बिहार MLC सदस्यता विवाद: जन सुराज ने बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज को हटाने की मांग, सभापति को सौंपी याचिका
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधान परिषद में नवनिर्वाचित निर्दलीय पार्षद बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का मामला 2 नवंबर 2026 को राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। जन सुराज के प्रतिनिधिमंडल ने बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति प्रो. डॉ. रामवचन राय से मुलाकात कर दोनों पार्षदों की सदस्यता रद्द करने की याचिका सौंपी और संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की मांग की।
मुख्य घटनाक्रम
जन सुराज के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना ने किया। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित राहुल राज ने चुनाव परिणाम के 72 घंटे भी पूरे होने से पहले BJP की सदस्यता ग्रहण कर ली।
प्रतिनिधिमंडल ने अपनी याचिका के समर्थन में समाचारपत्रों में प्रकाशित खबरों, मीडिया में दिए गए बयानों और अन्य संबंधित साक्ष्यों को पेन ड्राइव के ज़रिए सभापति को सौंपा। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से BJP में शामिल होने की बात स्वीकार की है।
संवैधानिक आधार
जन सुराज के नेताओं ने इस कदम को संविधान की दसवीं अनुसूची — जिसे सामान्यतः दल-बदल विरोधी कानून कहा जाता है — के प्रावधानों के विपरीत बताया। किशोर कुमार मुन्ना ने कहा कि यदि कोई निर्दलीय निर्वाचित सदस्य चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण करता है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है।
गौरतलब है कि दल-बदल विरोधी कानून मूलतः दलीय सदस्यों पर लागू होता है, लेकिन निर्दलीय सदस्यों द्वारा दल ग्रहण करने के संदर्भ में उसकी व्याख्या न्यायिक और संवैधानिक विशेषज्ञों के बीच बहस का विषय रही है।
व्यापक दायरे में शिकायत
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इस मामले में भारत निर्वाचन आयोग, बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मुख्य सचिव और संबंधित आयुक्त को भी पक्षकार बनाया गया है। इससे स्पष्ट है कि जन सुराज केवल विधान परिषद के स्तर पर नहीं, बल्कि निर्वाचन-प्रशासन के शीर्ष स्तरों तक इस विवाद को ले जाना चाहती है।
सभापति की प्रतिक्रिया
पूर्व विधान पार्षद रामबली सिंह चंद्रवंशी ने बताया कि कार्यकारी सभापति प्रो. डॉ. रामवचन राय ने मामले को गंभीर बताते हुए कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेकर नियमानुसार उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है। चंद्रवंशी ने यह भी कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने न्याय मिलने में संभावित देरी को लेकर चिंता भी जताई।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति में नए दल-बदल और गठबंधन परिवर्तनों को लेकर नियमों की व्याख्या और क्रियान्वयन केंद्र में है। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना, पूर्व विधान पार्षद रामबली चंद्रवंशी, सुभाष कुशवाहा, तेज नारायण सहनी, सुरेश पटेल और ओबैदुर रहमान सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
आगे की राह
सभापति द्वारा कानूनी विशेषज्ञों की सलाह के बाद नोटिस जारी किए जाने की संभावना है। इस मामले का परिणाम बिहार में निर्दलीय विधायकों और पार्षदों के भविष्य के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।