क्या निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर के लिए सुप्रीम कोर्ट आदेश का सख्त अनुपालन सुनिश्चित किया?

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क्या निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर के लिए सुप्रीम कोर्ट आदेश का सख्त अनुपालन सुनिश्चित किया?

सारांश

पश्चिम बंगाल में निर्वाचन आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं, जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए हैं। जानें इस आदेश के पीछे की वजह और इसकी महत्ता।

Key Takeaways

  • निर्वाचन आयोग ने एसआईआर के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
  • सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
  • सुनवाई की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।

कोलकाता, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) की प्रक्रिया के लिए सर्वोच्च न्यायालय के 19 जनवरी 2026 के आदेश का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु राज्य सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है।

यह आदेश रिट याचिका (सिविल) संख्या 1089/2025 (मोस्टारी बानू बनाम निर्वाचन आयोग) में पारित हुआ था, जिसमें कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता, सुविधा और लोगों पर अनावश्यक तनाव न डालने पर जोर दिया था। आदेश में आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि एसआईआर से संबंधित दस्तावेज संग्रह, आपत्तियां और सुनवाई ग्राम पंचायत भवनों, प्रत्येक तालुका (उप-मंडल) में सार्वजनिक स्थानों, ब्लॉक कार्यालयों और शहरी क्षेत्रों में वार्ड कार्यालयों में होगी।

राज्य सरकार को निर्देश है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को पंचायत भवनों, ब्लॉक कार्यालयों और अन्य सुनवाई स्थलों पर पर्याप्त जनशक्ति उपलब्ध कराए, ताकि 1.25-1.36 करोड़ लोगों (लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी श्रेणी में) की आपत्तियों और दस्तावेजों का सुचारू निपटारा हो सके। प्रत्येक जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को भी निर्देश हैं कि वे पर्याप्त कर्मचारी और सुरक्षा बल तैनात करें, जिससे एसआईआर की कार्यवाही बिना किसी बाधा के चले।

पुलिस महानिदेशक, कोलकाता पुलिस आयुक्त और प्रत्येक जिले के पुलिस अधीक्षक को सख्त हिदायत दी गई है कि सुनवाई स्थलों पर कोई कानून-व्यवस्था की समस्या न हो और एसआईआर गतिविधियां शांतिपूर्ण ढंग से संचालित हों। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि कोई अधिकारी या विभाग निर्देशों का पालन नहीं करता या चूक के कारण बाधा उत्पन्न होती है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर में लोगों पर पड़ रहे 'तनाव और दबाव' पर चिंता जताई थी, क्योंकि राज्य की लगभग 20 प्रतिशत आबादी (1.36 करोड़ लोग) को 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' के नोटिस मिले थे। कोर्ट ने पारदर्शिता के लिए नामों को सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करने, अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से दस्तावेज जमा करने की अनुमति और क्लास 10 एडमिट कार्ड को वैध प्रमाण मानने जैसे निर्देश दिए थे।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर 2026 विधानसभा चुनाव (अप्रैल-मई संभावित) से पहले मतदाता सूची को शुद्ध करने का अभियान है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि निर्वाचन आयोग का यह कदम लोकतंत्र की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण है। लोगों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, यह आवश्यक है कि सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी और निष्पक्ष हों।
NationPress
21/01/2026

Frequently Asked Questions

एसआईआर प्रक्रिया का क्या महत्व है?
एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना है, जो आगामी विधानसभा चुनावों के लिए आवश्यक है।
निर्वाचन आयोग ने किन निर्देशों का पालन करने के लिए कहा है?
निर्वाचन आयोग ने एसआईआर से संबंधित दस्तावेज संग्रह और सुनवाई के लिए ग्राम पंचायत भवनों एवं सार्वजनिक स्थलों का उपयोग करने का निर्देश दिया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने क्या चिंता जताई है?
सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर में लोगों पर पड़ रहे तनाव और दबाव की चिंता जताई है।
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