मालदा की घटना: लोकतंत्र को चुनौती देने वाले षड्यंत्र की जांच जरूरी है - सुकांत मजूमदार
सारांश
Key Takeaways
- मालदा की घटना ने लोकतंत्र को चुनौती दी है।
- सुकांत मजूमदार ने चुनाव आयोग से सख्त कार्रवाई की अपील की है।
- टीएमसी और ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगे हैं।
- एनआईए मामले की जांच कर रही है।
- पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की स्थिति बनी हुई है।
जलपाईगुड़ी, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने मालदा की घटना पर राष्ट्र प्रेस से बताया कि यह घटना देश के लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने चुनाव आयोग से इसे सख्ती से संभालने की अपील की।
सुकांत मजूमदार ने कहा कि इस घटना के पीछे एक बड़ा षड्यंत्र हो सकता है और इसकी गहन जांच आवश्यक है। एनआईए इस मामले की जांच कर रही है, और लोगों को यह जानने का हक है कि इसके पीछे कौन सा रिमोड कंट्रोल है। उन्होंने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे बहुत चालाकी से काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि देश की जनता और चुनाव आयोग समझ चुके हैं कि ममता बनर्जी क्या कर सकती हैं। इस घटना के पीछे ममता बनर्जी और टीएमसी का हाथ है, और जांच में सब स्पष्ट हो जाएगा।
भाजपा नेता सीपी सिंह ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई घटना पर कहा कि पश्चिम बंगाल में कोई सरकार नहीं है, सिर्फ हिंसा है। उनका दावा है कि ममता बनर्जी के इशारे पर एक विशेष समुदाय के लोगों ने न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया। उच्चतम न्यायालय ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और गिरफ्तारियां भी हुई हैं।
भाजपा सांसद और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे चुनाव में लोगों की भागीदारी नहीं चाहतीं। चुनाव आयोग सुनिश्चित कर रहा है कि लोग वोट देने के लिए बाहर आएं।
बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने मालदा की घटना पर टीएमसी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मालदा को बांग्लादेशी घुसपैठ का गढ़ माना जाता है। उन्होंने इसे राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों का केंद्र बताया और टीएमसी कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी की निंदा की।