12 जुलाई 2026
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तीरंदाज धीरज-ज्योति ने मोदी सरकार के खेल सुधारों को सराहा: 'अब सिस्टम खुद पूछता है, क्या चाहिए'

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तीरंदाज धीरज-ज्योति ने मोदी सरकार के खेल सुधारों को सराहा: 'अब सिस्टम खुद पूछता है, क्या चाहिए'

सारांश

SAI की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओलंपियन धीरज बोम्मदेवरा और गोल्ड मेडलिस्ट ज्योति सुरेखा वेन्नम ने मोदी सरकार के खेल सुधारों को सराहा। TOPS के तहत करोड़ों की सहायता और मेक्सिको ट्रेनिंग कैंप जैसी पहलों ने भारतीय तीरंदाजी की तस्वीर बदल दी है।

मुख्य बातें

धीरज बोम्मदेवरा को TOPS के तहत लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक साइकिल में अब तक ₹66.28 लाख की सहायता मिली है।
TOPS कोर ग्रुप की सदस्य ज्योति सुरेखा वेन्नम को अब तक ₹24.56 लाख की आर्थिक मदद प्राप्त हुई है।
NTPC के CSR सहयोग से 26 मार्च से 5 अप्रैल तक मेक्सिको में विदेशी प्रशिक्षण शिविर आयोजित हुआ, जिस पर ₹57.42 लाख खर्च हुए।
20 मई से 7 जून तक सोनीपत SAI सेंटर में 16 शीर्ष तीरंदाजों का राष्ट्रीय कोचिंग कैंप चल रहा है।
एशियन गेम्स प्रतिभागी 5-18 सितंबर को जापान में एक्सपोजर कैंप में हिस्सा लेंगे; आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होगा।

ओलंपियन धीरज बोम्मदेवरा और एशियन गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट ज्योति सुरेखा वेन्नम ने 26 मई 2026 को नई दिल्ली में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार की खेल नीतियों और सुधारों की भरपूर तारीफ की। दोनों तीरंदाजों ने कहा कि अब एथलीटों और फेडरेशनों को विश्व-स्तरीय उपकरण, विदेशी प्रशिक्षण या वित्तीय सहायता के लिए सिस्टम के आगे गिड़गिड़ाने की ज़रूरत नहीं रही।

टॉप्स योजना से कितनी मिली मदद

धीरज बोम्मदेवरा, जो एशियन गेम्स 2026 में रिकर्व कैटेगरी में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे, को लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक साइकिल में टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के तहत अब तक कुल ₹66.28 लाख की सहायता मिल चुकी है। वहीं, TOPS कोर ग्रुप की सदस्य ज्योति सुरेखा वेन्नम को अब तक ₹24.56 लाख की आर्थिक मदद प्राप्त हुई है।

गौरतलब है कि यह योजना उन चुनिंदा एथलीटों को लक्षित सहायता देती है जिनमें ओलंपिक पदक जीतने की संभावना होती है — जिससे एथलीट बिना वित्तीय चिंता के प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

धीरज ने बताया सबसे बड़ा बदलाव

SAI की प्रेस कॉन्फ्रेंस में धीरज ने कहा, 'मुझे लगता है कि सरकार की मदद बढ़ रही है। सबसे बड़ा बदलाव जो मैंने देखा, वह यह है कि पहले, चाहे एथलीट हों या फेडरेशन, हमें सिस्टम के पास जाकर कहना पड़ता था — अगर हमें दुनिया में शीर्ष पर पहुंचना है, तो हमें इसकी जरूरत है। लेकिन अब, सिस्टम खुद हमारे पास आता है और पूछता है — शीर्ष पर पहुंचने के लिए आपको किस चीज की जरूरत है।'

धीरज ने आगे जोड़ा, 'साल 2017 से, मैंने देखा है कि यह हर साल बेहतर होता गया है। SAI और फेडरेशनों का सपोर्ट भी बढ़ा है। अब हमें पूरी आज़ादी मिली हुई है — हमारे रास्ते में कोई रुकावट नहीं है। हम इसके लिए बहुत खुशकिस्मत हैं।'

मेक्सिको ट्रेनिंग कैंप और विदेशी एक्सपोजर

इस साल की शुरुआत में, राष्ट्रीय तापविद्युत निगम लिमिटेड (NTPC) के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) सहयोग से, तीरंदाजी वर्ल्ड कप स्टेज 1 से पहले 26 मार्च से 5 अप्रैल तक मेक्सिको में एक विदेशी प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया, जिस पर कुल ₹57.42 लाख खर्च हुए।

इस एक्सपोजर कैंप में धीरज और ज्योति के अलावा दीपिका कुमारी और अतानु दास जैसे शीर्ष तीरंदाज भी शामिल हुए, जिससे टीम को प्रतिस्पर्धी सीज़न से पहले अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण का अमूल्य अनुभव मिला।

