धीरज बोम्मादेवरा का आर्चरी वर्ल्ड कप में गोल्डन डबल — ली वू-सियोक को 7-3 से हराकर व्यक्तिगत स्वर्ण
सारांश
मुख्य बातें
भारत के धीरज बोम्मादेवरा ने तुर्की के अंताल्या में आयोजित आर्चरी वर्ल्ड कप स्टेज 3 में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। रविवार, 14 जून को 24 वर्षीय धीरज ने पहले कुमकुम मोहोद के साथ मिश्रित टीम रिकर्व स्वर्ण और फिर पुरुष व्यक्तिगत रिकर्व फाइनल में ओलंपिक कांस्य पदक विजेता दक्षिण कोरिया के ली वू-सियोक को 7-3 से हराकर गोल्डन डबल पूरा किया। यह उनके करियर का अब तक का सबसे बड़ा खिताब है।
मुख्य घटनाक्रम
व्यक्तिगत रिकर्व स्वर्ण धीरज का वर्ल्ड कप स्तर पर पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक है और कुल मिलाकर उनका चौथा व्यक्तिगत वर्ल्ड कप मेडल — इससे पहले वे तीन कांस्य पदक जीत चुके थे। इस जीत के साथ उन्होंने पुरुष व्यक्तिगत रिकर्व में भारत का पाँच साल का इंतज़ार समाप्त किया। वह 2021 में अतनु दास के बाद यह खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बने। इस श्रेणी में व्यक्तिगत वर्ल्ड कप स्वर्ण जीतने वाले भारत के अन्य तीरंदाज जयंत तालुकदार हैं।
सेमीफाइनल में नाटकीय वापसी
धीरज का स्वर्ण तक का सफर आसान नहीं था। सेमीफाइनल में वे जर्मनी के मोरित्ज वीजर से 1-3 से पिछड़ रहे थे, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए मैच 6-4 से जीता और फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल में उन्होंने विश्व के शीर्ष रिकर्व तीरंदाजों में शुमार और ओलंपिक पदक विजेता ली वू-सियोक को 7-3 के निर्णायक अंतर से परास्त किया।
मिश्रित टीम में भी ऐतिहासिक जीत
इसी दिन धीरज ने 17 वर्षीया कुमकुम मोहोद के साथ मिलकर मिश्रित रिकर्व टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीता। तीसरी सीड वाली भारतीय जोड़ी ने फाइनल में टॉप सीड दक्षिण कोरिया की जोड़ी ओह येजिन और किम जे-डियोक को 5-1 से हराया। गौरतलब है कि किम जे-डियोक उस दक्षिण कोरियाई मिश्रित टीम का हिस्सा रही हैं जिसने टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था।
भारतीय तीरंदाज़ी में ऐतिहासिक संदर्भ
धीरज और कुमकुम वर्ल्ड कप में मिश्रित रिकर्व स्वर्ण जीतने वाली सिर्फ तीसरी भारतीय जोड़ी बने। इससे पहले दीपिका कुमारी और अतनु दास ने 2021 में पेरिस में यह उपलब्धि हासिल की थी, और तरुणदीप राय और रिधि ने 2022 में अंताल्या में स्वर्ण जीता था। यह कुमकुम मोहोद का लगातार दूसरा वर्ल्ड कप स्वर्ण पदक भी है, जो इस युवा तीरंदाज़ के उज्ज्वल भविष्य का संकेत देता है।
आगे क्या
अंताल्या में इस प्रदर्शन के बाद धीरज बोम्मादेवरा अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज़ी रैंकिंग में और मज़बूत स्थिति में आने की उम्मीद है। भारतीय तीरंदाज़ी दल के लिए यह डबल स्वर्ण आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश की दावेदारी को और पुख्ता करेगा।