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पश्चिम बंगाल में कॉन्ट्रैक्ट विस्तार पर रोक: अनुबंध समाप्ति से 3 महीने पहले नया टेंडर अनिवार्य

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पश्चिम बंगाल में कॉन्ट्रैक्ट विस्तार पर रोक: अनुबंध समाप्ति से 3 महीने पहले नया टेंडर अनिवार्य

सारांश

पश्चिम बंगाल सरकार ने एक ही एजेंसी के कॉन्ट्रैक्ट को बार-बार बढ़ाने की प्रवृत्ति पर पूर्ण रोक लगा दी है। मुख्य सचिव के सर्कुलर के तहत अब अनुबंध समाप्ति से 3 महीने पहले नया टेंडर अनिवार्य है — उल्लंघन पर अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने 15 जुलाई 2025 को सर्कुलर जारी कर कॉन्ट्रैक्ट विस्तार पर रोक लगाई।
मौजूदा अनुबंध समाप्ति से कम से कम 3 महीने पहले नई टेंडर प्रक्रिया शुरू करना अनिवार्य।
सभी विभागाध्यक्ष अनुबंधों की मासिक समीक्षा करेंगे और सूची वित्त विभाग से साझा करेंगे।
कॉन्ट्रैक्ट विस्तार या नवीनीकरण के प्रस्ताव किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं होंगे।
नियम स्थानीय निकायों, PSU और वैधानिक निकायों पर भी समान रूप से लागू।
उल्लंघन को गंभीर वित्तीय अनियमितता माना जाएगा; जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।

पश्चिम बंगाल सरकार ने 15 जुलाई 2025 को सरकारी खरीद प्रणाली में बड़ा सुधार करते हुए एक ही एजेंसी के कॉन्ट्रैक्ट को बार-बार बढ़ाने की प्रवृत्ति पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। नबान्ना (राज्य सचिवालय) से जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब किसी भी सरकारी विभाग को मौजूदा अनुबंध की समाप्ति से कम से कम तीन महीने पहले नई एजेंसी के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया अनिवार्य रूप से शुरू करनी होगी। यह आदेश राज्य के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल द्वारा जारी सर्कुलर के माध्यम से लागू किया गया है।

क्यों उठाया गया यह कदम

मुख्य सचिव के सर्कुलर में स्वीकार किया गया है कि अनेक सरकारी विभाग और उनके अधीनस्थ कार्यालय समय पर नए टेंडर जारी करने के बजाय वित्त विभाग से मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट की अवधि बढ़ाने की अनुमति माँगते रहे हैं। गंभीर बात यह है कि कुछ मामलों में वित्त विभाग की सहमति लिए बिना ही कॉन्ट्रैक्ट की अवधि बढ़ा दी गई। सरकार का मत है कि यह व्यवस्था वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन करती है और प्रतिस्पर्धी टेंडर प्रणाली की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता को कमज़ोर करती है।

नए दिशा-निर्देश: मुख्य प्रावधान

नए आदेश के तहत सभी प्रोक्योरिंग अथॉरिटी को मौजूदा अनुबंध समाप्त होने से कम से कम तीन महीने पहले नई एजेंसी के चयन की टेंडर प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इसके अतिरिक्त सभी विभागाध्यक्ष अपने विभाग के सभी मौजूदा अनुबंधों की मासिक समीक्षा करेंगे और उनकी सूची वित्त विभाग के साथ नियमित रूप से साझा करेंगे। सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी परिस्थिति में कॉन्ट्रैक्ट के विस्तार या नवीनीकरण के प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई

यदि समय पर टेंडर जारी नहीं किया गया या बिना अनुमति के किसी कॉन्ट्रैक्ट की अवधि बढ़ाई गई, तो इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता माना जाएगा। जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सभी विभागाध्यक्ष और अधीनस्थ कार्यालयों के प्रमुखों को इन निर्देशों के अनुपालन के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी बनाया गया है।

