1 नवंबर 2026
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बिहार MLC अयोग्यता विवाद: राजद सांसद मनोज झा ने दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए भाजपा पर साधा निशाना

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बिहार MLC अयोग्यता विवाद: राजद सांसद मनोज झा ने दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए भाजपा पर साधा निशाना

सारांश

बिहार विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय जीत के बाद भाजपा में शामिल हुए दो पार्षदों को लेकर राजद ने संवैधानिक लड़ाई छेड़ दी है। मनोज झा ने दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता की माँग की है — और आरोप लगाया है कि भाजपा ने यह कदम जदयू को कमज़ोर करने के लिए उठाया।

मुख्य बातें

राजद सांसद मनोज कुमार झा ने 1 नवंबर 2026 को पटना में निर्दलीय पार्षदों राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के भाजपा में शामिल होने पर अयोग्यता की माँग उठाई।
झा ने संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2(2) और अनुच्छेद 191(2) का हवाला दिया।
राजद ने मामला विधान परिषद सभापति , चुनाव आयोग और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय तक ले जाने की घोषणा की।
भाजपा पर आरोप — जदयू को राजनीतिक रूप से अप्रासंगिक करने के लिए यह कदम उठाया गया।
हाल के चुनाव में NDA को 8 में से केवल 2 सीटें मिलीं; दोनों निर्दलीय विजेताओं ने जदयू प्रत्याशियों को हराया था।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता और सांसद मनोज कुमार झा ने 1 नवंबर 2026 को पटना स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बिहार विधान परिषद के दो नवनिर्वाचित निर्दलीय सदस्यों — राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी — के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने पर कड़ी आपत्ति जताई। झा ने संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए दोनों पार्षदों को अयोग्य घोषित करने की माँग की और विधान परिषद के सभापति से हस्तक्षेप की अपील की।

मुख्य संवैधानिक आधार

मनोज झा ने संविधान के अनुच्छेद 191(2) और दसवीं अनुसूची के पैरा 2(2) का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित होने के पश्चात किसी राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण करना सदन से अयोग्यता का आधार बन सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी दल का 'समर्थन' लेने और उस दल की 'सदस्यता' ग्रहण करने में संवैधानिक दृष्टि से बुनियादी अंतर है।

झा ने दावा किया कि चुनाव परिणाम आने के बाद दोनों पार्षदों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने से संबंधित पर्ची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की थी, और इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो तथा अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं।

राजद की रणनीति और अगले कदम

राजद ने इस मामले को तीन मंचों पर उठाने की घोषणा की है — विधान परिषद के सभापति, चुनाव आयोग, और यदि आवश्यक हो तो न्यायालय। झा ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच भी ले जाएगी और इसे 'जनादेश की चोरी' करार दिया।

उन्होंने विधान परिषद के सभापति से आग्रह किया कि वे किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधि की भूमिका न निभाकर निष्पक्ष पीठासीन पदाधिकारी की संवैधानिक भूमिका निभाएँ।

भाजपा पर लगाए गए राजनीतिक आरोप

झा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने इन दोनों निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ जोड़कर जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) को राजनीतिक रूप से कमज़ोर और अप्रासंगिक करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े गठबंधन और सत्ता-संसाधनों के उपयोग के बावजूद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को कुल आठ में से केवल दो सीटें ही मिलीं, जो गैर-NDA मतदाताओं का स्पष्ट संदेश है।

झा ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी इस मामले में उत्तरदायी ठहराया और कहा कि यदि संवैधानिक उल्लंघन को संरक्षण दिया गया, तो जनता अपना जवाब देगी।

चुनाव का पृष्ठभूमि

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर हाल ही में संपन्न चुनाव में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी राहुल राज ने NDA-समर्थित जदयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर को पराजित किया था। इसी प्रकार, तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी ने जदयू के अभिषेक झा को हराया था।

चुनाव परिणाम के अगले दिन यानी शनिवार को दोनों नवनिर्वाचित पार्षद भाजपा कार्यालय में आयोजित विधानमंडल दल की बैठक में सम्मिलित हुए। बैठक से पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उनका स्वागत किया, जहाँ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी उपस्थित थे। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में NDA के भीतर भाजपा-जदयू संतुलन राजनीतिक विमर्श का केंद्र बना हुआ है।

आगे क्या होगा

विधान परिषद के सभापति का निर्णय इस मामले की दिशा तय करेगा। यदि अयोग्यता याचिका स्वीकार होती है, तो यह बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। गौरतलब है कि दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता के मामलों में न्यायिक समीक्षा का रास्ता भी खुला रहता है, और राजद ने स्पष्ट किया है कि वह हर संवैधानिक विकल्प का उपयोग करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन निर्दलीय सदस्यों पर इसका प्रयोग न्यायिक रूप से जटिल है और अदालतें इसे सँभलकर देखती हैं। असली प्रश्न यह है कि क्या सभापति — जो स्वयं सत्तारूढ़ गठबंधन के करीबी हैं — निष्पक्ष सुनवाई करेंगे, या राजद को न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का अवसर मिलेगा। जदयू की चुप्पी इस पूरे प्रकरण में सबसे दिलचस्प पहलू है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार MLC अयोग्यता विवाद क्या है?
बिहार विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय जीत दर्ज करने वाले राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के भाजपा में शामिल होने के बाद राजद ने उनकी सदस्यता रद्द करने की माँग उठाई है। राजद का तर्क है कि निर्वाचन के बाद किसी दल की सदस्यता लेना दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का आधार है।
दसवीं अनुसूची का इस मामले में क्या महत्व है?
संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2(2) और अनुच्छेद 191(2) के अनुसार, निर्दलीय निर्वाचित सदस्य यदि किसी राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण करता है, तो वह सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य हो सकता है। राजद ने इसी प्रावधान को आधार बनाते हुए अयोग्यता की माँग की है।
राजद अब आगे क्या कदम उठाएगी?
राजद ने तीन मंचों पर लड़ाई लड़ने की घोषणा की है — विधान परिषद के सभापति के समक्ष याचिका, चुनाव आयोग को सूचना, और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय में चुनौती। पार्टी ने यह भी कहा है कि इस मुद्दे को जनता के बीच उठाया जाएगा।
राजद ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए हैं?
राजद सांसद मनोज झा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने जदयू को राजनीतिक रूप से कमज़ोर और अप्रासंगिक करने के उद्देश्य से इन दोनों निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ जोड़ा है। उन्होंने इसे 'जनादेश की चोरी' और 'राजनीतिक अनैतिकता' बताया।
हाल के बिहार विधान परिषद चुनाव में क्या हुआ था?
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर हुए चुनाव में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय राहुल राज ने जदयू के आनंद पुष्कर को और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी ने जदयू के अभिषेक झा को पराजित किया था। NDA को कुल आठ में से केवल दो सीटें मिलीं।
राष्ट्र प्रेस
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