तीरंदाज धीरज-ज्योति ने मोदी सरकार के खेल सुधारों को सराहा: 'अब सिस्टम खुद पूछता है, क्या चाहिए'
सारांश
मुख्य बातें
ओलंपियन धीरज बोम्मदेवरा और एशियन गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट ज्योति सुरेखा वेन्नम ने 26 मई 2026 को नई दिल्ली में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार की खेल नीतियों और सुधारों की भरपूर तारीफ की। दोनों तीरंदाजों ने कहा कि अब एथलीटों और फेडरेशनों को विश्व-स्तरीय उपकरण, विदेशी प्रशिक्षण या वित्तीय सहायता के लिए सिस्टम के आगे गिड़गिड़ाने की ज़रूरत नहीं रही।
टॉप्स योजना से कितनी मिली मदद
धीरज बोम्मदेवरा, जो एशियन गेम्स 2026 में रिकर्व कैटेगरी में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे, को लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक साइकिल में टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के तहत अब तक कुल ₹66.28 लाख की सहायता मिल चुकी है। वहीं, TOPS कोर ग्रुप की सदस्य ज्योति सुरेखा वेन्नम को अब तक ₹24.56 लाख की आर्थिक मदद प्राप्त हुई है।
गौरतलब है कि यह योजना उन चुनिंदा एथलीटों को लक्षित सहायता देती है जिनमें ओलंपिक पदक जीतने की संभावना होती है — जिससे एथलीट बिना वित्तीय चिंता के प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
धीरज ने बताया सबसे बड़ा बदलाव
SAI की प्रेस कॉन्फ्रेंस में धीरज ने कहा, 'मुझे लगता है कि सरकार की मदद बढ़ रही है। सबसे बड़ा बदलाव जो मैंने देखा, वह यह है कि पहले, चाहे एथलीट हों या फेडरेशन, हमें सिस्टम के पास जाकर कहना पड़ता था — अगर हमें दुनिया में शीर्ष पर पहुंचना है, तो हमें इसकी जरूरत है। लेकिन अब, सिस्टम खुद हमारे पास आता है और पूछता है — शीर्ष पर पहुंचने के लिए आपको किस चीज की जरूरत है।'
धीरज ने आगे जोड़ा, 'साल 2017 से, मैंने देखा है कि यह हर साल बेहतर होता गया है। SAI और फेडरेशनों का सपोर्ट भी बढ़ा है। अब हमें पूरी आज़ादी मिली हुई है — हमारे रास्ते में कोई रुकावट नहीं है। हम इसके लिए बहुत खुशकिस्मत हैं।'
मेक्सिको ट्रेनिंग कैंप और विदेशी एक्सपोजर
इस साल की शुरुआत में, राष्ट्रीय तापविद्युत निगम लिमिटेड (NTPC) के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) सहयोग से, तीरंदाजी वर्ल्ड कप स्टेज 1 से पहले 26 मार्च से 5 अप्रैल तक मेक्सिको में एक विदेशी प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया, जिस पर कुल ₹57.42 लाख खर्च हुए।
इस एक्सपोजर कैंप में धीरज और ज्योति के अलावा दीपिका कुमारी और अतानु दास जैसे शीर्ष तीरंदाज भी शामिल हुए, जिससे टीम को प्रतिस्पर्धी सीज़न से पहले अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण का अमूल्य अनुभव मिला।
ज्योति ने गिनाए बुनियादी ढाँचे में आए सुधार
जापान में अपने लगातार चौथे एशियन गेम्स में हिस्सा लेने जा रहीं ज्योति ने कहा, 'मौकों और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में बहुत कुछ बदल गया है। अब हमारे पास भारत में विश्व-स्तरीय सुविधाएं हैं। खेलों को बेहतर बनाने के लिए काफी फंडिंग मिल रही है — एक्सपोजर, उपकरणों को अपग्रेड करना, विदेशी कोच और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट।'
ज्योति ने खेलो इंडिया योजना का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इसका मकसद जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को पहचानना और उन्हें सही कोचिंग व मार्गदर्शन तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा, 'यह सब केंद्र सरकार, खेल संघों, SAI और निजी संगठनों से मिलने वाले सपोर्ट की वजह से ही संभव हो पाया है।'
आगे की तैयारी और एशियन गेम्स का कार्यक्रम
20 मई से 7 जून तक सोनीपत स्थित SAI नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में एक सीनियर नेशनल तीरंदाजी कोचिंग कैंप चल रहा है, जिसमें रिकर्व और कंपाउंड कैटेगरी के 16 शीर्ष तीरंदाज भाग ले रहे हैं। इसके बाद, एशियन गेम्स में हिस्सा लेने वाले तीरंदाज 5 से 18 सितंबर तक जापान में एक एक्सपोजर कैंप में शामिल होंगे।
आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच होना निर्धारित है। भारतीय तीरंदाजी दल इस बार पदक की मजबूत दावेदारी के साथ उतरेगा।