संजय सरावगी का बयान: कांग्रेस ने महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस ने महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया।
- भाजपा ने बिहार में महिला आरक्षण लागू किया।
- प्रमुख योजनाएं: 3,000 रुपये की वित्तीय सहायता।
- न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का इस्तीफा।
- भाजपा का विश्वास आम जनता का समर्थन।
नई दिल्ली, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के घोषणापत्र, सीडब्ल्यूसी बैठक और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के इस्तीफे पर अपनी राय साझा की।
महिला आरक्षण बिल पर संजय सरावगी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "कांग्रेस ने महिलाओं को कहीं और कभी भी आरक्षण नहीं दिया। लेकिन, जब हमारी सरकार बिहार में सत्ता में आई, तो हमने शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण लागू किया। इससे महापौर और उप महापौर से लेकर ग्राम प्रधान तक हजारों महिलाओं को लाभ मिला। जो कार्य कांग्रेस 30 वर्षों में नहीं कर पाई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केवल तीन दिनों में कर दिखाया। उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा दोनों में नारी शक्ति अधिनियम पारित करवा दिया।"
उन्होंने आगे कहा कि आने वाले दिनों में हमारी बहनों की कानून बनाने में समान भूमिका होनी चाहिए और हर चुनाव में महिलाओं को आरक्षण दिलाने के लिए प्रधानमंत्री ने दृढ़ संकल्प किया है। इस संदर्भ में 16 से 18 अप्रैल तक विशेष सत्र बुलाया गया है। लेकिन कांग्रेस और विपक्ष की नीयत सही नहीं है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, "भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने एक भरोसा पत्र जारी किया है। इसमें कहा गया है कि पश्चिम बंगाल की महिलाओं को प्रति माह 3,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसमें अगले पांच वर्षों में एक करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करने का भी वादा किया गया है। बंगाल की सरकार रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को संरक्षण दे रही है। भाजपा सरकार बनने के बाद घुसपैठियों को पश्चिम बंगाल से बाहर निकाला जाएगा।"
संजय सरावगी ने कहा, "पश्चिम बंगाल में अभी बिना कट मनी यानी हफ्ता दिए बिना कोई काम नहीं होता। ऐसे में भाजपा उद्योगपतियों को विशेष सहायता प्रदान करेगी। आम जनता को भारतीय जनता पार्टी पर विश्वास है, जो भी हम कहते हैं, उसे धरातल पर लागू करते हैं। इस बार टीएमसी के हाथ से सत्ता जाने वाली है और भाजपा की सरकार बनने वाली है।"
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के इस्तीफे के विषय में सरावगी ने कहा, "उन पर महाभियोग चल रहा था, और वे भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए गए हैं।"