ज्योति ने गिनाए बुनियादी ढाँचे में आए सुधार

जापान में अपने लगातार चौथे एशियन गेम्स में हिस्सा लेने जा रहीं ज्योति ने कहा, 'मौकों और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में बहुत कुछ बदल गया है। अब हमारे पास भारत में विश्व-स्तरीय सुविधाएं हैं। खेलों को बेहतर बनाने के लिए काफी फंडिंग मिल रही है — एक्सपोजर, उपकरणों को अपग्रेड करना, विदेशी कोच और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट।'

ज्योति ने खेलो इंडिया योजना का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इसका मकसद जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को पहचानना और उन्हें सही कोचिंग व मार्गदर्शन तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा, 'यह सब केंद्र सरकार, खेल संघों, SAI और निजी संगठनों से मिलने वाले सपोर्ट की वजह से ही संभव हो पाया है।'

आगे की तैयारी और एशियन गेम्स का कार्यक्रम

20 मई से 7 जून तक सोनीपत स्थित SAI नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में एक सीनियर नेशनल तीरंदाजी कोचिंग कैंप चल रहा है, जिसमें रिकर्व और कंपाउंड कैटेगरी के 16 शीर्ष तीरंदाज भाग ले रहे हैं। इसके बाद, एशियन गेम्स में हिस्सा लेने वाले तीरंदाज 5 से 18 सितंबर तक जापान में एक एक्सपोजर कैंप में शामिल होंगे।

आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच होना निर्धारित है। भारतीय तीरंदाजी दल इस बार पदक की मजबूत दावेदारी के साथ उतरेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देना ज़रूरी है कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस SAI द्वारा आयोजित थी — यानी यह एक संरचित माहौल था जहाँ आलोचनात्मक स्वर की संभावना सीमित थी। TOPS और खेलो इंडिया जैसी योजनाओं ने निश्चित रूप से कुछ एथलीटों को ठोस लाभ पहुँचाया है, पर यह सवाल बना रहता है कि इन योजनाओं का लाभ कितने एथलीटों तक पहुँच रहा है और क्या जमीनी स्तर पर ढाँचागत सुधार उतने ही व्यापक हैं। मेडल की बढ़ती संख्या उत्साहजनक है, लेकिन नीति की सफलता का आकलन केवल शीर्ष एथलीटों के अनुभव से नहीं, बल्कि व्यापक भागीदारी और प्रतिभा पहचान के आँकड़ों से भी होना चाहिए।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

TOPS योजना क्या है और धीरज-ज्योति को इससे कितनी मदद मिली?
टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) केंद्र सरकार की वह योजना है जो ओलंपिक पदक की संभावना रखने वाले एथलीटों को लक्षित वित्तीय और प्रशिक्षण सहायता देती है। धीरज बोम्मदेवरा को लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक साइकिल में अब तक ₹66.28 लाख और ज्योति सुरेखा वेन्नम को ₹24.56 लाख की मदद मिली है।
मेक्सिको ट्रेनिंग कैंप में कौन-कौन से तीरंदाज शामिल हुए और इस पर कितना खर्च हुआ?
26 मार्च से 5 अप्रैल तक मेक्सिको में आयोजित इस विदेशी प्रशिक्षण शिविर में धीरज बोम्मदेवरा, ज्योति सुरेखा वेन्नम, दीपिका कुमारी और अतानु दास समेत कई शीर्ष भारतीय तीरंदाज शामिल हुए। इस कैंप पर NTPC के CSR सहयोग से कुल ₹57.42 लाख खर्च हुए।
एशियन गेम्स 2026 कब और कहाँ होंगे और भारतीय तीरंदाज कैसे तैयारी कर रहे हैं?
आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच जापान में होगा। भारतीय तीरंदाज सोनीपत में 20 मई से 7 जून तक राष्ट्रीय कोचिंग कैंप और उसके बाद 5-18 सितंबर को जापान में एक्सपोजर कैंप के ज़रिए तैयारी कर रहे हैं।
खेलो इंडिया योजना का भारतीय तीरंदाजी पर क्या असर पड़ा है?
ज्योति सुरेखा वेन्नम के अनुसार, खेलो इंडिया योजना ने जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें विश्व-स्तरीय कोचिंग केंद्रों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई है। इसका असर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में भारत की बढ़ती पदक संख्या में दिखता है।
धीरज बोम्मदेवरा 2017 से खेल सहायता में क्या बदलाव महसूस करते हैं?
धीरज के अनुसार 2017 से हर साल सहायता बेहतर हुई है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पहले एथलीटों को सिस्टम के पास जाकर अपनी ज़रूरतें बतानी पड़ती थीं, अब सिस्टम खुद एथलीटों से पूछता है कि उन्हें क्या चाहिए।
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