पूजा गहलोत: पिता के विरोध को पार कर कुश्ती में बनाई पहचान
सारांश
Key Takeaways
- पूजा गहलोत ने अपने संघर्ष और मेहनत से कुश्ती में पहचान बनाई।
- पिता के विरोध के बावजूद, उन्होंने अपने सपनों का पीछा किया।
- उन्होंने एशियन जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
- पदक जीतने के बावजूद, उन्होंने अपने प्रदर्शन पर आत्म-विश्लेषण किया।
- पूजा गहलोत आज युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
नई दिल्ली, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कई खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भारत की प्रतिभाशाली महिला पहलवान पूजा गहलोत ने कुश्ती के क्षेत्र में कदम रखने से पहले कई कठिनाइयों का सामना किया। आर्थिक संकट के अलावा, पूजा के पिता उनकी कुश्ती में रुचि को लेकर चिंतित थे। लेकिन पूजा की अदम्य इच्छाशक्ति के आगे एक दिन उनके पिता भी झुक गए।
पूजा गहलोत का जन्म दिल्ली के लांपुर गांव में हुआ। बचपन से ही उन्हें खेलों में विशेष रुचि थी, और कुश्ती उनके दिल के बेहद करीब थी। उस समय लड़कियों के लिए कुश्ती खेलना आम बात नहीं थी, और खुद उनके पिता भी चाहते थे कि वह इस खेल में करियर न बनाएं। लेकिन उनके चाचा, धर्मवीर सिंह, ने पूजा की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें महज 6 साल की उम्र में अखाड़े लेकर गए।
पिता की सख्ती के कारण पूजा ने पहले वॉलीबॉल खेलना शुरू किया, लेकिन इसके बाद उन्होंने कुश्ती को चुन लिया। चाचा धर्मवीर ने उन्हें कुश्ती की बारीकियों में पारंगत किया और इसके बाद पूजा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने 2017 में एशियन जूनियर चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता।
पूजा गहलोत ने पहली बार 2019 में सुर्खियों में कदम रखा जब उन्होंने अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। इस चैंपियनशिप से पहले, उन्हें कंधे की चोट के कारण दो साल तक कुश्ती से दूर रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी की।
2022 में कॉमनवेल्थ गेम्स में पूजा ने 50 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता। हालांकि, पदक जीतने के बाद भी उन्होंने भावुक होकर कहा कि वह देश के लिए स्वर्ण पदक नहीं जीत सकीं। उनके प्रदर्शन की सराहना खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी, जिन्होंने उनका हौसला बढ़ाया।
पूजा की सफलता का राज उनका संघर्ष, अनुशासन और दृढ़ संकल्प है। उन्होंने समाज की सोच, आर्थिक कठिनाइयों और संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियों को पार करते हुए अपनी पहचान बनाई है। आज वह देश की युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं और यह संदेश देती हैं कि मेहनत और आत्मविश्वास से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।