हनोई में MOS पबित्रा मार्गेरिटा ने हो ची मिन्ह को दी श्रद्धांजलि, भारत-वियतनाम ECSP संबंधों की होगी समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने 26 अगस्त 2026 को वियतनाम की राजधानी हनोई में देश के संस्थापक नेता और प्रथम राष्ट्रपति हो ची मिन्ह की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। यह यात्रा भारत-वियतनाम के बीच एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप (ECSP) के तहत द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने के उद्देश्य से की जा रही है।
समाधि पर श्रद्धांजलि और संदेश
मार्गेरिटा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'हनोई में राष्ट्रपति हो ची मिन्ह की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके स्थायी योगदान और भारत-वियतनाम के बीच उन गहरे सभ्यतागत संबंधों को नमन किया, जिन्हें उनके नेतृत्व ने और मजबूत बनाया।' यह श्रद्धांजलि भारत की उस कूटनीतिक परंपरा को रेखांकित करती है जिसमें द्विपक्षीय यात्राओं के दौरान मेजबान देश के राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान किया जाता है।
हो ची मिन्ह: एक परिचय
वियतनाम सरकार के अनुसार, हो ची मिन्ह वियतनामी क्रांति के महान नेता, वियतनाम के श्रमिक वर्ग और पूरे राष्ट्र के प्रिय मार्गदर्शक तथा अंतरराष्ट्रीय साम्यवादी और राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलनों के प्रमुख व्यक्तित्व थे। वर्ष 1946 में वियतनाम की प्रथम राष्ट्रीय सभा ने उन्हें डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ वियतनाम का राष्ट्रपति नियुक्त किया था।
यात्रा का एजेंडा और द्विपक्षीय समीक्षा
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, मार्गेरिटा 26-27 अगस्त तक वियतनाम की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरान वे वियतनाम के वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात करेंगे और ECSP के तहत द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति की समीक्षा करेंगे। वे प्रमुख हितधारकों और भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी संवाद करेंगे। गौरतलब है कि मंगलवार को हनोई पहुँचने पर उन्होंने इस यात्रा के दौरान सार्थक बैठकों की उम्मीद जताई थी।
भारत-वियतनाम संबंधों की पृष्ठभूमि
भारत और वियतनाम के बीच दशकों से घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मई 2026 में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के स्तर तक उन्नत किया था — जो संबंधों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
आगे की यात्रा योजना
वियतनाम दौरे के बाद मार्गेरिटा 28-29 अगस्त को लाओस और फिर 1-2 सितंबर को प्रशांत द्वीपीय देश पलाऊ की आधिकारिक यात्रा करेंगे। यह दक्षिण-पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र में भारत की सक्रिय कूटनीतिक उपस्थिति को दर्शाता है।