पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को जनता कह रही है अलविदा: योगेंद्र चंदोलिया
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम बंगाल चुनाव: ममता बनर्जी का निरंकुश शासन जनता के लिए अस्वीकार्य।
- चुनाव आयोग: शांतिपूर्ण चुनाव कराने के प्रयास में।
- नक्सलवाद: केंद्र सरकार की योजना से नक्सलवाद में कमी।
- राजनीतिक गतिविधियाँ: भाजपा का विरोध और जनता का रुख।
नई दिल्ली, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने पश्चिम बंगाल चुनाव के संदर्भ में राष्ट्र प्रेस से बताया कि चुनाव आयोग शांतिपूर्ण तरीके से पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोजित करने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा कि 76 वर्षों बाद भी यदि कोई सरकार इतनी निरंकुश हो जाए कि राजनीतिक दलों को और आम जनता को घुटने टेकने पर मजबूर करे, तो यह एक गंभीर समस्या है। जनता अपने पसंद के नेता को चुनेगी। परंतु जिस तरह ममता बनर्जी अहिंसा का सहारा लेकर गुंडागर्दी पर उतारू हैं, यह दर्शाता है कि वह किसी भी कीमत पर सत्ता में वापस आना चाहती हैं।
उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन कभी भी चुनाव में जीत नहीं दिला सकता, क्योंकि जब प्रशासन निरंकुश होता है, तब जनता का रोष बढ़ता है। वहां की स्थिति को देखते हुए, ऐसा लगता है कि जनता ममता बनर्जी को टाटा-बाय-बाय कहने वाली है और भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है। हमारे प्रतिनिधि मंडल ने उनकी गतिविधियों के बारे में चुनाव आयोग को सूचित किया है। हमारे नेता समय-समय पर चुनाव आयोग को अपनी बातें बताएंगे।
नालंदा मंदिर में हुए भगदड़ पर उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल पर किसी की मृत्यु बेहद दुखद है। प्रशासन को सतर्क रहना चाहिए और दर्शनार्थियों को भी अपनी जान की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। इस दुखद घटना पर मैं शोक व्यक्त करता हूँ।
देहरादून में हुई हत्या पर उन्होंने कहा कि हत्या किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। ब्रिगेडियर की हत्या के कारणों का पता जांच में लगेगा। लेकिन विपक्ष हमेशा कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति रखता है। कोई भी सरकार कानून व्यवस्था में चूक नहीं करती; वह कार्य करती है।
नक्सलवाद पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी नक्सलवाद किस तरह से फल-फूल रहा था? कई राज्य नक्सलवाद से प्रभावित थे। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने मिलकर तय किया है कि नक्सलवाद को समाप्त किया जाएगा। आज नक्सलवाद काफी कम हो चुका है। कांग्रेस ने पिछली सरकारों में नक्सलवाद को बढ़ावा दिया है। यह उनकी पुरानी नीति है: फूट डालो और राज करो। सरकार की कोशिश है कि बातचीत के माध्यम से नक्सलियों को मुख्य धारा में वापस लाया जाए।