पश्चिम बंगाल चुनाव: सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में धर्मेंद्र प्रधान का ममता सरकार पर हमला
सारांश
Key Takeaways
- सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया गया।
- धर्मेंद्र प्रधान ने ममता सरकार पर तीखा हमला किया।
- राज्य की प्रशासनिक विफलता का संकेत।
- सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई की।
- एनआईए से मामले की जांच कराने का निर्देश।
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक में सात न्यायिक अधिकारियों के बंधक बनाए जाने की घटना पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ममता सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि यह घटना ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के शासन में सिस्टम के पूर्णतः विफल होने का संकेत है।
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि मालदा की यह घटना कोई अद्वितीय मामला नहीं है, बल्कि यह ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के शासन में सिस्टम के ढहने का संकेत है। सात न्यायिक अधिकारियों को नौ घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाया गया, जिसमें उन्हें खाना और पानी भी नहीं दिया गया। यह राज्य की प्रशासनिक विफलता का स्पष्ट प्रमाण है। मालदा-मुर्शिदाबाद क्षेत्र में हुई हिंसा, हिंदू परिवारों का पलायन और हरगोबिंदो व चंदन दास की निर्मम हत्या ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है।
उन्होंने कहा कि यह सब राज्य में कार्यरत प्रशासनिक मशीनरी के तहत हुआ है। जवाबदेही नितांत आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट के सामने इस घटना को राजनीतिक बताकर कमतर दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ ही घंटों बाद इसमें राजनीति घुस गई। यह एक स्पष्ट विरोधाभास है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी के गुंडों द्वारा फैलाए गए डर की राजनीति अब अपने अंत के करीब है।
इसी बीच, इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने की और चुनाव आयोग को इस घटना की जांच स्वतंत्र एजेंसी द्वारा कराने का निर्देश दिया। चुनाव आयोग ने जांच के लिए एनआईए को पत्र लिखा है। उम्मीद है कि एनआईए की टीम शुक्रवार को मालदा पहुंचकर मामले की जांच करेगी।
यह घटना बुधवार को मालदा जिले के कालियाचक की है, जहां सात न्यायिक अधिकारियों को एक ब्लॉक कार्यालय में बंधक बना लिया गया था, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं। आरोप है कि अधिकारियों को बंधक बनाने में वे लोग शामिल थे, जिनके नाम 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' के तहत चुनावी सूची से हटा दिए गए थे।