21 अगस्त 2026
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BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप: त्रिसा-गायत्री ने नंबर 4 चीनी जोड़ी को 16-21, 21-15, 21-13 से हराया, सेमीफाइनल में, मेडल पक्का

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BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप: त्रिसा-गायत्री ने नंबर 4 चीनी जोड़ी को 16-21, 21-15, 21-13 से हराया, सेमीफाइनल में, मेडल पक्का

सारांश

त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में पहला गेम गँवाने के बाद शानदार वापसी करते हुए विश्व की चौथी वरीयता प्राप्त चीनी जोड़ी को 16-21, 21-15, 21-13 से हराया। 2011 में ज्वाला-अश्विनी के बाद 15 साल में पहली बार भारत का महिला डबल्स में BWF पदक तय हुआ।

मुख्य बातें

त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 के महिला डबल्स सेमीफाइनल में प्रवेश किया।
विश्व की चौथी वरीयता प्राप्त चीनी जोड़ी जी यिफान और झांग शुक्सियन को 16-21, 21-15, 21-13 से हराया।
भारत का इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के महिला डबल्स में पदक सुनिश्चित हो गया है।
2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा के कांस्य पदक के बाद 15 वर्षों में यह पहला भारतीय महिला डबल्स पदक होगा।
निर्णायक गेम में 4-4 से 11-5 की बढ़त — लगातार सात पॉइंट — ने मैच का रुख पलट दिया।

भारत की महिला डबल्स जोड़ी त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 में शानदार उलटफेर करते हुए विश्व की चौथी वरीयता प्राप्त चीनी जोड़ी जी यिफान और झांग शुक्सियन को 16-21, 21-15, 21-13 से पराजित कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। 21 अगस्त को मिली इस जीत के साथ भारत का इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के महिला डबल्स वर्ग में पदक सुनिश्चित हो गया है।

ऐतिहासिक उपलब्धि

त्रिसा और गायत्री BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप के महिला डबल्स में पदक जीतने वाली भारत की केवल दूसरी जोड़ी बन गई हैं। इससे पहले 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने इस वर्ग में कांस्य पदक जीता था — यानी 15 वर्षों के इंतज़ार के बाद भारत फिर इस मंच पर पोडियम तक पहुँचा है। गौरतलब है कि विश्व की चौथी वरीयता प्राप्त जोड़ी को हराना किसी भी मानक पर बड़ा उलटफेर माना जाएगा।

मुख्य घटनाक्रम: तीन गेमों का रोमांचक सफर

पहले गेम में भारतीय जोड़ी शुरुआत से ही दबाव में रही। जी यिफान और झांग शुक्सियन ने 6-2 की त्वरित बढ़त बनाई और इंटरवल तक 11-8 की स्थिति में रहीं। त्रिसा-गायत्री ने अपने पावरफुल स्मैश और नेट प्ले से अंतर 8-9 तक घटाया, लेकिन पहला गेम 16-21 से गँवाना पड़ा।

दूसरे गेम में भारतीय जोड़ी ने रणनीति बदली। लंबी रैलियों में चीनी जोड़ी को उलझाते हुए और दबाव में मज़बूत डिफेंस दिखाते हुए उन्होंने इंटरवल पर 11-10 की बढ़त बनाई। इंटरवल के बाद उनके क्रॉस-कोर्ट अटैक ने चीनी जोड़ी को बार-बार कोर्ट के पार खींचा और 17-14 की बढ़त से गेम 21-15 से जीत लिया।

निर्णायक तीसरे गेम में 4-4 की बराबरी के बाद त्रिसा जॉली के एक जोरदार स्मैश ने पासा पलट दिया। भारतीय जोड़ी ने लगातार सात पॉइंट जीतकर स्कोर 9-4 कर दिया और इंटरवल पर 11-5 की बड़ी बढ़त के साथ पहुँचीं। साइड बदलने के बाद चीनी जोड़ी ने कुछ देर वापसी की कोशिश की, लेकिन भारतीय जोड़ी ने लगातार तीन पॉइंट जीतकर लय बरकरार रखी। 18-9 पर झांग के एक शॉट की समीक्षा के बावजूद नतीजा नहीं बदला और चीनी जोड़ी की दो और गलतियों ने भारत को 21-13 से निर्णायक जीत दिला दी।

खेल की बदलती रणनीति

पहले गेम में पिछड़ने के बाद त्रिसा और गायत्री ने अपने खेल में स्पष्ट बदलाव किया। उनका आक्रामक क्रॉस-कोर्ट खेल और मज़बूत नेट कवरेज चीनी जोड़ी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी। तीसरे गेम में जी यिफान और झांग शुक्सियन की अनफोर्स्ड गलतियों की संख्या बढ़ती गई, जो भारतीय जोड़ी के बढ़ते दबाव का प्रमाण थी।

आगे क्या

सेमीफाइनल में त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद का सामना अगले दौर में होगा, जहाँ कम से कम रजत पदक की दावेदारी के साथ वे उतरेंगी। यह जीत भारतीय बैडमिंटन के लिए उस समय आई है जब देश में महिला डबल्स को लेकर लंबे समय से उम्मीदें टिकी थीं। अगर वे स्वर्ण पदक जीतती हैं, तो यह BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप के महिला डबल्स में भारत का पहला खिताब होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में किसे हराया?
त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 के क्वार्टरफाइनल में विश्व की चौथी वरीयता प्राप्त चीनी जोड़ी जी यिफान और झांग शुक्सियन को 16-21, 21-15, 21-13 से हराया। इस जीत से वे सेमीफाइनल में पहुँची और भारत का पदक सुनिश्चित हो गया।
BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप महिला डबल्स में पदक जीतने वाली पहली भारतीय जोड़ी कौन थी?
BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप के महिला डबल्स में पदक जीतने वाली पहली भारतीय जोड़ी ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा थीं, जिन्होंने 2011 में कांस्य पदक जीता था। त्रिसा और गायत्री 15 साल बाद यह उपलब्धि दोहराने वाली दूसरी भारतीय जोड़ी बनी हैं।
त्रिसा-गायत्री ने मैच कैसे जीता, पहला गेम हारने के बाद?
पहला गेम 16-21 से गँवाने के बाद भारतीय जोड़ी ने दूसरे गेम में आक्रामक क्रॉस-कोर्ट खेल और मज़बूत डिफेंस से 21-15 से जीत दर्ज की। तीसरे निर्णायक गेम में 4-4 से लगातार सात पॉइंट जीतकर 11-5 की बढ़त बनाई और अंततः 21-13 से मैच अपने नाम किया।
BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में त्रिसा-गायत्री का अगला मुकाबला कब और किससे है?
त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद का अगला मुकाबला BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 के सेमीफाइनल में होगा। सेमीफाइनल के प्रतिद्वंद्वी का विवरण टूर्नामेंट के अन्य क्वार्टरफाइनल मैचों के नतीजों पर निर्भर करेगा।
BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत के लिए यह जीत क्यों महत्वपूर्ण है?
यह जीत इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि 2011 के बाद 15 वर्षों में पहली बार भारत की कोई जोड़ी BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप के महिला डबल्स सेमीफाइनल में पहुँची है और पदक सुनिश्चित किया है। विश्व की चौथी वरीयता को हराना भारतीय महिला डबल्स बैडमिंटन की बढ़ती ताकत का संकेत है।
राष्ट्र प्रेस
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