मन की बात: PM मोदी ने केरलम के स्विमिंग क्लब की तारीफ की, 15,000 से ज़्यादा लोगों को सिखाई तैराकी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 मई 2026 को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 134वें एपिसोड में केरलम के आलुवा में संचालित एक अनूठे स्विमिंग क्लब का ज़िक्र किया, जहाँ अब तक 15,000 से अधिक लोगों को निःशुल्क तैराकी सिखाई जा चुकी है — जिनमें दिव्यांग बच्चे भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने इस पहल को समाज की सामूहिक शक्ति का जीवंत उदाहरण बताया।
क्लब की अनूठी पहचान
प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में कहा, 'गर्मी के इन दिनों में, ऐसे तो स्कूलों की छुट्टियां होती हैं, लेकिन मैं एक ऐसी क्लास की बात करूंगा, जिसमें आपका एडमिशन करने का मन कर जाएगा।' उन्होंने इस क्लब की खासियत बताते हुए कहा कि यहाँ न कोई फीस है, न बड़ी बिल्डिंग, न क्लासरूम — और सबसे रोचक बात यह कि कक्षाएँ नदी में लगती हैं। इस क्लब में बच्चे, युवा और बुजुर्ग — सभी एक साथ तैराकी सीखते हैं।
साजी वलाशेरिल का संकल्प
केरलम के आलुवा में साजी वलाशेरिल इस स्विमिंग क्लब के संचालक हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि साजी जी ने दिव्यांग बच्चों को भी तैराकी सिखाने का बीड़ा उठाया है, जो इस पहल को और अधिक विशेष बनाता है। यह क्लब समाज के हर वर्ग के लिए खुला है और पूरी तरह निःशुल्क संचालित होता है।
एक हादसे से जन्मा अभियान
प्रधानमंत्री ने इस प्रयास की पृष्ठभूमि में छिपी पीड़ा का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कुछ वर्ष पहले एक नौका हादसे में कई छात्रों की मृत्यु हो गई थी। उस दुखद घटना ने साजी जी को भीतर तक झकझोर दिया। मोदी ने कहा, 'उन्होंने सोचा, अगर बच्चों को तैरना आता होता, तो शायद कई जानें बच जातीं — बस यहीं से शुरू हुआ उनका ये अभियान।' यह ऐसे समय में प्रेरणादायक है जब जल-सुरक्षा को लेकर देशभर में जागरूकता की ज़रूरत महसूस की जा रही है।
PM मोदी की देशवासियों से अपील
कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आग्रह किया कि वे अपने आसपास ऐसे सामाजिक प्रयासों को पहचानें, उनकी सराहना करें और उनसे प्रेरणा लें। उन्होंने कहा कि भारत के हर गाँव और शहर में ऐसे प्रयास हो रहे हैं जो देश को आगे ले जा रहे हैं, भले ही उनकी चर्चा कम होती हो। मोदी ने लोगों को प्रोत्साहित किया कि वे स्वयं भी किसी सकारात्मक सामाजिक कार्य से जुड़ें।
आगे क्या
साजी वलाशेरिल के इस अभियान को प्रधानमंत्री के मंच पर मिली पहचान से इसे व्यापक राष्ट्रीय प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। 'मन की बात' में उल्लेख के बाद ऐसी पहलों को सामाजिक समर्थन और स्वयंसेवकों की भागीदारी में वृद्धि देखने को मिलती रही है।