22 अगस्त 2026
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BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026: ट्रीसा-गायत्री का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज, सेमीफाइनल में चीनी जोड़ी से 21-18, 13-21, 8-21 की हार

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BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026: ट्रीसा-गायत्री का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज, सेमीफाइनल में चीनी जोड़ी से 21-18, 13-21, 8-21 की हार

सारांश

15 साल के इंतज़ार के बाद भारत को वर्ल्ड चैंपियनशिप में विमेंस डबल्स ब्रॉन्ज मिला — ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने चीनी विश्व चैंपियनों से कड़ी टक्कर ली, पर धैर्य की कमी भारी पड़ी। अर्जुन अवॉर्ड और ब्रॉन्ज, एक ही हफ्ते में — एशियन गेम्स से पहले यह जोड़ी नई ऊँचाई पर है।

मुख्य बातें

ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 में विमेंस डबल्स का ब्रॉन्ज मेडल जीता।
सेमीफाइनल में चीन की लियू शेंग शू/टैन निंग ने भारतीय जोड़ी को 21-18, 13-21, 8-21 से हराया।
यह 2011 में ज्वाला गुट्टा-अश्विनी पोनप्पा के बाद 15 वर्षों में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का पहला विमेंस डबल्स पदक है।
दोनों खिलाड़ियों को टूर्नामेंट के दौरान ही अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया।
ट्रीसा ने माना कि अटैक में अधिक धैर्य और वेरिएशन की ज़रूरत है; एशियन गेम्स अगला बड़ा लक्ष्य।

BWF वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप 2026 में 22 अगस्त को विमेंस डबल्स सेमीफाइनल में भारतीय जोड़ी ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद चीन की मौजूदा विश्व चैंपियन लियू शेंग शू/टैन निंग के हाथों 21-18, 13-21, 8-21 से पराजित हो गईं। इस हार के साथ ही दोनों को ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा, हालाँकि यह पदक अपने आप में ऐतिहासिक है।

ऐतिहासिक ब्रॉन्ज का महत्व

ट्रीसा-गायत्री की यह उपलब्धि भारतीय बैडमिंटन के लिए एक मील का पत्थर है। यह 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा के ब्रॉन्ज मेडल के बाद 15 वर्षों में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का पहला विमेंस डबल्स पदक है। इस जोड़ी का लक्ष्य वर्ल्ड चैंपियनशिप के विमेंस डबल्स फाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय जोड़ी बनना था, लेकिन विश्व की नंबर एक चीनी जोड़ी उनके सामने अभेद्य दीवार साबित हुई।

मैच का घटनाक्रम

पहले गेम में भारतीय जोड़ी ने 21-18 से बढ़त बनाई और दूसरे गेम के पहले हाफ तक भी नियंत्रण में रहीं। हालाँकि, दूसरे गेम के उत्तरार्ध में चीनी जोड़ी ने लय पकड़ी और 21-13 से बराबरी कर ली। तीसरा और निर्णायक गेम पूरी तरह एकतरफा रहा, जहाँ भारतीय जोड़ी केवल 8 अंक ही बना सकी और चीनी जोड़ी ने 21-8 से मैच अपने नाम किया।

खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया

सेमीफाइनल में हार के बाद ट्रीसा जॉली ने कहा, 'आज का दिन हमारा नहीं था। पहले गेम में हम जीते, और दूसरे गेम के पहले हाफ में भी हम कंट्रोल में थे। उसके बाद उन्हें किसी तरह लय मिल गई और हमने अपनी लय खो दी। वे बढ़त बना रहे थे, प्वाइंट्स के मामले में भी हमसे आगे निकल गए थे, और हम उन प्वाइंट्स की भरपाई नहीं कर पाए।'

गायत्री गोपीचंद ने माना कि जल्दबाजी उनकी सबसे बड़ी कमज़ोरी रही। उन्होंने कहा, 'वे काफी शांत थे। हम बस प्वाइंट्स चाहते थे। आज हममें धैर्य की कमी थी। वे वर्ल्ड नंबर 1 हैं, वे आसानी से प्वाइंट्स नहीं देने वाले थे।' उन्होंने इस पूरे हफ्ते के सफर को शानदार बताते हुए कहा कि इस हार से भी बहुत कुछ सीखने को मिला है।

