धीरज बोम्मादेवरा और कुमकुम मोहोद ने अंताल्या वर्ल्ड कप में दक्षिण कोरिया को 5-1 से हराकर रिकर्व मिश्रित टीम स्वर्ण जीता
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा और कुमकुम मोहोद ने रविवार, 14 जून को अंताल्या में आयोजित आर्चरी वर्ल्ड कप स्टेज 3 के फाइनल में ओलंपिक चैंपियन दक्षिण कोरिया को 5-1 (37-36, 37-36, 39-39) से परास्त कर रिकर्व मिश्रित टीम का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। कोरियाई जोड़ी किम जे-डेओक और ओह ये-जिन के खिलाफ यह जीत भारतीय तीरंदाजी के लिए एक ऐतिहासिक पल है।
मुख्य घटनाक्रम
24 वर्षीय धीरज और 17 वर्षीय कुमकुम ने पूरे मुकाबले में असाधारण संयम का प्रदर्शन किया। विश्व रैंकिंग में 16वें स्थान पर काबिज धीरज, जो भारत के सर्वोच्च रैंक वाले रिकर्व तीरंदाज हैं, ने निर्णायक क्षण में अपने अंतिम तीर पर परफेक्ट 10 का स्कोर दर्ज किया। कुल मिलाकर, दोनों तीरंदाजों ने तीन-तीन 10 स्कोर किए — कुमकुम ने तीन 9 और धीरज ने दो 9 व एक 8 जोड़ा।
यह दोनों के करियर का पहला वर्ल्ड कप मिश्रित टीम स्वर्ण पदक है। धीरज इससे पहले 2024 में अंकिता भक्त के साथ और 2025 में भजन कौर के साथ मिश्रित टीम में कांस्य पदक जीत चुके थे — अब उनका स्वर्ण का इंतजार खत्म हुआ।
फाइनल का रोमांचक विवरण
पहले सेट में कोरिया के किम ने सात और ओह ने नौ का स्कोर कर पहले दो तीरों में सिर्फ 16 अंक बनाए, जिससे भारत को शुरुआती बढ़त मिली। कुमकुम के 9 और धीरज के 8 ने भारत को मध्यांतर में एक अंक आगे कर दिया। बाद में रिव्यू में कुमकुम का एक तीर 9 से 10 हो गया, जबकि किम का पहला तीर 8 आंका गया — नतीजतन भारत ने पहला सेट 37-36 से जीतकर 2-0 की बढ़त बनाई।
दूसरे सेट में दोनों टीमें आखिरी तीरों तक 18-18 पर बराबर रहीं। कोरिया ने 36 का स्कोर किया। तब कुमकुम ने दबाव में 9 लगाया और धीरज ने निर्णायक 10 से सेट 37-36 से जीत भारत की बढ़त 4-0 कर दी।
तीसरे सेट में कोरिया ने दो 10 से जोरदार वापसी की। भारत को अंतिम दो तीरों में पूर्ण सटीकता की जरूरत थी। कुमकुम ने दबाव में 10 दागा और धीरज के 9 को रिव्यू में 10 में बदल दिया गया — सेट 39-39 से टाई रहा और मैच भारत के नाम 5-1 से पक्का हो गया।
कुमकुम का लगातार दूसरा स्वर्ण
कुमकुम के लिए यह लगातार दूसरा वर्ल्ड कप स्वर्ण पदक है। पिछले महीने शंघाई वर्ल्ड कप में वह दीपिका कुमारी और अंकिता भक्त के साथ महिला रिकर्व टीम का हिस्सा थीं, जिसने 10 बार की ओलंपिक चैंपियन दक्षिण कोरिया को सेमीफाइनल में हराकर स्वर्ण जीता था — उस मैच में कुमकुम ने शूट-ऑफ में आखिरी तीर मारा था।
आगे का सफर
यह जीत ऐसे समय में आई है जब भारतीय तीरंदाजी लगातार अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान मजबूत कर रही है। गौरतलब है कि ओलंपिक चैंपियन दक्षिण कोरिया को लगातार टूर्नामेंटों में पराजित करना भारतीय तीरंदाजी की बढ़ती गहराई और युवा प्रतिभाओं की परिपक्वता का प्रमाण है। धीरज और कुमकुम की यह जोड़ी आने वाले बड़े आयोजनों में भारत की प्रबल दावेदार बन सकती है।