एशियन जूनियर क्लासिकल चेस 2026: मयंक चक्रवर्ती और प्रतीति बोरदोलोई ने भारत को दिलाया गोल्डन डबल
सारांश
मुख्य बातें
मयंक चक्रवर्ती और प्रतीति बोरदोलोई ने 26 अगस्त 2026 को मुंबई के आईटीसी मराठा शेराटन में आयोजित एशियन जूनियर क्लासिकल चेस चैंपियनशिप 2026 में क्रमशः ओपन और गर्ल्स वर्ग के स्वर्ण पदक जीतकर भारत के लिए ऐतिहासिक 'गोल्डन डबल' हासिल किया। दोनों खिलाड़ियों ने नौ-नौ राउंड की स्पर्धा में 7.5-7.5 अंक अर्जित कर शीर्ष स्थान सुरक्षित किया।
ओपन वर्ग: मयंक की निर्णायक जीत
टॉप सीड मयंक चक्रवर्ती ने नौ राउंड की ओपन चैंपियनशिप में 7.5 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता और उम्मीदों पर पूरी तरह खरे उतरे। रूस के आर्टेम पिंगिन ने 7 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि भारत के दक्ष गोयल ने 6.5 अंक अर्जित कर कांस्य पदक पर कब्ज़ा जमाया।
गर्ल्स वर्ग: प्रतीति का शानदार प्रदर्शन
गर्ल्स वर्ग में प्रतीति बोरदोलोई ने 7.5 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीतकर भारत की पदक तालिका को और समृद्ध किया। कजाकिस्तान की मारिया खोल्यावको 7 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहीं — चैंपियन से महज आधा अंक पीछे। भारत की निवेदिता वीसी ने 6.5 अंक के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया।
फिडे टाइटल और नॉर्म्स की बौछार
पदकों से परे, इस चैंपियनशिप ने कई खिलाड़ियों के करियर को नई ऊँचाई दी। ओपन चैंपियन मयंक चक्रवर्ती ने एक और ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल किया। कांस्य पदक विजेता दक्ष गोयल को फिडे मास्टर टाइटल और इंटरनेशनल मास्टर नॉर्म मिला। गर्ल्स चैंपियन प्रतीति बोरदोलोई को तिहरी उपलब्धि प्राप्त हुई — स्वर्ण पदक के साथ वुमन इंटरनेशनल मास्टर (WIM) टाइटल और वुमन ग्रैंडमास्टर (WGM) नॉर्म। कजाकिस्तान की मारिया खोल्यावको और भारत की निवेदिता वीसी ने भी WIM नॉर्म हासिल किए।
पदक तालिका में भारत का दबदबा
समग्र पदक तालिका में भारत ने मेज़बान देश के रूप में शानदार प्रदर्शन किया। क्लासिकल चैंपियनशिप में दांव पर लगे छह में से चार पदक भारत की झोली में गए — दो स्वर्ण और दो कांस्य। रूस और कजाकिस्तान ने एक-एक रजत पदक आपस में बाँटे।
आयोजन की पृष्ठभूमि
इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का आयोजन महाराष्ट्र चेस एसोसिएशन ने ऑल इंडिया चेस फेडरेशन (AICF) और एशियन चेस फेडरेशन की ओर से किया। मुंबई में इस स्तर की एशियाई जूनियर शतरंज स्पर्धा का आयोजन भारत की शतरंज महाशक्ति के रूप में बढ़ती पहचान को रेखांकित करता है। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारत ने जूनियर स्तर पर अंतरराष्ट्रीय शतरंज में लगातार अपनी पकड़ मज़बूत की है। इस 'गोल्डन डबल' के साथ, मयंक और प्रतीति दोनों अपने-अपने ग्रैंडमास्टर सफर में महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर चुके हैं।