य में और अधिक विभागों को इस डिजिटल ढाँचे में समाहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नए पोर्टल के पूर्ण संचालन के बाद सरकारी खरीद प्रक्रिया में दक्षता और जवाबदेही दोनों में सुधार आने की अपेक्षा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — क्योंकि राज्य में सरकारी ठेकों पर विवाद और देरी की शिकायतें पोर्टल बदलने से नहीं, प्रक्रिया की निगरानी से सुलझती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष ने बार-बार राज्य खरीद में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं; डिजिटल ऑडिट ट्रेल उन आरोपों को परखने का एक उपकरण बन सकता है। गौरतलब यह भी है कि 25 विभागों में एक साथ लागू करना महत्वाकांक्षी है — यदि डेटा माइग्रेशन अधूरा रहा या अधीनस्थ कार्यालयों में तकनीकी क्षमता की कमी रही, तो पारदर्शिता का वादा उलटा पड़ सकता है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में ई-टेंडरिंग कब से अनिवार्य होगी?
3 नवंबर 2026 से पश्चिम बंगाल के 25 सरकारी विभागों में ई-टेंडरिंग अनिवार्य हो जाएगी। राज्य वित्त विभाग ने 2 नवंबर 2026 को इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी की।
किन 25 विभागों में ई-टेंडरिंग लागू की गई है?
इनमें कृषि, पशुपालन, सहकारिता, पिछड़ा वर्ग कल्याण, उपभोक्ता संरक्षण, आपदा प्रबंधन, स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, खाद्य एवं आपूर्ति, सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन, उद्योग एवं वाणिज्य, श्रम, मत्स्य पालन, आवास, न्याय और महिला एवं बाल कल्याण विभाग आदि शामिल हैं। सभी विभागों के अधीनस्थ कार्यालयों पर भी यह नियम लागू होगा।
यह नया ई-टेंडर पोर्टल पहले कब शुरू हुआ था?
पोर्टल को दिसंबर 2025 में राज्य वित्त विभाग के विशेष ज्ञापन के ज़रिए ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया था। इसके बाद 12 अगस्त 2026 को PWD सहित कुछ विभागों के अनुरोध पर इसका दायरा बढ़ाया गया।
ई-टेंडरिंग से क्या फायदा होगा?
अधिसूचना के अनुसार, इससे सरकारी परियोजनाओं को समय पर और प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा और टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। एक साझा डिजिटल बुनियादी ढाँचे से देरी में कमी आने की भी उम्मीद जताई गई है।
पुराने पोर्टल का डेटा नए सिस्टम में कैसे जाएगा?
वित्त विभाग के अधिकारी के अनुसार, पुराने पोर्टल की सभी ज़रूरी जानकारी तेज़ी से नए सिस्टम में स्थानांतरित की जा रही है। संबंधित विभागों को 3 नवंबर से नए नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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