व्यापक दायरा: किन संस्थाओं पर लागू होगा

यह आदेश केवल राज्य सरकार के विभागों तक सीमित नहीं है। इसे स्थानीय निकायों, राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों (PSU), वैधानिक निकायों और अन्य सरकारी संस्थाओं पर भी समान रूप से लागू किया जाएगा। यह व्यापक दायरा सुनिश्चित करता है कि सुधार का लाभ पूरी सरकारी खरीद प्रणाली को मिले। गौरतलब है कि सरकारी अनुबंधों में पारदर्शिता की माँग लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर उठती रही है और यह कदम उसी दिशा में एक ठोस प्रशासनिक हस्तक्षेप माना जा रहा है।

आगे क्या होगा

नए निर्देशों के लागू होने के बाद राज्य की खरीद प्रणाली में प्रतिस्पर्धा बढ़ने और एकाधिकारी अनुबंध व्यवस्था टूटने की उम्मीद है। मासिक समीक्षा तंत्र से वित्त विभाग को सभी चल रहे अनुबंधों की वास्तविक समय में निगरानी का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे सख्ती से लागू किया गया, तो यह राज्य की खरीद प्रक्रिया में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी अनुपालन की होगी — न कि घोषणा की। राज्य में सरकारी खरीद में एकाधिकारी अनुबंधों की शिकायतें पुरानी हैं, और वित्त विभाग की अनदेखी कर कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने की स्वीकृति खुद सरकार ने दी है — यह तथ्य सर्कुलर में अंतर्निहित है। मासिक समीक्षा और व्यक्तिगत जवाबदेही के प्रावधान मज़बूत हैं, परंतु बिना स्वतंत्र ऑडिट तंत्र के ये कागज़ी अनुशासन बन सकते हैं। यह भी देखना होगा कि PSU और स्थानीय निकायों में, जहाँ प्रशासनिक क्षमता कमज़ोर है, यह नियम ज़मीन पर कितना उतरता है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल के नए टेंडर नियम क्या हैं?
नबान्ना से जारी सर्कुलर के तहत अब किसी भी सरकारी विभाग को मौजूदा अनुबंध समाप्त होने से कम से कम 3 महीने पहले नई एजेंसी के चयन की टेंडर प्रक्रिया शुरू करनी होगी। कॉन्ट्रैक्ट विस्तार या नवीनीकरण के प्रस्ताव किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
यह सर्कुलर किन संस्थाओं पर लागू होगा?
यह आदेश राज्य सरकार के विभागों के अलावा स्थानीय निकायों, राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों (PSU), वैधानिक निकायों और अन्य सरकारी संस्थाओं पर भी समान रूप से लागू होगा। इस प्रकार पश्चिम बंगाल की पूरी सरकारी खरीद प्रणाली इसके दायरे में आती है।
नियम का उल्लंघन करने पर क्या होगा?
यदि समय पर टेंडर जारी नहीं किया गया या बिना अनुमति के कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाया गया, तो इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता माना जाएगा। जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और विभागाध्यक्षों को व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराया जाएगा।
पहले क्या व्यवस्था थी और उसमें क्या खामी थी?
पहले कई विभाग नए टेंडर जारी करने के बजाय वित्त विभाग से मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट की अवधि बढ़ाने की अनुमति माँगते थे। कुछ मामलों में तो वित्त विभाग की सहमति लिए बिना ही कॉन्ट्रैक्ट बढ़ा दिए गए, जिससे प्रतिस्पर्धी टेंडर प्रणाली की पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन प्रभावित होता था।
विभागाध्यक्षों की नई ज़िम्मेदारियाँ क्या हैं?
सभी विभागाध्यक्षों को अपने विभाग के सभी मौजूदा अनुबंधों की मासिक समीक्षा करनी होगी और उनकी सूची वित्त विभाग के साथ नियमित रूप से साझा करनी होगी। वे अपने अधिकार क्षेत्र में इन निर्देशों का सख्त पालन सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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