ट्रीसा ने विश्व स्तरीय प्रतिस्पर्धा की बारीकियों पर रोशनी डाली — 'जब आप इतने ऊंचे स्तर पर खेलते हैं, तो हर प्वाइंट पर नियंत्रण और सतर्क रहने की जरूरत होती है। अगर आप पल भर के लिए चूके, तो ऐसा लगता है कि पाँच प्वाइंट्स निकल गए हों।'

अर्जुन अवॉर्ड और आगे की राह

गौरतलब है कि इस टूर्नामेंट से ठीक पहले ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद दोनों को प्रतिष्ठित अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया था। ट्रीसा ने कहा, 'इस हफ्ते हमें मेडल और अर्जुन अवॉर्ड, दोनों मिले हैं। अर्जुन अवॉर्ड से हमें पूरे टूर्नामेंट के दौरान हौसला मिला।' यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय बैडमिंटन में युवा प्रतिभाओं की एक नई पीढ़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर दस्तक दे रही है। आने वाले एशियन गेम्स में यह जोड़ी और मज़बूत होकर उतरने की तैयारी में है।

आगे क्या

ट्रीसा ने माना कि उन्हें अटैक के दौरान अधिक धैर्य और वेरिएशन की ज़रूरत है, जिस पर वे आगे काम करेंगी। एशियन गेम्स इस जोड़ी के लिए अगला बड़ा लक्ष्य है, और इस ब्रॉन्ज की उपलब्धि उनके आत्मविश्वास को नई ऊँचाई देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय महिला डबल्स बैडमिंटन के पुनर्जागरण का संकेत है — एक ऐसे खेल में जहाँ भारत दशकों से एकल वर्चस्व में जीता है। विडंबना यह है कि जिस 'धैर्य की कमी' ने इस सेमीफाइनल में उन्हें पीछे किया, वही आक्रामकता क्वार्टरफाइनल तक उनकी ताकत रही होगी। चीनी जोड़ी के खिलाफ पहला गेम जीतना यह साबित करता है कि यह जोड़ी विश्व के शीर्ष से महज़ कुछ ही अंकों के फासले पर है। एशियन गेम्स और ओलंपिक चक्र की दृष्टि से, यह ब्रॉन्ज एक ऐसी नींव है जिस पर भारतीय बैडमिंटन का भविष्य टिका हो सकता है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 में कौन-सा पदक जीता?
ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने BWF वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप 2026 में विमेंस डबल्स का ब्रॉन्ज मेडल जीता। सेमीफाइनल में चीन की लियू शेंग शू/टैन निंग से 21-18, 13-21, 8-21 से हार के बाद उन्हें यह पदक मिला।
यह पदक ऐतिहासिक क्यों है?
यह 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा के ब्रॉन्ज के बाद 15 वर्षों में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का पहला विमेंस डबल्स पदक है। इससे पहले कोई भी भारतीय महिला डबल्स जोड़ी इस प्रतियोगिता के फाइनल तक नहीं पहुँची थी।
सेमीफाइनल में भारतीय जोड़ी की हार की मुख्य वजह क्या रही?
गायत्री गोपीचंद के अनुसार, धैर्य की कमी और जल्दबाजी उनकी हार की प्रमुख वजह रही। चीनी जोड़ी ने दूसरे गेम के उत्तरार्ध में लय पकड़ी और भारतीय जोड़ी उसे तोड़ नहीं पाई, जिसके बाद तीसरा गेम 8-21 से एकतरफा रहा।
ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद को अर्जुन अवॉर्ड कब मिला?
इसी टूर्नामेंट के दौरान दोनों खिलाड़ियों को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया। ट्रीसा ने बताया कि इस सम्मान ने पूरे टूर्नामेंट में उन्हें हौसला दिया।
इस जोड़ी का अगला बड़ा लक्ष्य क्या है?
ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की नज़र अब एशियन गेम्स पर है। ट्रीसा ने कहा कि वे अटैक में अधिक वेरिएशन और धैर्य पर काम करेंगी, ताकि अगली बड़ी प्रतियोगिता में और बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
राष्ट्र प्रेस
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