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अजीत डोभाल ने हनोई के क्वान सु पगोडा का दौरा किया, भारत वियतनाम सांस्कृतिक सेतु पर दिया जोर

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अजीत डोभाल ने हनोई के क्वान सु पगोडा का दौरा किया, भारत वियतनाम सांस्कृतिक सेतु पर दिया जोर

सारांश

NSA अजीत डोभाल की हनोई यात्रा सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं — यह भारत वियतनाम संबंधों की नई परत है। क्वान सु पगोडा के दौरे से लेकर रक्षा और विदेश मंत्रियों की बैठकों तक, यह यात्रा 2027 में 55 साल के राजनयिक संबंधों की आधारशिला रख रही है।

मुख्य बातें

NSA अजीत डोभाल ने हनोई के ऐतिहासिक क्वान सु पगोडा का दौरा किया; बौद्ध धर्म को भारत वियतनाम का सभ्यतागत सेतु बताया गया।
डोभाल ने वियतनाम के विदेश मंत्री ले होआई चुंग से मुलाकात कर 2027 में राजनयिक संबंधों के 55 वर्ष पूरे होने पर विशेष आयोजनों पर चर्चा की।
जन सुरक्षा मंत्री लुओंग ताम क्वांग और रक्षा मंत्री जनरल फान वान गियांग के साथ सुरक्षा व रक्षा सहयोग की समीक्षा की गई।
मई 2026 में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच 'एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप' स्थापित हुई थी।
दोनों पक्षों ने बहुआयामी संबंधों को और सुदृढ़ करने तथा क्षेत्रीय वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा किए।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने 3 नवंबर 2026 को वियतनाम की राजधानी हनोई स्थित ऐतिहासिक क्वान सु पगोडा का दौरा किया, जहाँ बौद्ध धर्म को भारत और वियतनाम के लोगों के बीच एक मज़बूत सभ्यतागत सेतु के रूप में रेखांकित किया गया। डोभाल रविवार, 2 नवंबर को आधिकारिक यात्रा पर हनोई पहुँचे और इस दौरे में उन्होंने भारत वियतनाम 'एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप' के अंतर्गत वियतनाम के शीर्ष नेतृत्व से कई महत्त्वपूर्ण बैठकें कीं।

पगोडा में ऐतिहासिक स्वागत

वियतनाम में स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर बताया कि क्वान सु पगोडा में डोभाल का स्वागत 'मोस्ट वेनेरेबल थिच थान न्हीयू' — जो पगोडा के मुख्य महंत और वियतनाम बौद्ध संघ के स्थायी उपाध्यक्ष हैं — और नेशनल वियतनाम बुद्धिस्ट संघ के उपाध्यक्ष एवं महासचिव ने किया। दूतावास ने कहा, "बौद्ध धर्म भारत और वियतनाम के लोगों के बीच एक सभ्यतागत सेतु है।" यह यात्रा दोनों देशों के बीच केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव को भी प्रतिबिंबित करती है।

विदेश मंत्री से मुलाकात और 55 वर्षीय संबंधों पर चर्चा

पगोडा दौरे से पहले NSA डोभाल ने वियतनाम के विदेश मंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो सदस्य ले होआई चुंग से भेंट की। दोनों नेताओं ने 2027 में भारत वियतनाम राजनयिक संबंधों की स्थापना के 55 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विशेष आयोजनों और पहलों पर विचार विमर्श किया। भारतीय दूतावास के अनुसार, दोनों पक्षों ने इस ऐतिहासिक अवसर को 'एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप' की भावना के अनुरूप यादगार बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों पर सहमति जताई।

सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर द्विपक्षीय बैठकें

डोभाल ने वियतनाम के जन सुरक्षा मंत्री सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल लुओंग ताम क्वांग के साथ भी बैठक की, जिसमें सुरक्षा सहयोग की समीक्षा की गई और मौजूदा बहुआयामी संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने पर सहमति बनी। क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर भी दोनों पक्षों ने विचारों का आदान प्रदान किया।

इसके अतिरिक्त, NSA डोभाल ने वियतनाम के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री जनरल फान वान गियांग से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने रक्षा क्षेत्र में जारी सहयोग की समीक्षा करते हुए इसे और गहरा करने पर सहमति व्यक्त की। यह बैठकें ऐसे समय में हुई हैं जब दक्षिण चीन सागर में तनाव के बीच भारत और वियतनाम दोनों अपने रणनीतिक संबंधों को नई ऊँचाई देना चाहते हैं।

साझेदारी की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि मई 2026 में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को उन्नत करके 'एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप' का दर्जा दिया था। डोभाल की यह यात्रा उसी उन्नत साझेदारी को व्यावहारिक धरातल पर आगे बढ़ाने की कड़ी के रूप में देखी जा रही है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में और अधिक ठोस पहल की उम्मीद की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सभ्यतागत मित्र के रूप में देखता है। लेकिन असली कसौटी 2027 में 55 वर्षीय राजनयिक संबंधों के अवसर पर होगी — जब वादे ठोस समझौतों और व्यापार रक्षा परियोजनाओं में बदलने होंगे। दक्षिण चीन सागर के भू राजनीतिक समीकरणों के बीच यह साझेदारी जितनी गहरी होगी, भारत की इंडो पैसिफ़िक उपस्थिति उतनी ही विश्वसनीय बनेगी।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NSA अजीत डोभाल ने हनोई में क्वान सु पगोडा का दौरा क्यों किया?
अजीत डोभाल ने अपनी आधिकारिक वियतनाम यात्रा के दौरान हनोई के ऐतिहासिक क्वान सु पगोडा का दौरा कर भारत और वियतनाम के बीच बौद्ध धर्म की साझा विरासत को रेखांकित किया। भारतीय दूतावास के अनुसार, बौद्ध धर्म दोनों देशों के लोगों के बीच एक सभ्यतागत सेतु है।
भारत वियतनाम 'एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप' क्या है?
यह मई 2026 में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के दौरान स्थापित उन्नत द्विपक्षीय साझेदारी है, जो सुरक्षा, रक्षा, व्यापार और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊँचाई देती है। डोभाल की हनोई यात्रा इसी साझेदारी को व्यावहारिक धरातल पर आगे बढ़ाने का हिस्सा है।
डोभाल ने वियतनाम में किन नेताओं से मुलाकात की?
NSA डोभाल ने वियतनाम के विदेश मंत्री ले होआई चुंग, जन सुरक्षा मंत्री सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल लुओंग ताम क्वांग और उप प्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री जनरल फान वान गियांग से मुलाकात की। इन बैठकों में सुरक्षा सहयोग, रक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारत और वियतनाम के बीच राजनयिक संबंधों को कितने साल पूरे होंगे?
2027 में भारत और वियतनाम के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 55 वर्ष पूरे होंगे। डोभाल और वियतनामी विदेश मंत्री ले होआई चुंग ने इस अवसर को विशेष रूप से मनाने के लिए विभिन्न आयोजनों और पहलों पर चर्चा की।
डोभाल की वियतनाम यात्रा का क्षेत्रीय महत्त्व क्या है?
दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच यह यात्रा भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति को मज़बूत करती है और इंडो पैसिफ़िक में भारत वियतनाम रणनीतिक समन्वय को गहरा करती है। सुरक्षा, रक्षा और सांस्कृतिक — तीनों स्तरों पर हुई बैठकें इस साझेदारी की बहुआयामी प्रकृति को दर्शाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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