11 अगस्त 2026
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INS उदयगिरि और INS कवरत्ती वियतनाम पहुंचे, भारत-वियतनाम नौसैनिक साझेदारी को नई ऊंचाई

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INS उदयगिरि और INS कवरत्ती वियतनाम पहुंचे, भारत-वियतनाम नौसैनिक साझेदारी को नई ऊंचाई

सारांश

मई 2026 में उन्नत सामरिक साझेदारी के बाद भारत ने वियतनाम को दो स्वदेशी युद्धपोत भेजकर संकेत दिया है कि कूटनीतिक घोषणाएं अब नौसैनिक उपस्थिति में बदल रही हैं। हिंद-प्रशांत में चीन के बढ़ते दबाव के बीच यह तैनाती महज़ सद्भावना यात्रा नहीं — रणनीतिक संदेश है।

मुख्य बातें

आईएनएस उदयगिरि (स्टील्थ फ्रिगेट) और आईएनएस कवरत्ती (पनडुब्बी रोधी कोर्वेट) 22 जून 2026 को हो ची मिन्ह सिटी के न्हा रोंग बंदरगाह पहुंचे।
नौसैनिक दल का नेतृत्व रियर एडमिरल आलोक आनंद , फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग पूर्वी बेड़ा, कर रहे हैं।
यह मई 2026 में भारत-वियतनाम उन्नत व्यापक सामरिक साझेदारी स्थापित होने के बाद वियतनाम में भारतीय नौसेना की पहली बड़ी उपस्थिति है।
प्रवास के दौरान क्रॉस-डेक विजिट, सैन्य विशेषज्ञ वार्ता, संयुक्त खेल और उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित होंगी।
दोनों युद्धपोत पूर्णतः स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं निर्मित हैं, जो भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को प्रदर्शित करते हैं।

भारतीय नौसेना के दो स्वदेशी युद्धपोत — आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस कवरत्ती22 जून 2026 को वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी स्थित न्हा रोंग बंदरगाह पहुंचे। यह तैनाती पूर्वी बेड़े के अंतर्गत एक ऑपरेशनल मिशन का हिस्सा है और मई 2026 में दोनों देशों के बीच स्थापित उन्नत व्यापक सामरिक साझेदारी के बाद वियतनाम में भारतीय नौसेना की पहली बड़ी उपस्थिति है।

नौसैनिक दल और युद्धपोतों का परिचय

इस नौसैनिक दल का नेतृत्व पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल आलोक आनंद कर रहे हैं। आईएनएस उदयगिरि एक अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट है, जबकि आईएनएस कवरत्ती पनडुब्बी रोधी युद्धक क्षमता से लैस एक उन्नत कोर्वेट है। दोनों युद्धपोत स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं निर्मित हैं और भारत की आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण क्षमता का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।

बंदरगाह प्रवास के दौरान गतिविधियाँ

हो ची मिन्ह सिटी में प्रवास के दौरान भारतीय नौसेना और वियतनाम पीपुल्स नेवी के बीच अनेक पेशेवर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें सैन्य विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श, क्रॉस-डेक विजिट, संयुक्त खेल प्रतियोगिताएं और सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त दोनों देशों के वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों के बीच उच्चस्तरीय बैठकें भी होंगी, जिनमें क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, आपसी सहयोग और साझा हितों पर चर्चा की जाएगी।

द्विपक्षीय संबंधों का रणनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि मई 2026 में भारत और वियतनाम ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को उन्नत व्यापक सामरिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया था। यह नौसैनिक यात्रा उसी कूटनीतिक उन्नयन की व्यावहारिक परिणति है। यह ऐसे समय में आई है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।

स्वागत और क्षेत्रीय महत्व

हो ची मिन्ह सिटी पहुंचने पर भारतीय युद्धपोतों का वियतनाम पीपुल्स नेवी, हो ची मिन्ह सिटी पीपुल्स कमेटी और बंदरगाह प्राधिकरणों ने औपचारिक एवं गर्मजोशी से स्वागत किया। यह स्वागत दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच दशकों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों और निरंतर प्रगाढ़ होती समुद्री साझेदारी को रेखांकित करता है।

आगे की राह

भारतीय नौसेना की यह तैनाती मित्र देशों के साथ समुद्री सहयोग को गहरा करने की व्यापक रणनीति का अंग है। विशेषज्ञों के अनुसार यह यात्रा हिंद-प्रशांत में मुक्त नौवहन, क्षेत्रीय स्थिरता और साझा सुरक्षा हितों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन समय और संदर्भ इसे कहीं अधिक बनाते हैं। मई 2026 की सामरिक साझेदारी के महज़ हफ्तों बाद नौसैनिक उपस्थिति दर्ज कराना भारत की 'पहले घोषणा, फिर क्रियान्वयन' की परंपरागत कूटनीति से अलग गति दिखाता है। हिंद-प्रशांत में दक्षिण चीन सागर को लेकर वियतनाम की संवेदनशीलता और भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के बीच यह साझेदारी स्वाभाविक रूप से पूरक है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये बंदरगाह यात्राएं संयुक्त गश्त, तकनीकी सहयोग और रक्षा निर्यात में बदलती हैं — या केवल कूटनीतिक सद्भावना तक सीमित रहती हैं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस कवरत्ती वियतनाम क्यों गए हैं?
ये दोनों युद्धपोत भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े की ऑपरेशनल तैनाती के तहत वियतनाम पहुंचे हैं। यह यात्रा मई 2026 में स्थापित भारत-वियतनाम उन्नत व्यापक सामरिक साझेदारी के बाद दोनों देशों के नौसैनिक सहयोग को व्यावहारिक रूप देने का पहला बड़ा कदम है।
आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस कवरत्ती क्या हैं?
आईएनएस उदयगिरि एक अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट है और आईएनएस कवरत्ती पनडुब्बी रोधी युद्धक क्षमता से लैस एक उन्नत कोर्वेट है। दोनों युद्धपोत स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं निर्मित हैं और भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन क्षमता के प्रतीक हैं।
भारत-वियतनाम उन्नत व्यापक सामरिक साझेदारी क्या है?
मई 2026 में भारत और वियतनाम ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को उन्नत व्यापक सामरिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया। यह दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और कूटनीतिक सहयोग को गहरा करने की प्रतिबद्धता का औपचारिक ढाँचा है।
हो ची मिन्ह सिटी प्रवास के दौरान कौन-सी गतिविधियाँ होंगी?
प्रवास के दौरान भारतीय नौसेना और वियतनाम पीपुल्स नेवी के बीच सैन्य विशेषज्ञ वार्ता, क्रॉस-डेक विजिट, संयुक्त खेल प्रतियोगिताएं और सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके अलावा दोनों देशों के वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों के बीच क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा पर उच्चस्तरीय बैठकें भी होंगी।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में इस तैनाती का क्या महत्व है?
यह तैनाती हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की सक्रिय समुद्री भूमिका और मुक्त नौवहन के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ रक्षा संबंधों को संस्थागत रूप देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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