भारतीय एनसीसी दल ने हनोई में हो ची मिन्ह समाधि पर दी श्रद्धांजलि, प्रेसिडेंशियल पैलेस का भी किया दौरा
सारांश
मुख्य बातें
भारत की नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) का 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल वार्षिक यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत वियतनाम यात्रा पर है। 13 अगस्त 2026 को इस दल ने हनोई में वियतनाम के पहले राष्ट्रपति हो ची मिन्ह के समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और इसके बाद प्रेसिडेंशियल पैलेस का दौरा किया। यह यात्रा भारत-वियतनाम के बीच बढ़ते रक्षा और सांस्कृतिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
वियतनाम में भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए एक पोस्ट में बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने हो ची मिन्ह की समाधि पर पुष्पांजलि दी और वियतनाम के इस लोकप्रिय नेता के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इसके बाद दल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण कर वियतनाम के समृद्ध इतिहास और विरासत की जानकारी ली।
दूतावास के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने हनोई चिल्ड्रन पैलेस का भी दौरा किया, जहाँ कैडेट्स ने पैलेस के निदेशक के साथ वहाँ की गतिविधियों, कार्यों और युवा पीढ़ी के पालन-पोषण एवं शिक्षा में संस्था की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की।
सांस्कृतिक और सैन्य विरासत से परिचय
दिन के अंत में प्रतिनिधिमंडल वियतनाम मिलिट्री हिस्ट्री म्यूजियम पहुँचा, जहाँ कैडेट्स ने वियतनाम की गौरवशाली सैन्य यात्रा और ऐतिहासिक संघर्षों के बारे में जानकारी हासिल की। दूतावास ने इस दिन को 'कृतज्ञता, सीख, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अनुभवों से भरा' बताया, जिसने भारतीय और वियतनामी युवाओं के बीच मित्रता को और प्रगाढ़ किया।
राजदूत से मुलाकात और रक्षा सहयोग पर चर्चा
इससे एक दिन पूर्व, बुधवार 12 अगस्त को प्रतिनिधिमंडल ने हनोई स्थित भारतीय दूतावास का दौरा किया और राजदूत त्सेरिंग डब्ल्यू. शेरपा से भेंट की। राजदूत शेरपा ने कैडेट्स को भारत और वियतनाम के बीच बहुआयामी एवं दूरदर्शी संबंधों की जानकारी दी, जिसमें तेज़ी से प्रगाढ़ होता रक्षा सहयोग विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।
आगे की यात्रा योजना
दूतावास ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल हनोई के अलावा न्हा ट्रांग में भी रक्षा, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्थानों का भ्रमण करेगा। दूतावास ने इस बात पर जोर दिया कि यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम दोनों देशों के बीच व्यापक जन-जन संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों की नींव को और मज़बूत करेगा।