21 अगस्त 2026
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त्रिसा-गायत्री ने BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप सेमीफाइनल में जगह बनाई, 2011 के बाद भारत का पहला महिला डबल्स मेडल पक्का

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त्रिसा-गायत्री ने BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप सेमीफाइनल में जगह बनाई, 2011 के बाद भारत का पहला महिला डबल्स मेडल पक्का

सारांश

14 साल के इंतजार के बाद भारतीय महिला डबल्स ने BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल पक्का किया। त्रिसा-गायत्री ने पहला गेम हारने के बाद जबरदस्त वापसी की — और अब सामने है विश्व की नंबर एक जोड़ी।

मुख्य बातें

त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में चीन की जिया यी फैन / झांग शू जियान को 16-21, 21-15, 21-13 से हराया।
2011 के बाद भारत का पहला महिला डबल्स मेडल पक्का; उस वर्ष ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने ब्रॉन्ज जीता था।
मुकाबला 70 मिनट तक चला; पहला गेम हारने के बाद भारतीय जोड़ी ने शानदार वापसी की।
चीफ नेशनल कोच और गायत्री के पिता पुलेला गोपीचंद ने 'वर्तमान पल में रहो, शांत रहो' की रणनीति दी।
सेमीफाइनल में जोड़ी का सामना चीन की शीर्ष वरीयता प्राप्त जोड़ी लियू शेंग शू / टैन निंग से होगा।

त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने 21 अगस्त 2026 को BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में विश्व की चौथे नंबर की चीनी जोड़ी जिया यी फैन और झांग शू जियान को 16-21, 21-15, 21-13 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। इस जीत के साथ ही भारत का इस टूर्नामेंट में पहला मेडल सुनिश्चित हो गया और 2011 के बाद महिला डबल्स में यह पहली बार है जब कोई भारतीय जोड़ी पोडियम पर पहुँची है।

ऐतिहासिक जीत का क्रम

पहला गेम 16-21 से गँवाने के बाद भारतीय जोड़ी पर दबाव था, क्योंकि इन्हीं चीनी खिलाड़ियों के खिलाफ पिछले तीन मुकाबलों में वे कभी जीत नहीं पाई थीं। लेकिन दूसरे और तीसरे गेम में त्रिसा-गायत्री ने धैर्य और रणनीति के दम पर 21-15 और 21-13 से जीत दर्ज की। कुल मिलाकर यह मुकाबला 70 मिनट तक चला।

गौरतलब है कि 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था — उसके बाद से महिला डबल्स में भारत पदक से वंचित रहा था। यह जोड़ी उस सूखे को समाप्त करने की दहलीज पर खड़ी है।

कोच पुलेला गोपीचंद की रणनीति

इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में खेले गए इस तनावपूर्ण मैच के दौरान चीफ नेशनल कोच और दिग्गज पूर्व शटलर पुलेला गोपीचंद — जो गायत्री के पिता भी हैं — ने कोर्टसाइड से लगातार संदेश दिया। त्रिसा ने बताया, 'शुरुआत से ही वे कह रहे थे कि वर्तमान पल में रहें और शांत रहें, क्योंकि इससे हमें प्वाइंट स्कोर करने में मदद मिली, और आज यह तरीका सच में काम आया।'

गायत्री ने भी अपने पिता की उपस्थिति को विशेष बताया: 'यह वाकई बहुत खास है। वे बहुत बड़ा सपोर्ट हैं, उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है।' यह पिता-पुत्री का संयोग भारतीय बैडमिंटन की एक अनोखी कहानी बन गया है।

घरेलू दर्शकों का अहम योगदान

नई दिल्ली में घरेलू मैदान पर खेलने का फायदा दोनों खिलाड़ियों को साफ दिखा। गायत्री ने कहा, 'आम तौर पर जब हम विदेश में होते हैं, तो हमें एक-दूसरे का हौसला बढ़ाना पड़ता है, लेकिन यहाँ दर्शक हमें आगे बढ़ा रहे हैं।' त्रिसा ने भी दर्शकों की सकारात्मक ऊर्जा का उल्लेख करते हुए कहा कि स्टेडियम के समर्थन ने उन्हें कठिन क्षणों में टिके रहने की ताकत दी।

सेमीफाइनल में चुनौती

अब त्रिसा-गायत्री का सामना चीन की शीर्ष वरीयता प्राप्त जोड़ी लियू शेंग शू और टैन निंग से होगा — जो विश्व की नंबर एक जोड़ी मानी जाती है। गायत्री ने स्पष्ट किया, 'हम बस शांत रहना चाहते हैं, कोर्ट पर उतरकर अपना 100 प्रतिशत देना चाहते हैं और आज की तरह ही खेल का मजा लेना चाहते हैं।' त्रिसा ने भी संकेत दिया कि यह सफर अभी यहीं नहीं रुकेगा: 'कल भी हमारे मैच हैं।'

संपादकीय दृष्टिकोण

और जिसमें अब उनकी अपनी बेटी केंद्र में है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारतीय बैडमिंटन का यह पुनरुत्थान सिर्फ एक पीढ़ी की प्रतिभा पर टिका है या एक टिकाऊ पाइपलाइन पर। चीन की नंबर एक जोड़ी के खिलाफ सेमीफाइनल यह तय करेगा कि यह जोड़ी चैंपियनशिप-स्तर की दावेदार है या नहीं — और उस परिणाम पर भारतीय महिला डबल्स की अगले ओलंपिक चक्र की रैंकिंग भी निर्भर करेगी।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में किसे हराया?
उन्होंने विश्व की चौथे नंबर की चीनी जोड़ी जिया यी फैन और झांग शू जियान को 16-21, 21-15, 21-13 से हराया। यह मुकाबला 70 मिनट तक चला और पहला गेम हारने के बाद भारतीय जोड़ी ने जबरदस्त वापसी की।
BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 में भारत का मेडल क्यों खास है?
यह 2011 के बाद पहली बार है जब किसी भारतीय जोड़ी ने महिला डबल्स में BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप का मेडल पक्का किया है। 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था।
त्रिसा-गायत्री का अगला मुकाबला किससे है?
सेमीफाइनल में उनका सामना चीन की शीर्ष वरीयता प्राप्त जोड़ी लियू शेंग शू और टैन निंग से होगा। गायत्री ने कहा कि वे शांत रहकर 100 प्रतिशत देने की कोशिश करेंगी।
पुलेला गोपीचंद ने मैच के दौरान क्या रणनीति दी?
चीफ नेशनल कोच पुलेला गोपीचंद ने जोड़ी को 'वर्तमान पल में रहो और शांत रहो' का संदेश दिया। त्रिसा के अनुसार इसी रणनीति ने उन्हें कठिन क्षणों में अंक जुटाने में मदद की।
BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 कहाँ आयोजित हो रही है?
यह टूर्नामेंट नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित हो रहा है। घरेलू दर्शकों के समर्थन को त्रिसा और गायत्री दोनों ने अपनी जीत में अहम कारक बताया।
राष्ट्र प्रेस
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