केरल में सतीशन सरकार का बड़ा एक्शन: 6 महीने में 16 जांचें, 12 निशाने पर पिनराई विजयन की LDF
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली केरल की कांग्रेस-यूडीएफ सरकार ने सत्ता संभालने के छह महीने से भी कम समय में 16 बड़े मामलों की जांच के आदेश दे दिए हैं, जिनमें से 12 मामले सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की एलडीएफ सरकार और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआईएम — से जुड़े हैं। जांचों के इस असाधारण पैमाने ने तिरुवनंतपुरम में राजनीतिक हलचल तेज़ कर दी है और विपक्षी खेमे पर 'राजनीतिक बदले' का आरोप लगाने का दबाव बढ़ गया है।
मुख्य जांचें और उनका दायरा
इन जांचों में सबसे प्रमुख है केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) के वित्तीय लेन-देन की विजिलेंस जांच। KIIFB विजयन सरकार की एक प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग एजेंसी रही थी, और उसके खिलाफ अनियमितताओं के आरोप लंबे समय से विपक्ष उठाता रहा है।
एक विशेष पुलिस टीम लियोनेल मेसी की अर्जेंटीना फुटबॉल टीम के प्रस्तावित केरल दौरे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की भी जांच कर रही है। क्राइम ब्रांच पीएससी परीक्षाओं और नियुक्तियों — जिनमें वरिष्ठ पदों पर भर्तियाँ भी शामिल हैं — में हुई कथित गड़बड़ियों की पड़ताल कर रही है।
इसके अलावा, एक एसआईटी (विशेष जांच दल) सचिवालय के सामने यूथ कांग्रेस और केएसयू प्रदर्शनकारियों पर हुए कथित हमलों के मामले की जांच कर रही है।
अन्य मामले जो जांच के दायरे में हैं
जांचों की इस सूची में कन्नूर जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष पी.पी. दिव्या से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताएं, चेवायुर सर्विस कोऑपरेटिव बैंक चुनाव में गड़बड़ियां, वडाकारा 'काफिर' स्क्रीनशॉट विवाद, और पूर्व मुख्यमंत्री को ले जा रही एक उड़ान के दौरान हुए विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा मामला भी शामिल है।
इसी क्रम में, सीएमआरएल-एक्सलॉजिक के वित्तीय लेन-देन — जिसमें विजयन और अन्य लोगों की कथित संलिप्तता बताई जाती है — की विजिलेंस जांच फिलहाल रुकी हुई है, क्योंकि केरल उच्च न्यायालय ने आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
ऐतिहासिक संदर्भ: 2016 का आईना
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य की राजनीतिक स्मृति में मई 2016 की यादें अभी भी ताज़ा हैं। तब पिनराई विजयन ने ओमन चांडी की कांग्रेस-यूडीएफ सरकार को हराकर सत्ता संभाली थी और शुरुआती कदमों में 1 जनवरी 2016 से विधानसभा चुनावों की घोषणा तक चांडी सरकार द्वारा लिए गए सभी कैबिनेट फैसलों की जांच का आदेश दिया था।
उस समय तत्कालीन विपक्षी नेता सतीशन ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता वी.एम. सुधीरन के साथ मिलकर उन्हीं फैसलों पर कड़े सवाल उठाए थे। हालांकि, उस जांच में कैबिनेट के किसी भी फैसले में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई थी। अब एक दशक बाद, भूमिकाएं पलट चुकी हैं — और सतीशन खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर वही रास्ता अपना रहे हैं।
सरकार का पक्ष और राजनीतिक माहौल
सतीशन सरकार का कहना है कि ये सभी जांचें कानूनी पड़ताल और जरूरी प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद शुरू की गई हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में कुछ और मामले भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
गौरतलब है कि इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में जांचें शुरू होना केरल की राजनीति में एक असामान्य घटना है। आलोचकों का कहना है कि यह चुनावी परिणाम के बाद की राजनीतिक प्रतिकार की रणनीति है, जबकि सत्तारूढ़ खेमा इसे जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में जरूरी कदम बताता है।
इन जांचों का राजनीतिक भविष्य काफी हद तक अदालतों के रुख और जांच एजेंसियों की रिपोर्टों पर निर्भर करेगा — और इस पर केरल की जनता की नज़र बनी रहेगी।