शिवसेना प्रवक्ता ने 'लाड़की बहना योजना' के खिलाफ विपक्ष के आरोपों को बताया निराधार
सारांश
Key Takeaways
- लाड़की बहना योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना है।
- सरकार ने लगभग 26,000 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है।
- केवाईसी रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल है।
- ईंधन आपूर्ति में कोई कमी नहीं आएगी।
- राजनीतिक बयानबाजी में जन कल्याण योजनाओं की प्रासंगिकता महत्वपूर्ण है।
मुंबई, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना प्रवक्ता कृष्ण हेगड़े ने शनिवार को महाराष्ट्र सरकार की महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना 'लाड़की बहना योजना' का दृढ़ता से समर्थन किया। उन्होंने विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से आधारहीन बताया।
हेगड़े ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "लाड़की बहना योजना हमारी सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है। इस योजना के लिए सरकार ने लगभग 26,000 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है। केवाईसी रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल निर्धारित की गई है। अगस्त 2024 से शुरू हुई इस योजना के तहत हर लाभार्थी महिला को प्रति माह 1,500 रुपए दिए जा रहे हैं।"
शिवसेना प्रवक्ता ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईंधन आपूर्ति के मुद्दे पर भी सरकार का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "एक जापानी जहाज ईंधन लेकर भारत की ओर रवाना हो चुका है। इसके अलावा, भारत का एक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से बात की थी, जिसके परिणामस्वरूप पहले भी दो जहाज होर्मुज से बाहर जा चुके हैं। भारत में ईंधन और गैस की कोई कमी नहीं होने वाली है। इसका श्रेय प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार को जाता है।"
अधीर रंजन चौधरी के हालिया बयान पर भी शिवसेना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। हेगड़े ने कहा, "टीएमसी की मुसलमान वोट बटोरने की रणनीति पर अधीर रंजन चौधरी का बयान अत्यंत गलत है। उन्होंने कहा कि जहां जीतने की संभावना है, वहां मुसलमान टीएमसी को वोट देंगे और जहां कांग्रेस के जीतने की संभावना है, वहां कांग्रेस को। यह बयान राज्य को तोड़ने वाला है। जनता मतदान काम के आधार पर करती है, न कि धर्म के आधार पर।"
समाजवादी पार्टी की युवा सांसद इकरा चौधरी के सुझाव पर भी कृष्ण हेगड़े ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बाल विकास पर लोकसभा के एक दिन को समर्पित करना एक अच्छा सुझाव है, लेकिन लोकसभा की कार्यवाही का प्रबंधन सचिवालय द्वारा एजेंडा और समय के अनुसार किया जाता है। उन्होंने कहा कि इकरा चौधरी के पिता भी पूर्व सांसद रह चुके हैं, इसलिए उन्हें संसदीय प्रक्रिया की जानकारी होनी चाहिए।